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Atharvavediya Brihatsarvanukramnika (Sanskrit–Hindi) – by Ramgopal Shastri | Atharvaveda Index

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अथर्ववेदीय बृहत्सर्वानुक्रमणिका (Atharvavediya Brihatsarvanukramnika), विद्वान् श्री रामगोपाल शास्त्री द्वारा रचित यह 160 पृष्ठीय Sanskrit-Hindi द्वि-भाषी ग्रंथ, अथर्ववेद के सम्पूर्ण मन्त्र-राशि का एक comprehensive scholarly index (सर्वानुक्रमणी) प्रस्तुत करता है — जो अथर्ववेद के 20 काण्डों, 730 सूक्तों, तथा लगभग 6000 मन्त्रों को systematically catalog करती है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति अथर्ववेदीय शोध के लिए एक अनिवार्य classical reference-tool है।

**’सर्वानुक्रमणी’** — जैसा कि इसके ‘ऋक्-सर्वानुक्रमणी’ (ऋग्वेद के लिए कात्यायन-कृत) समकक्ष से पहले से परिचित है — Vedic mantra-catalog की एक प्राचीन classical परम्परा है। यह प्रत्येक सूक्त एवं मन्त्र के लिए उसका ऋषि (द्रष्टा), देवता (सम्बोधित), तथा छन्द (metrical structure) का systematic record प्रस्तुत करती है। ‘बृहत्’ (विशाल) शब्द इंगित करता है कि यह अथर्ववेद की सर्वाधिक comprehensive एवं विस्तृत अनुक्रमणी है।

श्री रामगोपाल शास्त्री ने अथर्ववेद के लिए यह आवश्यक scholarly tool तैयार किया है, जो पूर्व में उपलब्ध अल्प एवं अपूर्ण अनुक्रमणिकाओं की तुलना में अधिक authoritative एवं comprehensive है।

ग्रंथ की scholarly संरचना अथर्ववेद के 20 काण्डों के अनुरूप है। प्रत्येक सूक्त के लिए provided है: सूक्त-संख्या (काण्ड-सूक्त format में), मन्त्र-द्रष्टा ऋषि का नाम, सूक्त का देवता, छन्द (metrical pattern), तथा मन्त्र-संख्या।

**ऋषि-catalog** का scholarly महत्त्व — अथर्ववेद के मन्त्र-द्रष्टा ऋषियों — अथर्वा, भृगु, अंगिरस, कश्यप, ब्रह्मा जैसे प्रमुख ऋषियों — की identity एवं उनके सूक्तों का systematic record, जो Vedic tradition के authorship-structure की समझ के लिए महत्त्वपूर्ण है।

**देवता-catalog** — अथर्ववेद में सम्बोधित देवताओं की विविधता का record — अग्नि, इन्द्र, वरुण, सूर्य जैसे परम्परागत वैदिक देवताओं के साथ-साथ, अथर्ववेद की विशिष्ट देवता-श्रेणियाँ भी — जैसे रोग-निवारक शक्तियाँ, औषधि-देवता, तथा अन्य practical-purpose-देवता।

**छन्द-catalog** — अथर्ववेद में प्रयुक्त विभिन्न छन्दों का systematic record, जो इसकी काव्यात्मक विविधता को उजागर करता है।

**Statistical एवं comparative अध्ययन** के लिए यह अनुक्रमणी एक valuable data-source है — कौन-सा ऋषि सर्वाधिक सूक्तों का द्रष्टा है, कौन-सा देवता सर्वाधिक invoked है, कौन-सा छन्द सर्वाधिक प्रयुक्त है — यह सब quantitative-scholarly analyses इस अनुक्रमणी के आधार पर सम्भव हैं।

**Textual-critical उपयोग** — विभिन्न अथर्ववेद-manuscript-traditions (शौनकीय एवं पैप्पलाद शाखाओं) के बीच cross-verification के लिए भी यह अनुक्रमणी एक vital tool है।

**Practical utility** — यज्ञ-कर्ता-purohits एवं वेद-पाठियों के लिए भी यह अनुक्रमणी उपयोगी है, जो specific अवसरों के लिए उपयुक्त मन्त्रों को खोजने में इसका उपयोग कर सकते हैं — जैसे किस देवता के लिए, किस occasion के लिए, कौन-सा विशिष्ट सूक्त उपयुक्त है।

Sanskrit-Hindi द्वि-भाषी प्रस्तुति ग्रंथ को व्यापक scholarly एवं practitioner-audience के लिए सुलभ बनाती है। 160 पृष्ठीय आयाम एक comprehensive किन्तु focused reference-work के लिए उपयुक्त है।

Vedic literature के advanced researchers, अथर्ववेद specialists, comparative Vedic studies के अध्येताओं, यज्ञ-कर्ता-purohits, वैदिक gurukulas के acharyas, संस्कृत-वेद-शास्त्र के विद्यार्थियों, तथा प्रत्येक उस serious जिज्ञासु के लिए जो अथर्ववेद के systematic scholarly indexing तक authentic पहुँच चाहता है — अथर्ववेदीय बृहत्सर्वानुक्रमणिका एक indispensable primary scholarly संसाधन है।

श्री रामगोपाल शास्त्री ने ग्रंथ के परिशिष्ट में एक comparative नोट भी प्रदान की है, जो अथर्ववेदीय अनुक्रमणी को ऋग्वेदीय कात्यायन-सर्वानुक्रमणी की methodology के साथ तुलना करती है, जिससे पाठक दोनों वेदों की catalog-परम्पराओं के बीच के similarities एवं differences को समझ सकते हैं। यह comparative-scholarly-approach ग्रंथ को केवल एक isolated reference-work से आगे, comparative Vedic-textual-studies के व्यापक framework में एक valuable contribution बनाता है, जो researchers को दोनों वेदों के catalog-traditions के बीच cross-referencing में सहायक है।

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