Aahar-Darpan (Hindi) – by Vaidya Ramgopal Shastri | Ayurvedic Diet Guide

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आहार-दर्पण (Aahar-Darpan), विद्वान् वैद्य श्री रामगोपाल शास्त्री द्वारा रचित यह 32 पृष्ठीय संक्षिप्त किन्तु सारगर्भित हिन्दी पुस्तिका, आयुर्वेदीय आहार-विज्ञान के मूलभूत सिद्धान्तों का एक scholarly किन्तु अत्यंत practical दर्पण प्रस्तुत करती है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह लघु कृति दैनिक जीवन में सम्यक् आहार के महत्त्व को concise एवं सुगम रूप में उजागर करती है।
‘आहार-दर्पण’ — ‘आहार’ (भोजन) का ‘दर्पण’ (मुख-दर्शक शीशा) — यह शीर्षक इंगित करता है कि यह ग्रंथ पाठक को अपने आहार-व्यवहार को स्पष्टता से देखने एवं समझने में सहायक है। वैद्य रामगोपाल शास्त्री ने अपनी वैद्यक-विद्वत्ता का उपयोग कर यह संक्षिप्त किन्तु व्यावहारिक मार्गदर्शिका रची है।
ग्रंथ का प्रथम खण्ड आयुर्वेदीय आहार-सिद्धान्तों का scholarly परिचय प्रस्तुत करता है। षड्-रस (मधुर, अम्ल, लवण, कटु, तिक्त, कषाय) का सम्यक् सेवन, सात्त्विक-राजसिक-तामसिक भोजन का वर्गीकरण, तथा प्रत्येक व्यक्ति की देह-प्रकृति (वात-पित्त-कफ) के अनुरूप उपयुक्त आहार का चयन — यह foundational सिद्धान्त संक्षिप्त किन्तु स्पष्ट रूप से प्रस्तुत हैं।
अनुकूल-विरुद्ध आहार का विवेचन — कौन-से खाद्य-पदार्थ एक साथ सेवन करने योग्य नहीं (विरुद्धाहार), जैसे दूध के साथ खट्टे फल, मछली के साथ दूध — यह practical guidance दैनिक जीवन में तत्काल applicable है।
ऋतु-अनुसार आहार-परिवर्तन का भी संक्षिप्त विवेचन है — ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमन्त, शिशिर, वसन्त — इन छह ऋतुओं में शरीर की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप आहार में क्या समायोजन करना चाहिए।
उपवास का वैज्ञानिक महत्त्व, नियमित भोजन-समय का पाचन-तंत्र पर प्रभाव, अति-भोजन के दुष्परिणाम — यह सब का सहज व्यावहारिक विवेचन ग्रंथ का एक मूल्यवान अंश है।
वैद्य रामगोपाल शास्त्री ने कुछ common रोगों — अपच, कब्ज, अम्लता, मधुमेह — के लिए सरल आहार-सम्बन्धी सुझाव भी दिए हैं, जो सामान्य गृहस्थ के लिए तुरंत उपयोगी हैं।
ग्रंथ की भाषा सरल, प्रत्यक्ष हिन्दी है, जो आयुर्वेदीय terminology को आम पाठक के लिए सुगम बनाती है। 32 पृष्ठीय अत्यंत compact आयाम इसे एक single-sitting में पढ़े जाने योग्य तथा रसोई-घर में रखे जाने योग्य ready-reference बनाता है।
यह पुस्तिका किसी विस्तृत treatise का दावा नहीं करती — यह एक focused, essential-principles-केन्द्रित guide है, जो अपनी संक्षिप्तता में ही अपनी शक्ति रखती है। प्रत्येक वाक्य सुविचारित एवं तुरंत actionable है।
स्वास्थ्य-चेतन गृहस्थों, आयुर्वेद में रुचि रखने वाले नए पाठकों, गृहणियों जो अपने परिवार के भोजन-प्रबंधन में सुधार लाना चाहती हैं, तथा प्रत्येक उस सुधी पाठक के लिए जो आयुर्वेदीय आहार-सिद्धान्तों का एक त्वरित, सुलभ, तथा व्यावहारिक परिचय चाहता है — आहार-दर्पण एक संक्षिप्त किन्तु मूल्यवान दैनिक साथी है।
ग्रंथ में विशेष रूप से बच्चों एवं वृद्धजनों के लिए उपयुक्त आहार-व्यवस्था पर भी संक्षिप्त किन्तु मूल्यवान सुझाव दिए गए हैं — कैसे बढ़ते बच्चों की पोषण-आवश्यकताओं को पूरा किया जाए, कैसे वृद्धावस्था में पाचन-शक्ति के अनुरूप हल्का किन्तु पौष्टिक भोजन अपनाया जाए। यह life-stage-sensitive guidance ग्रंथ को समस्त परिवार के लिए प्रासंगिक बनाती है।
वैद्य रामगोपाल शास्त्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि आहार केवल शारीरिक पोषण का साधन नहीं, अपितु मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य का भी आधार है — सात्त्विक भोजन मन को शान्त एवं एकाग्र रखता है, जबकि तामसिक-राजसिक भोजन मानसिक अशान्ति उत्पन्न कर सकता है। यह holistic दृष्टिकोण ग्रंथ को केवल physical health-guide से आगे एक समग्र जीवन-शैली-मार्गदर्शक बनाता है। इस प्रकार यह संक्षिप्त पुस्तिका अपने सीमित आकार के बावजूद एक comprehensive एवं व्यावहारिक आहार-दर्शन प्रस्तुत करती है, जो प्रत्येक गृहस्थ के दैनिक जीवन में तुरंत लागू किया जा सकता है। यही कारण है कि यह लघु पुस्तिका पीढ़ियों से गृहस्थ-परिवारों में एक विश्वसनीय रसोई-साथी बनी हुई है।
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