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Sankhya Darshan

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Description

Sankhya Darshan book by Brahmmuni Parivar Rajaki is an authentic and scholarly edition of the Sankhya school of Indian philosophy — one of the oldest and most influential of the six classical Vedic darshanas. सांख्य दर्शन हिन्दी में महर्षि कपिल प्रणीत सांख्य-दर्शन का एक प्रामाणिक एवं विद्वत्तापूर्ण विवेचन प्रस्तुत किया गया है।

Sankhya Darshan Book — सांख्य दर्शन का परिचय

भारतीय दर्शन के छः प्रकारों में से सांख्य भी एक है जो प्राचीन काल में अत्यन्त लोकप्रिय तथा प्रथित हुआ था। सांख्य दर्शन का प्रवर्त्तक महर्षि कपिल को माना जाता है। इसका सबसे प्राचीन तथा प्रामाणिक ग्रन्थ सांख्यकारिका है जिसकी रचना ईश्वर कृष्ण ने की थी।

इस Sankhya Darshan book में सांख्य के मूलभूत सिद्धान्तों — पुरुष, प्रकृति, त्रिगुण (सत्त्व, रज, तम) एवं पञ्चविंशति तत्त्वों — का विस्तृत एवं सुबोध विवेचन किया गया है। यह ग्रन्थ सांख्य-दर्शन को सरल एवं सुबोध हिन्दी में प्रस्तुत करने का एक सफल प्रयास है।

सांख्य दर्शन हिन्दी — पुरुष-प्रकृति विवेक

सांख्य दर्शन का सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान पुरुष एवं प्रकृति के बीच के विवेक का सिद्धान्त है। पुरुष — अर्थात् शुद्ध चेतना — एवं प्रकृति — अर्थात् जड़ पदार्थ — के बीच के सम्बन्ध को समझना ही बन्धन एवं मोक्ष का रहस्य है। यह सांख्य दर्शन हिन्दी पुस्तक इस विवेक को अत्यन्त स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करती है।

इस Sankhya Darshan book में सांख्य एवं योग दर्शन के बीच के गहरे सम्बन्ध का भी विवेचन किया गया है। सांख्य सिद्धान्त प्रदान करता है एवं योग साधना-पद्धति देता है — ये दोनों मिलकर एक सम्पूर्ण आध्यात्मिक पद्धति बनाते हैं।

Sankhya Darshan Book — भारतीय दर्शन के जिज्ञासुओं के लिए

यह Sankhya Darshan book भारतीय दर्शन के विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं सांख्य-दर्शन के जिज्ञासुओं के लिए अत्यन्त उपयोगी है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह सांख्य दर्शन हिन्दी ग्रन्थ भारतीय दर्शन-परम्परा का एक महत्त्वपूर्ण संसाधन है।

सांख्य दर्शन में 25 तत्त्वों का जो विवरण है वह भारतीय तत्त्व-मीमांसा का एक अद्वितीय योगदान है। प्रकृति से महत्, महत् से अहंकार, अहंकार से पञ्च तन्मात्राएँ, पञ्च महाभूत एवं इन्द्रियाँ — इस सृष्टि-क्रम का विस्तृत विवेचन इस Sankhya Darshan book में किया गया है। सांख्य दर्शन हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है।

सांख्य दर्शन में ‘त्रिगुण’ का सिद्धान्त — सत्त्व, रज एवं तम — प्रकृति के तीन मूलभूत गुणों का वर्णन करता है। इन तीन गुणों के विभिन्न अनुपातों में मिलने से ही सृष्टि की विविधता उत्पन्न होती है। यह Sankhya Darshan book इस त्रिगुण-सिद्धान्त को अत्यन्त स्पष्ट एवं सुबोध ढंग से समझाती है। सांख्य दर्शन हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है। भारतीय दर्शन के जिज्ञासु इसे अवश्य पढ़ें।

यह Sankhya Darshan book सांख्य-दर्शन की एक सुलभ एवं प्रामाणिक प्रस्तुति है। इसमें सांख्य के जटिल सिद्धान्तों को सरल हिन्दी में इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है कि सामान्य पाठक भी इन्हें समझ सके। सांख्य दर्शन हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है।

सांख्य एवं योग के बीच का सम्बन्ध अत्यन्त घनिष्ठ है। सांख्य सिद्धान्त देता है, योग साधना देता है — दोनों मिलकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इस Sankhya Darshan book में सांख्य के 25 तत्त्वों का विस्तृत विवेचन किया गया है। सत्त्व, रज एवं तम — इन त्रिगुणों की प्रकृति एवं उनका चेतना पर प्रभाव इस ग्रन्थ में सुस्पष्ट है। ब्रह्ममुनि परिवार राजकी की यह प्रस्तुति अपनी सरलता एवं प्रामाणिकता के लिए उल्लेखनीय है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह सांख्य दर्शन हिन्दी पुस्तक अभी मँगाएँ।

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