Vaisheshika Darshanam

Description
Vaisheshika Darshanam book by Acharya Udayvir Sastri is an authoritative exposition of the Vaisheshika school of Vedic philosophy — the classical Indian system of atomic theory and metaphysics propounded by Maharshi Kanada. वैशेषिक दर्शनम् हिन्दी में महर्षि कणाद प्रणीत परमाणुवाद एवं विश्व-दर्शन का एक प्रामाणिक एवं विद्वत्तापूर्ण विवेचन प्रस्तुत किया गया है।
Vaisheshika Darshanam Book — वैशेषिक दर्शन का परिचय
वैशेषिक दर्शनम् के प्रतिपादक महर्षि कणाद हैं। प्राचीन भारत का वैदिक साहित्य इतना व्यापक है कि उन्हें पूरी तरह समझना कठिन कार्य है। वेदों में ईश्वर, सृष्टि एवं पदार्थ-विज्ञान के बारे में काफी कुछ कहा गया है। इनमें दर्शन एवं विश्व-दर्शन की जो अवधारणाएँ हैं उन्हें वैशेषिक दर्शन में व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया गया है।
‘वैशेषिक’ नाम ‘विशेष’ से आया है — अर्थात् वह दर्शन जो पदार्थों के विशेष गुणों का अध्ययन करता है। यह Vaisheshika Darshanam book पदार्थ, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष एवं समवाय — इन षट्पदार्थों का विस्तृत विवेचन प्रस्तुत करती है।
वैशेषिक दर्शनम् हिन्दी — परमाणु सिद्धान्त
वैशेषिक दर्शन में महर्षि कणाद ने जो परमाणु-सिद्धान्त प्रतिपादित किया वह आधुनिक परमाणु-भौतिकी से हजारों वर्ष पुराना है। इस वैशेषिक दर्शनम् हिन्दी ग्रन्थ में इस परमाणु-सिद्धान्त का विस्तृत एवं तर्कपूर्ण विवेचन किया गया है।
आचार्य उदयवीर शास्त्री की व्याख्या इस Vaisheshika Darshanam book को एक विशेष प्रामाणिकता प्रदान करती है। वे वैशेषिक-सूत्रों की व्याख्या वेद एवं अन्य दर्शनों के साथ तुलनात्मक दृष्टि से करते हैं जिससे पाठक को दर्शन की समग्र दृष्टि प्राप्त होती है।
Vaisheshika Darshanam Book — दर्शन-अध्येताओं के लिए
यह Vaisheshika Darshanam book भारतीय दर्शन के शोधार्थियों, वैज्ञानिक दृष्टि रखने वाले पाठकों एवं षड्दर्शन के जिज्ञासुओं के लिए अत्यन्त मूल्यवान है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह वैशेषिक दर्शनम् हिन्दी ग्रन्थ भारतीय विज्ञान-दर्शन का एक अनमोल ग्रन्थ है।
वैशेषिक दर्शन का परमाणु-सिद्धान्त आज के क्वान्टम भौतिकी के सिद्धान्तों से अनेक समानताएँ रखता है। महर्षि कणाद ने जो परमाणु (Anu) का सिद्धान्त प्रतिपादित किया वह इस दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है कि भारत में परमाणु-विज्ञान की परम्परा अत्यन्त प्राचीन है। इस Vaisheshika Darshanam book में इस वैज्ञानिक पक्ष का भी विवेचन है। वैशेषिक दर्शनम् हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है।
वैशेषिक दर्शन के षट्पदार्थों में से ‘विशेष’ पदार्थ वह है जो प्रत्येक परमाणु को अन्य परमाणुओं से अलग बनाता है। यह ‘विशेष’ की अवधारणा आधुनिक भौतिकी में कण-भौतिकी (Particle Physics) से मिलती-जुलती है। इस Vaisheshika Darshanam book में महर्षि कणाद के इस क्रान्तिकारी विचार का विस्तृत विवेचन किया गया है। वैशेषिक दर्शनम् हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है। भारतीय विज्ञान-दर्शन के जिज्ञासु इसे अवश्य पढ़ें।
वैशेषिक दर्शन एवं न्याय दर्शन का आपस में गहरा सम्बन्ध है। इन दोनों दर्शनों को मिलाकर प्रायः न्याय-वैशेषिक कहा जाता है। इस Vaisheshika Darshanam book में वैशेषिक को न्याय दर्शन के साथ समन्वित रूप में प्रस्तुत किया गया है। वैशेषिक दर्शनम् हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है।
वैशेषिक दर्शन में महर्षि कणाद ने पदार्थों के विशेष गुणों के अध्ययन के माध्यम से सृष्टि के रहस्य को उजागर करने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि समस्त सृष्टि परमाणुओं से बनी है और ये परमाणु नित्य, अविभाज्य एवं अत्यन्त सूक्ष्म हैं। आधुनिक भौतिकी का परमाणु-सिद्धान्त इसी प्राचीन वैदिक विचार का विकसित रूप है। इस Vaisheshika Darshanam book में इस तुलना को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। वैशेषिक दर्शन का अध्ययन वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह वैशेषिक दर्शनम् हिन्दी पुस्तक अभी मँगाएँ।
वैशेषिक दर्शन एवं न्याय दर्शन का आपस में गहरा सम्बन्ध है। इन दोनों दर्शनों को मिलाकर प्रायः न्याय-वैशेषिक कहा जाता है। आचार्य उदयवीर शास्त्री ने इस Vaisheshika Darshanam book में वैशेषिक को न्याय दर्शन के साथ समन्वित रूप में प्रस्तुत किया है। वैशेषिक दर्शनम् हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है। दर्शन-जिज्ञासुओं के लिए यह ग्रन्थ अनिवार्य है। वैशेषिक दर्शन भारत का प्राचीन परमाणु-विज्ञान है। Vaisheshika Darshanam book vedickarts.com पर उपलब्ध है। वैशेषिक दर्शनम् हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है।
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Govind Ram Hasanand| Vedickarts
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