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Yajurveda Bhashya Vivaran – Set of 2 Books (Hindi–Sanskrit) – by Swami Vidyanand Saraswati | Yajurveda Commentary

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यजुर्वेद भाष्य विवरण (2 भागों का समुच्चय) — Yajurveda Bhashya Vivaran, स्वामी विद्यानन्द सरस्वती द्वारा रचित यह 1487 पृष्ठीय Hindi-Sanskrit द्वि-भाषी विशाल ग्रंथ-समुच्चय, यजुर्वेद के सम्पूर्ण मन्त्र-राशि का एक comprehensive, systematic, तथा scholarly विस्तृत विवरण-भाष्य प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह monumental कृति यजुर्वेदीय अध्ययन के लिए एक authoritative आधुनिक हिन्दी संसाधन है।

यजुर्वेद — चारों वेदों में यज्ञ-कर्म से सर्वाधिक directly सम्बद्ध — इसकी दो प्रमुख शाखाएँ हैं, शुक्ल एवं कृष्ण। यह ग्रंथ यजुर्वेद के comprehensive मन्त्र-अर्थ-विवरण प्रस्तुत करता है, जो यज्ञ-कर्मकाण्ड की गहन Vedic-philosophical दृष्टि को उजागर करता है।

स्वामी विद्यानन्द सरस्वती की scholarly methodology महर्षि दयानन्द की वैदिक-यौगिक-अर्थ-पद्धति पर आधारित है। इस ग्रंथ में यजुर्वेद के प्रत्येक अध्याय के मन्त्रों का mantra-by-mantra विवेचन प्रस्तुत है — मूल संस्कृत पाठ, पद-च्छेद, अन्वय, हिन्दी अनुवाद, तथा scholarly व्याख्या।

**यज्ञ-कर्मकाण्ड का दार्शनिक विवेचन** ग्रंथ का central content है — दर्श-पूर्णमास, चातुर्मास्य, अग्निष्टोम, राजसूय, अश्वमेध जैसे विभिन्न यज्ञों से सम्बन्धित मन्त्रों का अर्थ केवल ritualistic नहीं, अपितु इसकी गहन आध्यात्मिक-philosophical significance को भी उजागर किया गया है — कैसे बाह्य यज्ञ-कर्म आन्तरिक आत्म-शुद्धि एवं ईश्वर-समर्पण का प्रतीक है।

**ईशावास्य उपनिषद्** — जो शुक्ल यजुर्वेद का 40वाँ अध्याय है — का विशेष विस्तृत scholarly विवेचन ग्रंथ का एक प्रकाशमान खण्ड है। ‘ईशावास्यमिदं सर्वम्’ — समस्त जगत् ईश्वर से व्याप्त है — इस foundational सूत्र से लेकर अंतिम मन्त्र तक, इस उपनिषद् की गहन दार्शनिक गहराई का scholarly exposition।

**शतरुद्रिय** (यजुर्वेद अध्याय 16) का भी comprehensive विवेचन है — रुद्र-सम्बन्धी मन्त्रों की scholarly पुनर्व्याख्या, जो पौराणिक शिव-देवता के बजाय ईश्वर के ‘रुद्र’ (दुःख-निवारक) गुण को उजागर करती है।

**महामृत्युञ्जय मन्त्र** का विशेष scholarly विवेचन भी उल्लेखनीय है — इस विश्व-प्रसिद्ध मन्त्र का authentic यौगिक-अर्थ, इसकी उपासना-पद्धति, तथा इसके आध्यात्मिक-मनोवैज्ञानिक लाभ।

**पुरुष-सूक्त** का भी विस्तृत विवेचन है — cosmic पुरुष का सिद्धान्त, सृष्टि की उत्पत्ति-प्रक्रिया, तथा वर्ण-व्यवस्था के मूल कर्म-आधारित सिद्धान्त की scholarly व्याख्या।

**यज्ञ के सामाजिक-आर्थिक आयाम** का भी विवेचन ग्रंथ में है — कैसे यज्ञ-संस्कृति प्राचीन भारतीय समाज में सामूहिक सहयोग, दान, तथा resource-sharing को प्रोत्साहित करती थी।

द्वितीय भाग में विशेष रूप से कठिन एवं विवादास्पद मन्त्रों का detailed scholarly विश्लेषण है, जहाँ स्वामी विद्यानन्द ने विभिन्न interpretive परम्पराओं (सायण, महीधर, उव्वट) के मतों का तुलनात्मक विवेचन प्रस्तुत किया है, साथ ही महर्षि दयानन्द की अपनी scholarly position को भी स्पष्ट किया है।

आधुनिक व्यावहारिक अनुप्रयोग पर भी विशेष बल है — कैसे यजुर्वेदीय मन्त्रों का दैनिक स्वाध्याय, यज्ञ-अनुष्ठान, तथा आध्यात्मिक साधना में practical उपयोग किया जा सकता है।

1487 पृष्ठीय विशाल आयाम, 2-भागीय संरचना — यह ग्रंथ-समुच्चय यजुर्वेद-अध्ययन के लिए एक comprehensive, authoritative आधुनिक हिन्दी संसाधन प्रस्तुत करता है।

Vedic literature के advanced researchers, यजुर्वेद specialists, यज्ञ-कर्ता-purohits, आर्य समाज के साधकों, वैदिक gurukulas के acharyas, तथा प्रत्येक उस सुधी जिज्ञासु के लिए जो यजुर्वेद के सम्पूर्ण वैभव का comprehensive scholarly हिन्दी परिचय चाहता है — यजुर्वेद भाष्य विवरण (2 भाग) एक indispensable ultimate scholarly संसाधन है।

ग्रंथ के अंत में स्वामी विद्यानन्द सरस्वती ने एक विषय-वार सूचकांक भी प्रदान की है, जो पाठकों को यजुर्वेद के विशाल मन्त्र-संग्रह में से किसी specific विषय अथवा यज्ञ-कर्म से सम्बन्धित मन्त्रों को शीघ्रता से locate करने में सहायक है। यह practical organizational tool ग्रंथ को केवल sequential भाष्य से आगे, एक genuinely usable ready-reference बनाता है, जो नित्य स्वाध्याय एवं यज्ञ-अनुष्ठान की तैयारी — दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी है। यह comprehensive संस्करण इस प्रकार यजुर्वेद-अध्ययन को व्यवस्थित एवं फलदायी बनाता है।

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