Nyaya Darshan (न्याय दर्शन) — Acharya Udayvir Shastri | Vedic Logic Philosophy Hindi Book

Description
Nyaya Darshan book by Acharya Udayvir Shastri is an authoritative and comprehensive exposition of the Nyaya school of Vedic philosophy — the classical Indian system of logic and epistemology propounded by Rishi Akshapad Gautam. न्याय दर्शन हिन्दी में ऋषि अक्षपाद गौतम प्रणीत वैदिक तर्क-शास्त्र एवं ज्ञान-मीमांसा का एक प्रामाणिक एवं विद्वत्तापूर्ण विवेचन है।
Nyaya Darshan Book — न्याय दर्शन का परिचय
न्याय दर्शन भारत के छः वैदिक दर्शनों में एक दर्शन है। इसके प्रवर्तक ऋषि अक्षपाद गौतम हैं जिनका न्यायसूत्र इस दर्शन का सबसे प्राचीन एवं प्रसिद्ध ग्रन्थ है। जिन साधनों से हमें ज्ञेय तत्त्वों का ज्ञान प्राप्त हो जाता है उन्हीं साधनों को ‘न्याय’ की संज्ञा दी गई है। देवराज ने ‘न्याय’ को परिभाषित करते हुए कहा है — ‘नीयते विवक्षितार्थः अनेन इति न्यायः’ — जिस साधन के द्वारा हम अपने विवक्षित तत्त्व के ज्ञान तक पहुँचते हैं वही न्याय है।
यह Nyaya Darshan book आचार्य उदयवीर शास्त्री की विद्वत्तापूर्ण व्याख्या के साथ न्यायसूत्रों का एक सम्पूर्ण एवं प्रामाणिक विवेचन प्रस्तुत करती है। न्याय दर्शन में प्रमाण, प्रमेय, संशय, प्रयोजन, दृष्टान्त, सिद्धान्त, अवयव, तर्क, निर्णय, वाद, जल्प, वितण्डा, हेत्वाभास, छल, जाति एवं निग्रहस्थान — इन 16 पदार्थों का विवेचन है।
न्याय दर्शन हिन्दी — चार प्रमाणों का सिद्धान्त
न्याय दर्शन का सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान प्रमाण-विज्ञान है। न्याय दर्शन में प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान एवं शब्द — इन चार प्रमाणों को ज्ञान के स्रोत माना गया है। इस Nyaya Darshan book में इन चारों प्रमाणों का विस्तृत एवं तर्कपूर्ण विवेचन किया गया है। भारतीय तर्क-शास्त्र की यह परम्परा आधुनिक दर्शन एवं विज्ञान के लिए भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।
आचार्य उदयवीर शास्त्री ने इस न्याय दर्शन हिन्दी ग्रन्थ में न्याय-सूत्रों की व्याख्या वेद-प्रमाणों के आधार पर की है। यह ग्रन्थ दार्शनिक अध्येताओं एवं तर्क-शास्त्र के जिज्ञासुओं के लिए एक अनिवार्य सन्दर्भ-ग्रन्थ है।
Nyaya Darshan Book — तर्क-शास्त्र के जिज्ञासुओं के लिए
यह Nyaya Darshan book भारतीय दर्शन के शोधार्थियों, संस्कृत के विद्वानों एवं षड्दर्शन के जिज्ञासुओं के लिए अत्यन्त मूल्यवान है। न्याय दर्शन हिन्दी का यह ग्रन्थ vedickarts.com पर उपलब्ध है और प्रत्येक दर्शन-अध्येता के संग्रह में होना चाहिए।
न्याय दर्शन में अनुमान की पाँच अवयवी प्रक्रिया — प्रतिज्ञा, हेतु, उदाहरण, उपनय एवं निगमन — भारतीय तर्क-शास्त्र की एक महत्त्वपूर्ण देन है। यह प्रक्रिया आधुनिक वैज्ञानिक विधि से अत्यन्त साम्य रखती है। इस Nyaya Darshan book में इस अनुमान-प्रक्रिया का विस्तृत एवं उदाहरण-सहित विवेचन किया गया है। न्याय दर्शन का अध्ययन न केवल दार्शनिक, अपितु वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टि से भी अत्यन्त उपयोगी है। आचार्य उदयवीर शास्त्री ने न्याय-सूत्रों की जो व्याख्या इस न्याय दर्शन हिन्दी ग्रन्थ में की है वह वेद-प्रमाणों एवं युक्ति के अद्भुत समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह ग्रन्थ vedickarts.com पर उपलब्ध है।
न्याय दर्शन हिन्दी का यह ग्रन्थ भारतीय तर्क-परम्परा की महानता को उजागर करता है। आधुनिक पाश्चात्य तर्क-शास्त्र से बहुत पहले भारत में न्याय दर्शन ने तर्क के नियमों एवं प्रमाणों की एक सम्पूर्ण वैज्ञानिक पद्धति विकसित कर ली थी। इस Nyaya Darshan book को पढ़कर पाठक यह गर्व के साथ जान सकते हैं कि तर्क-शास्त्र भारत की एक महान् देन है। न्याय दर्शन हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है। न्याय दर्शन भारतीय तर्क-विज्ञान का सर्वोत्तम ग्रन्थ है। Nyaya Darshan book vedickarts.com पर उपलब्ध है। यह ग्रन्थ दर्शन-जिज्ञासुओं के लिए एक अनिवार्य सन्दर्भ-ग्रन्थ है। न्याय दर्शन हिन्दी पुस्तक भारत की तर्क-परम्परा का एक श्रेष्ठ प्रतिनिधि ग्रन्थ है। Nyaya Darshan book vedickarts.com पर उपलब्ध है। आचार्य उदयवीर शास्त्री की इस व्याख्या को पढ़ना प्रत्येक दर्शन-अध्येता के लिए अनिवार्य है। न्याय दर्शन भारत की तार्किक परम्परा का एक अमूल्य ग्रन्थ है। Nyaya Darshan book vedickarts.com पर उपलब्ध है। न्याय-शास्त्र का यह अध्ययन पाठक की बुद्धि को तीक्ष्ण एवं विवेकशील बनाता है। न्याय दर्शन हिन्दी का अध्ययन भारतीय दर्शन की समझ के लिए अनिवार्य है। Nyaya Darshan book vedickarts.com से अभी मँगाएँ।
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Govind Ram Hasanand| Vedickarts
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