Shree Vishnupuran – Sachitra Hindi Anuvad (Hindi–Sanskrit) | Gita Press

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श्री विष्णुपुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित) अष्टादश महापुराणों में अत्यन्त प्राचीन एवं प्रतिष्ठित वैष्णव पुराण है, जिसमें सृष्टि-उत्पत्ति, पालन-तत्त्व तथा भगवान विष्णु के अनन्त स्वरूपों एवं अवतारों की महिमा का विस्तृत एवं क्रमबद्ध वर्णन किया गया है। गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित यह संस्करण मूल संस्कृत श्लोकों के साथ सरल एवं प्रांजल हिन्दी अनुवाद तथा सचित्र प्रस्तुति में उपलब्ध है, जिससे पाठक इस गूढ़ ग्रन्थ के भावार्थ को सहजता से आत्मसात् कर सके। विष्णुपुराण में सृष्टि-विज्ञान, कल्प-मन्वन्तर-विभाजन, वंशानुक्रम-वर्णन, ध्रुव तथा प्रह्लाद जैसे भक्तों की कथाएँ, तथा भगवान विष्णु के दशावतारों—मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध एवं कल्कि—का सुव्यवस्थित विवरण प्राप्त होता है। इस ग्रन्थ की विशेष महत्ता यह है कि यह केवल कथा-संकलन नहीं अपितु वैष्णव दर्शन, भक्ति-सिद्धान्त तथा सृष्टि-विज्ञान का भी समन्वयकारी स्रोत है, जिसमें विष्णु को सृष्टि के पालनकर्ता, धर्म-संस्थापक तथा करुणामय परमतत्त्व के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। प्रह्लाद-चरित्र के माध्यम से भक्ति की दृढ़ता तथा ध्रुव-चरित्र के माध्यम से तपस्या एवं दृढ़ संकल्प का आदर्श प्रस्तुत किया गया है, जो आज भी भारतीय समाज में नैतिक एवं आध्यात्मिक प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। सचित्र प्रस्तुति इस संस्करण की विशेष पहचान है—प्रत्येक प्रमुख अवतार एवं प्रसंग के साथ दिए गए चित्र कथा के दृश्य-स्वरूप को समझने में सहायक होते हैं। गीता प्रेस की यह परम्परा शुद्ध पाठ, त्रुटिहीन मुद्रण तथा सुगम भाषा-शैली के लिए विश्वप्रसिद्ध है, जिससे यह ग्रन्थ शोधार्थियों से लेकर सामान्य गृहस्थ पाठक तक सभी के लिए समान रूप से उपयोगी है। एकादशी, वामन-द्वादशी तथा अन्य वैष्णव पर्वों पर इस ग्रन्थ का पारायण विशेष पुण्यदायी माना जाता है। भारतीय पुराण-साहित्य, वैष्णव दर्शन तथा अवतार-सिद्धान्त के अध्येताओं के लिए यह ग्रन्थ एक अनिवार्य सन्दर्भ-स्रोत है। धार्मिक कथावाचकों तथा पुरोहितों के लिए भी यह प्रवचन एवं कथा-वर्णन हेतु प्रामाणिक आधार प्रदान करता है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से गीता प्रेस का यह प्रामाणिक सचित्र संस्करण श्रद्धालुओं एवं विद्यार्थियों तक सहजता से उपलब्ध हो सकेगा। यह सचित्र संस्करण विशेष रूप से उन पाठकों के लिए उपयुक्त है जो दशावतार-कथाओं को सचित्र स्वरूप में समझना चाहते हैं, जिससे बालकों एवं नवीन पाठकों के लिए भी यह ग्रन्थ सहज बोधगम्य बन जाता है। वैष्णव मन्दिरों के पुजारी तथा कथावाचक इस ग्रन्थ को प्रवचन-सामग्री के रूप में व्यापक रूप से उपयोग करते हैं। गीता प्रेस की स्पष्ट मुद्रण-शैली तथा सुन्दर चित्रांकन इस संस्करण को पारिवारिक धार्मिक संग्रह एवं नित्य स्वाध्याय हेतु एक आदर्श एवं विश्वसनीय चयन सिद्ध करते हैं। भागवत एवं अन्य वैष्णव पुराणों के समानान्तर अध्ययन हेतु भी शोधार्थी इस विष्णुपुराण-संस्करण का सन्दर्भ लेते हैं, विशेष रूप से सृष्टि-विज्ञान एवं कल्प-विभाजन के सिद्धान्तों की तुलना करने हेतु। वैष्णव सम्प्रदायों के अनुयायी इस ग्रन्थ को अपने नित्य स्वाध्याय का अंग बनाते हैं। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से गीता प्रेस का यह सचित्र एवं प्रामाणिक संस्करण सुरक्षित पैकेजिंग के साथ श्रद्धालुओं तथा अध्येताओं तक सुगमता से पहुँचाया जाता है। विष्णु-मन्दिरों में प्रतिष्ठा-समारोह तथा विशेष पूजा-अनुष्ठानों के अवसर पर भी इस ग्रन्थ का पाठ विशेष रूप से आयोजित किया जाता है। भगवान विष्णु के अवतार-सिद्धान्त की वैज्ञानिक एवं क्रमिक व्याख्या इस ग्रन्थ को तुलनात्मक धर्म-अध्ययन की दृष्टि से भी अत्यन्त मूल्यवान बनाती है, जिससे विद्वज्जन इसे गम्भीरता से अपने शोध-कार्य में सम्मिलित करते हैं। चार धाम तथा अन्य वैष्णव तीर्थों की यात्रा करने वाले श्रद्धालु भी यात्रा-पूर्व इस ग्रन्थ का अध्ययन कर तीर्थ-महिमा को आत्मसात् करने का प्रयास करते हैं, जिससे इसकी तीर्थ-यात्रा-साहित्य में भी विशेष उपयोगिता सिद्ध होती है। अनेक धार्मिक शिक्षण-संस्थान अपने पाठ्यक्रम में विष्णुपुराण के अंशों को सम्मिलित करते हैं, जिससे विद्यार्थियों को वैष्णव दर्शन की मूल अवधारणाओं से प्रारम्भिक स्तर पर ही परिचित कराया जा सके। यह संस्करण उस शैक्षणिक आवश्यकता की पूर्ति भी भली-भाँति करता है।
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