Agni Puran (Hindi) – Dharma, Jyotish, Ayurveda | Gita Press Gorakhpur

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अग्निपुराण भारतीय पुराण-साहित्य के अष्टादश महापुराणों में अत्यन्त विशिष्ट एवं विश्वकोशीय स्वरूप का ग्रन्थ माना जाता है, जिसमें धर्म, राजनीति, आयुर्वेद, ज्योतिष, व्याकरण, काव्यशास्त्र, मन्त्र-विद्या तथा मूर्ति-निर्माण जैसे अनेकविध विषयों का विस्तृत एवं व्यावहारिक वर्णन सम्मिलित है। गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित यह संस्करण मूल ग्रन्थ के भावार्थ को सरल एवं सुबोध हिन्दी भाषा में प्रस्तुत करता है, जिससे सामान्य पाठक भी इस विश्वकोशीय ग्रन्थ के विविध विषयों से सहजता से परिचित हो सके। अग्निपुराण में भगवान विष्णु के अवतारों की कथा, शिव-पूजन-विधि, व्रत-कथाएँ, तीर्थ-महिमा के साथ-साथ राजनीति-शास्त्र, युद्ध-कला, आयुर्वेदिक चिकित्सा-पद्धति, ज्योतिष-गणना तथा काव्य-रचना के सिद्धान्तों का भी विस्तृत वर्णन मिलता है, जो इस ग्रन्थ को अन्य पुराणों से भिन्न एवं अद्वितीय बनाता है। इस ग्रन्थ की विशेष महत्ता यह है कि यह केवल धार्मिक ग्रन्थ न रहकर प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान का एक समग्र संकलन प्रस्तुत करता है, जिसमें तत्कालीन समाज की विविध आवश्यकताओं—धार्मिक, राजनीतिक, चिकित्सकीय तथा साहित्यिक—की पूर्ति हेतु व्यावहारिक मार्गदर्शन सम्मिलित है। गीता प्रेस की यह परम्परा शुद्ध पाठ, त्रुटिहीन मुद्रण तथा सुगम भाषा-शैली के लिए विश्वभर में विश्वसनीय मानी जाती है। प्राचीन भारतीय आयुर्वेद, ज्योतिष तथा राजनीति-शास्त्र के अध्येताओं के लिए यह ग्रन्थ एक अमूल्य सन्दर्भ-स्रोत है, क्योंकि इसमें वर्णित सिद्धान्त आज भी अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए हैं। मूर्ति-निर्माण तथा मन्दिर-स्थापत्य से सम्बन्धित अध्याय भारतीय शिल्प-कला के शोधार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होते हैं। काव्यशास्त्र तथा व्याकरण से सम्बन्धित अंश संस्कृत-साहित्य के विद्यार्थियों के लिए भी महत्त्वपूर्ण अध्ययन-सामग्री प्रदान करते हैं। धार्मिक अनुष्ठानों तथा व्रत-विधियों से सम्बन्धित अध्याय गृहस्थ जीवन में उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से गीता प्रेस का यह प्रामाणिक अग्निपुराण संस्करण शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा श्रद्धालुओं तक सुरक्षित पैकेजिंग सहित सुगमता से पहुँचाया जाता है, जिससे प्राचीन भारतीय ज्ञान-परम्परा का यह विश्वकोशीय ग्रन्थ नई पीढ़ी तक संचरित हो सके। प्राचीन भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा-पद्धति के अध्येता इस ग्रन्थ में वर्णित औषधि-सम्बन्धी अंशों का विशेष रूप से अध्ययन करते हैं, जिससे उन्हें प्राचीन चिकित्सा-विज्ञान की गहन जानकारी प्राप्त होती है। ज्योतिष-शास्त्र के विद्यार्थी भी इस ग्रन्थ में वर्णित ग्रह-गणना तथा फलादेश-सम्बन्धी सिद्धान्तों का सन्दर्भ लेते हैं। संस्कृत-काव्यशास्त्र के अध्येताओं के लिए अलंकार तथा छन्द-सम्बन्धी अध्याय भी अत्यन्त मूल्यवान सिद्ध होते हैं। मूर्तिकला तथा मन्दिर-निर्माण में संलग्न शिल्पकार भी परम्परागत रूप से इस ग्रन्थ के सिद्धान्तों का अनुसरण करते आए हैं। यह ग्रन्थ प्राचीन भारत की बहुआयामी ज्ञान-परम्परा का एक जीवन्त प्रमाण प्रस्तुत करता है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से यह प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण सुरक्षित पैकेजिंग सहित शोधार्थियों एवं श्रद्धालुओं तक पहुँचाया जाता है। यह ग्रन्थ प्राचीन भारत की विश्वकोशीय ज्ञान-परम्परा को समझने हेतु एक प्रतिनिधि स्रोत है, जिससे विद्यार्थियों को एक ही ग्रन्थ में बहुआयामी ज्ञान प्राप्त करने का दुर्लभ अवसर मिलता है। भारतीय प्राचीन सैन्य-विज्ञान तथा युद्ध-कला के अध्येताओं के लिए भी इस ग्रन्थ में वर्णित धनुर्वेद-सम्बन्धी अंश विशेष महत्त्व रखते हैं। शिल्पकला, चित्रकला तथा वास्तु-निर्माण से जुड़े कारीगर परम्परागत रूप से इस ग्रन्थ के मार्गदर्शक सिद्धान्तों का अनुसरण करते रहे हैं। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से यह प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण सुरक्षित पैकेजिंग सहित शोधार्थियों तथा श्रद्धालुओं तक समयबद्ध रूप से पहुँचाया जाता है। यह ग्रन्थ भारतीय ज्ञान-परम्परा की विविधता तथा गहनता को समझने के इच्छुक प्रत्येक जिज्ञासु पाठक के लिए एक अमूल्य तथा स्थायी सन्दर्भ-सामग्री सिद्ध होता है। भारतीय समाज में ज्ञान के इस बहुआयामी संकलन को गौरव के साथ संरक्षित रखा जाता है, जिससे यह ग्रन्थ पीढ़ियों तक अपनी प्रासंगिकता बनाए रखता है।
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