Vedanta Darshan Saar (Hindi) – by Swami Dayanand Saraswati | Vedanta Philosophy Summary

Product details
वेदान्त दर्शन सार (Vedanta Darshan Saar), महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा रचित यह 85 पृष्ठीय हिन्दी ग्रंथ, वेदान्त-दर्शन के foundational सिद्धान्तों का एक संक्षिप्त किन्तु सारगर्भित (सार-रूप) scholarly विवेचन प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति आर्य समाज परम्परा के वैदिक-दृष्टिकोण से वेदान्त-दर्शन की एक focused, accessible प्रस्तुति है।
‘वेदान्त’ — वेदों का अन्त (culmination) अथवा उनका चरम ज्ञान-भाग — उपनिषदों में निहित ब्रह्म-आत्म-तत्त्व-विषयक दर्शन को संदर्भित करता है। महर्षि दयानन्द ने इस ग्रंथ में वेदान्त के core सिद्धान्तों को अपनी विशिष्ट वैदिक-यौगिक-अर्थ-पद्धति के आलोक में प्रस्तुत किया है।
ग्रंथ का प्रथम खण्ड ब्रह्म-तत्त्व के वैदिक-वेदान्तिक स्वरूप का विवेचन प्रस्तुत करता है — सच्चिदानन्द-स्वरूप, निराकार, सर्वव्यापी, सर्वज्ञ परमात्मा का concept। महर्षि यहाँ यह स्पष्ट करते हैं कि उनका दृष्टिकोण शंकराचार्य के निर्विशेष अद्वैत से भिन्न, एक वैदिक एकेश्वरवादी framework प्रस्तुत करता है, जहाँ ईश्वर-जीव-प्रकृति की त्रिविध अनादिता स्वीकार की जाती है (त्रैत-वाद)।
**जीव-तत्त्व का विवेचन** — आत्मा की नित्यता, उसकी individual identity (जो अद्वैत के ‘सर्व-एकत्व’ से भिन्न है), तथा कर्म-फल-व्यवस्था में जीव की नैतिक स्वतंत्रता का scholarly विवेचन।
**माया-सिद्धान्त की समीक्षा** — महर्षि यहाँ शंकराचार्य के ‘माया’ सिद्धान्त की rigorous scholarly समीक्षा प्रस्तुत करते हैं, यह तर्क देते हुए कि जगत् मिथ्या (illusion) नहीं, अपितु प्रकृति से वास्तविक रूप से उत्पन्न है — यह सांख्य-दर्शन के साथ अधिक संगति रखने वाला दृष्टिकोण है।
**मोक्ष-स्वरूप का विवेचन** — जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति, आत्म-साक्षात्कार, तथा ईश्वर के साथ सामीप्य (न कि पूर्ण विलय) — यह वैदिक मोक्ष-दर्शन का scholarly exposition।
**उपनिषदों से प्रामाणिक उद्धरण** — ईशावास्य, कठ, मुण्डक, बृहदारण्यक जैसे प्रमुख उपनिषदों से महत्त्वपूर्ण सूत्रों का उद्धरण, जो महर्षि के तर्कों को shastric आधार प्रदान करते हैं।
**Comparative दृष्टिकोण** — विभिन्न वेदान्तिक schools (अद्वैत, विशिष्टाद्वैत, द्वैत) के साथ आर्य समाज के त्रैत-वाद का brief comparative विवेचन, जो पाठक को विभिन्न interpretive परम्पराओं की समझ प्रदान करता है।
महर्षि की writing-शैली यहाँ direct, तर्कसंगत, तथा evidence-based है, जो उनके व्यापक scholarly-corpus की विशेषता है।
85 पृष्ठीय संक्षिप्त किन्तु focused आयाम इसे वेदान्त-दर्शन के एक त्वरित, सारगर्भित परिचय के लिए ideal बनाता है, जो विस्तृत study से पूर्व एक foundational overview प्रदान करता है।
वेदान्त-दर्शन के नए विद्यार्थियों, आर्य समाज के साधकों, comparative philosophy के researchers, तथा प्रत्येक उस सुधी पाठक के लिए जो महर्षि दयानन्द के वैदिक-वेदान्तिक दृष्टिकोण का एक संक्षिप्त, प्रामाणिक परिचय चाहता है — वेदान्त दर्शन सार एक मूल्यवान foundational संसाधन है।
ग्रंथ में यह भी उल्लेखनीय है कि महर्षि ने अपनी विशिष्ट scholarly शैली में केवल अपने मत को assert नहीं किया, अपितु प्रत्येक तर्क को evidence-based methodology के साथ प्रस्तुत किया — उपनिषद्-उद्धरण, तार्किक विश्लेषण, तथा विरोधी मतों की rigorous समीक्षा — इस त्रिविध approach के साथ। यह intellectual rigor ग्रंथ को केवल sectarian advocacy से आगे एक genuine philosophical treatise बनाता है, जो पाठक को स्वतंत्र scholarly विचार हेतु भी प्रेरित करता है, न कि केवल blind acceptance की ओर। यह संक्षिप्त कृति इस प्रकार वेदान्त-अध्ययन की एक सुदृढ़ प्रारम्भिक नींव प्रदान करती है।
Shipping and Returns
Shipping cost is based on weight. Just add products to your cart and use the Shipping Calculator to see the shipping price.
We want you to be 100% satisfied with your purchase. Items can be returned or exchanged within 30 days of delivery.
Ramlal Kapoor Trust Books| Vedickarts
There are no question found.









Rating & Review
There are no reviews yet.