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यजुर्वेद संहिता | Yajurveda Samhita | स्वामी जगदीश्वरानन्द सरस्वती

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यजुर्वेद संहिता चार वेदों में से एक महत्वपूर्ण वैदिक ग्रंथ है जिसमें यज्ञ की विधि और उससे संबंधित मंत्रों का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह ग्रंथ मुख्यतः गद्य और पद्य मंत्रों का संग्रह है जिन्हें ‘यजुस’ कहा जाता है।

यजुर्वेद को प्राचीन वैदिक परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है क्योंकि इसमें यज्ञ, धर्म और वैदिक अनुष्ठानों से संबंधित अनेक सिद्धांतों का वर्णन किया गया है। इस ग्रंथ में ऋग्वेद के कई मंत्र भी सम्मिलित हैं, किन्तु इसकी शैली मुख्यतः गद्यात्मक है।यजुर्वेद में गद्यात्मक मंत्रों के साथ-साथ पद्यात्मक मंत्र भी हैं, जिनमें से कई ऋग्वेद और अथर्ववेद से लिए गए हैं। वैदिक परंपरा में इसकी दो प्रमुख शाखाएँ मानी जाती हैं—कृष्ण यजुर्वेद और शुक्ल यजुर्वेद। यह संस्करण वैदिक अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों और वेदों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी है।

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