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Surya Siddhanta (Hindi–Sanskrit) – by Uday Narayan Singh | Classical Indian Astronomy Treatise

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सूर्य सिद्धान्त (Surya Siddhanta), विद्वान् श्री उदय नारायण सिंह द्वारा सम्पादित-व्याख्यात यह 113 पृष्ठीय हिन्दी-संस्कृत ग्रंथ, प्राचीन भारतीय खगोल-शास्त्र (astronomy) एवं ज्योतिष का सर्वाधिक authoritative एवं classical संग्रह है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति, उस ज्योतिष-ग्रंथ को आधुनिक scholar-साधक तक authentic स्वरूप में पहुँचाने का एक scholarly प्रयास है — जो सहस्राब्दियों तक भारतीय खगोल-गणित का आधार-स्तंभ रहा है।

सूर्य सिद्धान्त — संस्कृत खगोल-शास्त्र का सर्वाधिक प्राचीन एवं प्रतिष्ठित ग्रंथ — को ‘पौरुष-सिद्धान्त’ अथवा ‘सौर-सिद्धान्त’ भी कहा जाता है। पारम्परिक मान्यता अनुसार, यह ग्रंथ स्वयं भगवान् सूर्य द्वारा मय असुर को उपदिष्ट किया गया था — एक प्रतीकात्मक कथा जो ग्रंथ के celestial sources एवं cosmic dignity को रेखांकित करती है। आधुनिक scholarly मत के अनुसार, इसका वर्तमान रूप लगभग 4थी-5वीं शताब्दी ईसवी का है, किन्तु इसकी मूल content अत्यन्त प्राचीन है।

ग्रंथ की संरचना 14 अध्यायों में विभक्त है, जिनमें कुल लगभग 500 श्लोक हैं। प्रत्येक अध्याय एक specific खगोलीय विषय पर समर्पित है — मध्यम-गति-अध्याय (planets के मध्यम motion), स्पष्ट-गति-अध्याय (true motion), त्रिप्रश्न-अध्याय (दिक्-स्थान-काल-निर्धारण), चन्द्र-ग्रहण, सूर्य-ग्रहण, छाया-अध्याय, ग्रह-युद्ध, नक्षत्र-दर्शन — इत्यादि।

प्रथम अध्याय ‘मध्यमाधिकार’ खगोलीय गणनाओं की मूलभूत framework प्रस्तुत करता है। काल-गणना का scholarly तंत्र — कल्प, मन्वन्तर, युग, वर्ष, मास, दिन, प्रहर, घटी, पल, विपल — यह systematic time-units, जिनकी precision आधुनिक atomic clocks से तुलनीय है, यहाँ scholarly तरीके से प्रस्तुत है। चार युगों — सत्य, त्रेता, द्वापर, कलि — की कालावधियाँ एवं उनका astronomical आधार भी विवेचित है।

ग्रहों की गति का गणितीय विवेचन ग्रंथ की एक scholarly उपलब्धि है। सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि — इन सात ग्रहों के orbits, उनकी revolutions, mean एवं true motions, उनके epicyclic models — यह सब mathematically precise तरीके से प्रस्तुत है। यह ध्यातव्य है कि यह सब heliocentric model से पूर्व का geocentric system है, किन्तु इसके भीतर भी जो mathematical accuracy है, वह आश्चर्यजनक है।

त्रिकोणमिति (trigonometry) का अध्याय खगोलीय गणनाओं की scientific आधार-शिला है। ज्या (sine), कोज्या (cosine), उत्क्रम-ज्या (versine) — इन त्रिकोणमितीय functions का scholarly विवेचन, उनकी values की tables, एवं खगोलीय applications — यह सब प्राचीन भारतीय गणितीय genius का प्रत्यक्ष साक्ष्य है। ध्यातव्य है कि sine function का आधुनिक concept ही प्राचीन भारतीय ‘ज्या’ से अरबी ‘जैब’ होते हुए Latin ‘sinus’ तक की भाषा-यात्रा का परिणाम है।

ग्रहण-गणना (eclipse calculations) के अध्याय विशेष रूप से significant हैं। सूर्य-ग्रहण एवं चन्द्र-ग्रहण के समय की scientific गणना, ग्रहण की duration, ग्रहण की magnitude, ग्रहण के दर्शन-स्थल — इन सबकी mathematical methodology यहाँ scholarly तरीके से प्रस्तुत है। यह precision आज भी ज्योतिष एवं panchanga निर्माण में उपयोगी है।

समय-निर्धारण के अध्याय भी प्रासंगिक हैं। दिन-रात्रि की लम्बाई का variation, ऋतु-निर्धारण, सायन एवं निरयन systems, संक्रान्ति-निर्धारण, अयन-गति (precession of equinoxes) का scholarly विवेचन — यह सब time-keeping की civilisational कला का दर्शन प्रस्तुत करता है।

खगोल-गणित के साथ-साथ ज्योतिष-शास्त्र की applications का भी विवेचन है। ग्रहों के transit-effects, panchanga-गणना, मुहूर्त-निर्धारण, vedic astrology के foundational principles — यह सब इस ग्रंथ से ही originate करते हैं।

श्री उदय नारायण सिंह का scholarly सम्पादन ग्रंथ की एक विशेष उपलब्धि है। उन्होंने मूल संस्कृत श्लोकों का devanagari में authentic प्रस्तुतीकरण, प्रत्येक श्लोक का हिन्दी अनुवाद, gणितीय प्रक्रियाओं की step-by-step explanation, एवं आधुनिक scientific terms के साथ correlations — यह सब प्रस्तुत किया है। यह संरचना ग्रंथ को shastric scholar एवं modern science enthusiast — दोनों के लिए accessible बनाती है।

historical महत्ता ध्यातव्य है। सूर्य सिद्धान्त ने न केवल भारतीय खगोल-परम्परा को आकार दिया, अपितु अरब-इस्लामी खगोल-शास्त्र (Al-Battani, Al-Biruni के माध्यम से) एवं medieval European astronomy को भी प्रभावित किया। यह एक civilisational legacy है, जिसका scholarly अध्ययन प्राचीन वैज्ञानिक उपलब्धियों के परीक्षण के लिए अनिवार्य है।

प्रकाशकीय गुणवत्ता उत्कृष्ट है। 113 पृष्ठीय compact आकार में इतनी scholarly content का summarisation एक achievement है। 450 रुपए मूल्य scholarly value के सम्मुख उचित है।

संस्कृत-ज्योतिष के विद्यार्थियों, खगोल-शास्त्र के researchers, आधुनिक ज्योतिषियों, panchanga-निर्माताओं, इतिहास-of-science के scholars, एवं प्रत्येक उस सुधी जिज्ञासु के लिए जो प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक genius का प्रत्यक्ष साक्षात्कार चाहता है — सूर्य सिद्धान्त एक indispensable ग्रंथ है। यह कृति भारतीय civilisational scientific विरासत का एक अमूल्य रत्न है।

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