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Yog Darshanam

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Description

Yog Darshanam book by Acharya Udayvir Sastri is an authoritative and comprehensive commentary on the Yoga Sutras of Maharshi Patanjali — presenting this foundational text of classical yoga philosophy with meticulous Sanskrit scholarship and deep philosophical insight. योग दर्शनम् हिन्दी में ऋषि पतञ्जलि के योगसूत्रों पर आचार्य उदयवीर शास्त्री की विद्वत्तापूर्ण एवं प्रामाणिक व्याख्या है।

Yog Darshanam Book — पतञ्जलि योग दर्शन का परिचय

ऋषि पतञ्जलि प्रणीत पतञ्जलि योग दर्शन आत्म-भू-योग दर्शन है। यह अनन्य, अनूठा, अनुपमेय योग-दर्शन जो अपने लिए आप ही प्रमाण है। इस अपूर्व और अद्भुत ग्रन्थ के समान सृष्टि में कोई अन्य यौगिक ग्रन्थ है ही नहीं।

इस Yog Darshanam book में पतञ्जलि के 196 योगसूत्रों का चतुष्पाद में विभाजन — समाधिपाद, साधनपाद, विभूतिपाद एवं कैवल्यपाद — का विस्तृत एवं तर्कपूर्ण विवेचन किया गया है। प्रत्येक सूत्र की व्याख्या संस्कृत व्याकरण, निरुक्त एवं वेद-प्रमाण के आधार पर की गई है।

योग दर्शनम् हिन्दी — आचार्य उदयवीर शास्त्री का योगदान

आचार्य उदयवीर शास्त्री षड्दर्शन के एक प्रतिष्ठित विद्वान् थे जिन्होंने समस्त छः दर्शनों पर प्रामाणिक व्याख्याएँ लिखी हैं। इस योग दर्शनम् हिन्दी ग्रन्थ में वे योगसूत्रों की व्याख्या व्याकरण एवं वेद-प्रमाण के आधार पर करते हैं जिससे पतञ्जलि के गहन विचार सुस्पष्ट हो जाते हैं।

‘पतञ्जलि योग दर्शन’ गणितीय भाषा में लिखा गया है — प्रत्येक सूत्र अपने में पूर्ण एवं सटीक है। इस Yog Darshanam book में इस गणितीय शैली को ध्यान में रखते हुए व्याख्या की गई है।

Yog Darshanam Book — योग-शास्त्र के विद्वानों के लिए

यह Yog Darshanam book संस्कृत के विद्वानों, योग-दर्शन के शोधार्थियों एवं पतञ्जलि के योगसूत्रों का गहन अध्ययन करने के इच्छुक सभी पाठकों के लिए अनिवार्य है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह योग दर्शनम् हिन्दी ग्रन्थ भारतीय योग-दर्शन का एक अत्यन्त प्रामाणिक संस्करण है।

पतञ्जलि का ‘योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः’ — योग चित्त की वृत्तियों का निरोध है — यह सूत्र पूरे योग-दर्शन का सार है। इस Yog Darshanam book में इस सूत्र की व्याख्या से लेकर कैवल्य की प्राप्ति तक की पूरी यात्रा का विवेचन किया गया है। यह योग दर्शनम् हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है। योग-दर्शन के प्रत्येक गम्भीर अध्येता के लिए यह ग्रन्थ अनिवार्य है।

पतञ्जलि के योगसूत्रों की विशेषता यह है कि वे अत्यन्त संक्षिप्त हैं किन्तु उनमें गहरे अर्थ छिपे हैं। ‘अभ्यासवैराग्याभ्यां तन्निरोधः’ — अभ्यास एवं वैराग्य से चित्त-वृत्तियों का निरोध होता है। यह Yog Darshanam book ऐसे सूत्रों की व्याख्या में आचार्य उदयवीर शास्त्री की असाधारण विद्वत्ता का परिचय देती है। योग दर्शनम् हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है। योग-साधकों के लिए यह एक अनमोल ग्रन्थ है।

योगसूत्रों का चतुर्थ पाद कैवल्यपाद योग की सर्वोच्च अवस्था का वर्णन करता है। कैवल्य — अर्थात् पुरुष की प्रकृति से पूर्ण स्वतन्त्रता — ही योग का अन्तिम लक्ष्य है। इस Yog Darshanam book में कैवल्य की इस अवस्था का विस्तृत विवेचन किया गया है। योग दर्शनम् हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है।

पतञ्जलि के योगसूत्रों में ‘योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः’ — योग चित्त की वृत्तियों का निरोध है — यह परिभाषा योग-विज्ञान की आत्मा है। इस Yog Darshanam book में इस परिभाषा की गहन व्याख्या करते हुए चित्त, वृत्ति एवं निरोध — इन तीनों पदों का विस्तृत विवेचन किया गया है। योग के अभ्यास से साधक धीरे-धीरे अपने मन की चंचलता पर नियन्त्रण पाता है और समाधि की अवस्था में पहुँचता है। आचार्य उदयवीर शास्त्री की यह व्याख्या योग-दर्शन के अध्येताओं के लिए एक अनमोल संसाधन है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह योग दर्शनम् हिन्दी पुस्तक अभी मँगाएँ।

योगसूत्रों का चतुर्थ पाद कैवल्यपाद योग की सर्वोच्च अवस्था का वर्णन करता है। कैवल्य — अर्थात् पुरुष की प्रकृति से पूर्ण स्वतन्त्रता — ही योग का अन्तिम लक्ष्य है। इस Yog Darshanam book में कैवल्य की इस अवस्था का विस्तृत विवेचन किया गया है। योग दर्शनम् हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है। पतञ्जलि योगसूत्रों के जिज्ञासुओं के लिए यह ग्रन्थ अनिवार्य है। योग दर्शन आत्मा की शान्ति का वैज्ञानिक मार्ग है। Yog Darshanam book vedickarts.com पर उपलब्ध है।

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