Shrimad Bhagavad Gita – Geeta Prabodhini Teeka (Hindi–Sanskrit) | Ramsukhdas

Product details
श्रीमद्भगवद्गीता (गीता प्रबोधिनी टीका) स्वामी रामसुखदास जी द्वारा रचित वह विशिष्ट संस्करण है, जो गीता के अठारह अध्यायों में निहित गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को सरल, व्यावहारिक तथा जीवनोपयोगी भाषा में समझाने हेतु विशेष रूप से प्रसिद्ध है। गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित यह संस्करण मूल संस्कृत श्लोकों के साथ हिन्दी अनुवाद तथा स्वामी रामसुखदास जी की प्रबोधिनी टीका प्रस्तुत करता है, जो केवल शब्दार्थ तक सीमित न रहकर पाठक को गीता के भावार्थ, तात्त्विक गूढ़ता तथा साधना-पक्ष से भी परिचित कराती है। स्वामी रामसुखदास जी भारतीय संत-परम्परा के उन विरल सन्तों में थे जिन्होंने गीता के सिद्धान्तों को अपने जीवन में साक्षात् चरितार्थ किया, और इसी कारण उनकी टीका में सैद्धान्तिक गहनता के साथ व्यावहारिक सरलता का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। इस ग्रन्थ में कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग तथा राजयोग के सिद्धान्तों को भगवान श्रीकृष्ण एवं अर्जुन के संवाद के माध्यम से इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है कि पाठक अपने दैनिक जीवन की समस्याओं का समाधान सहजता से प्राप्त कर सके। निष्काम कर्म, स्थितप्रज्ञता, आसक्ति-त्याग, समत्व-भाव तथा आत्म-साक्षात्कार जैसे गीता के मूल सिद्धान्तों को स्वामी जी ने अत्यन्त व्यावहारिक दृष्टान्तों सहित स्पष्ट किया है, जिससे यह ग्रन्थ केवल पाण्डित्यपूर्ण अध्ययन-सामग्री न रहकर एक जीवन-मार्गदर्शक पुस्तिका का रूप ले लेता है। गीता प्रेस की यह परम्परा शुद्ध पाठ, त्रुटिहीन मुद्रण तथा सुबोध भाषा-शैली के लिए सुविख्यात है, और प्रबोधिनी टीका इस दृष्टि से विशेष रूप से विद्यार्थियों, साधकों तथा सामान्य गृहस्थ पाठकों के लिए अनुशंसित मानी जाती है। गीता-जयन्ती, एकादशी तथा अन्य पावन अवसरों पर इस ग्रन्थ का पारायण तथा स्वाध्याय विशेष पुण्यदायी माना जाता है। अनेक गीता-स्वाध्याय-मण्डल तथा सत्संग-समूह इसी टीका को आधार बनाकर गीता का सामूहिक अध्ययन करते हैं, जिससे इसकी व्यापक स्वीकृति सिद्ध होती है। भारतीय दर्शन, वेदान्त तथा योग-साधना के अध्येताओं के लिए भी यह ग्रन्थ एक प्रामाणिक सन्दर्भ-स्रोत है, क्योंकि इसमें गूढ़ तात्त्विक विषयों को भी अत्यन्त सुगम भाषा में प्रस्तुत किया गया है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से यह प्रामाणिक संस्करण अब जिज्ञासु पाठकों तथा साधकों तक सहजता से पहुँच सकेगा, जो गीता के अमृत-ज्ञान को अपने जीवन में उतारना चाहते हैं। यह संस्करण विशेष रूप से उन साधकों के लिए अनुशंसित है जो गीता का केवल शास्त्रीय अध्ययन न करके उसे जीवन-व्यवहार में उतारना चाहते हैं, क्योंकि स्वामी रामसुखदास जी की टीका में प्रत्येक श्लोक के साथ व्यावहारिक जीवन-दृष्टान्त जोड़े गए हैं। गीता-जयन्ती, एकादशी एवं गुरु-पूर्णिमा के अवसर पर सत्संग-मण्डलियों द्वारा इस टीका का सामूहिक स्वाध्याय किया जाता है। विद्यालयों, आश्रमों तथा साधना-केन्द्रों में भी यह संस्करण पाठ्य-सामग्री के रूप में व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है, जिससे इसकी शैक्षिक उपयोगिता भी सिद्ध होती है। कॉर्पोरेट जगत से जुड़े व्यक्ति, जो कर्मयोग के सिद्धान्त को अपने व्यावसायिक जीवन में लागू करना चाहते हैं, भी इस टीका का अध्ययन कर गीता के प्रबन्धकीय सन्देश को समझने का प्रयास करते हैं। यह संस्करण तनाव-प्रबन्धन, निर्णय-क्षमता तथा मानसिक स्थिरता की दृष्टि से भी अत्यन्त उपयोगी माना जाता है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से स्वामी रामसुखदास जी की यह प्रामाणिक टीका अब साधकों तथा जिज्ञासुओं तक सुगमता से पहुँच सकेगी। विद्यालयों एवं कॉलेजों में मूल्य-शिक्षा के अन्तर्गत भी इस टीका के अंशों का सन्दर्भ लिया जाता है। यह टीका विशेष रूप से उन पाठकों के लिए लाभप्रद है जो प्रथम बार गीता का अध्ययन कर रहे हैं, क्योंकि स्वामी जी की सरल भाषा-शैली प्रारम्भिक जिज्ञासुओं के मन में उत्पन्न होने वाली शंकाओं का समाधान स्वाभाविक रूप से कर देती है। अनेक प्रबन्धन-संस्थान तथा नेतृत्व-विकास कार्यक्रमों में भी गीता के सिद्धान्तों को आधुनिक सन्दर्भ में प्रस्तुत करने हेतु इस टीका का सन्दर्भ लिया जाता है, जिससे इसकी व्यावहारिक उपयोगिता प्रमाणित होती है। मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव-मुक्ति हेतु योग-साधना के साथ गीता-स्वाध्याय को जोड़ने वाले आधुनिक साधक भी इस टीका की सरल भाषा-शैली की विशेष रूप से प्रशंसा करते हैं। यह संस्करण प्रत्येक आयु-वर्ग के पाठकों के लिए समान रूप से सुगम एवं लाभप्रद सिद्ध होता है।
Shipping and Returns
Shipping cost is based on weight. Just add products to your cart and use the Shipping Calculator to see the shipping price.
We want you to be 100% satisfied with your purchase. Items can be returned or exchanged within 30 days of delivery.
Gita Press Gorakhpur| Vedickarts
There are no question found.







Rating & Review
There are no reviews yet.