Vedic Piyushdhara (Hindi) – by Vedveer Arya | Contemporary Vedic Knowledge

Product details
वैदिक पीयूषधारा (Vedic Piyushdhara), विद्वान् वेदवीर आर्य द्वारा रचित यह 103 पृष्ठीय हिन्दी ग्रंथ, वैदिक ज्ञान की एक निरन्तर प्रवाहमान ‘अमृत-धारा’ के रूप में, वेदों के विविध विषयों — दर्शन, इतिहास, विज्ञान, तथा जीवन-मूल्यों — का एक comprehensive, आकर्षक, तथा समकालीन-relevant scholarly विवेचन प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति एक आधुनिक Vedic-scholar की fresh, contemporary दृष्टि से वैदिक ज्ञान का एक सुगम परिचय प्रस्तुत करती है।
वेदवीर आर्य — समकालीन Vedic-studies एवं भारतीय इतिहास-पुनर्लेखन (chronology-revision) में सक्रिय एक युवा विद्वान् — अपनी इस कृति में वैदिक ज्ञान को न केवल पारम्परिक शास्त्रीय दृष्टि से, अपितु आधुनिक scientific एवं historical scholarship के साथ भी सेतु-निर्माण करते हुए प्रस्तुत करते हैं।
‘पीयूष-धारा’ — ‘अमृत की धारा’ — यह शीर्षक इंगित करता है कि वेदों का ज्ञान एक निरन्तर प्रवाहमान जीवन-दायी स्रोत है, जो आज भी उतना ही relevant एवं जीवन्त है जितना सहस्राब्दियों पूर्व था।
ग्रंथ के विविध अध्याय वेद-सम्बन्धी अनेक विषयों को cover करते हैं — वेदों का स्वरूप एवं महत्त्व, वैदिक ईश्वर-तत्त्व-दर्शन, वैदिक cosmology, वैदिक काल-निर्धारण (chronology) से सम्बन्धित contemporary debates, तथा वेदों में निहित scientific insights।
**वैदिक काल-निर्धारण** — यह लेखक का विशेष रुचि-क्षेत्र है — पारम्परिक पाश्चात्य Indological dating (जो वेदों को अपेक्षाकृत recent मानती है) की scholarly समीक्षा, तथा astronomical एवं archaeological evidence के आधार पर एक earlier dating का प्रस्ताव, जो वैदिक सभ्यता की antiquity को अधिक gहराई से establish करता है।
**वेदों में scientific insights** — खगोल-विज्ञान, गणित, चिकित्सा-विज्ञान से सम्बन्धित वैदिक references का scholarly विवेचन, जो प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक चिन्तन की sophistication को उजागर करता है।
**वैदिक सामाजिक-दृष्टि** — स्त्री-शिक्षा, सामाजिक समानता, तथा वर्ण-व्यवस्था के मूल कर्म-आधारित सिद्धान्त का contemporary-relevant विवेचन।
**समकालीन धार्मिक debates में वेदों की भूमिका** — कैसे वैदिक ज्ञान आधुनिक comparative religion एवं interfaith dialogue में एक valuable contribution प्रस्तुत कर सकता है।
लेखक की writing-शैली आकर्षक, contemporary, तथा young readers के लिए विशेष रूप से accessible है, जो पारम्परिक scholarly gravity एवं modern communication-style का सुन्दर संगम प्रस्तुत करती है।
103 पृष्ठीय compact आयाम इसे एक comprehensive किन्तु सुगम परिचय बनाता है।
युवा पाठकों, वैदिक इतिहास एवं chronology में रुचि रखने वाले researchers, आर्य समाज के नए सदस्यों, comparative religion के अध्येताओं, तथा प्रत्येक उस सुधी पाठक के लिए जो वैदिक ज्ञान का एक fresh, contemporary, तथा scientifically-informed परिचय चाहता है — वैदिक पीयूषधारा एक आकर्षक एवं मूल्यवान संसाधन है। इस प्रकार यह ग्रंथ पारम्परिक वैदिक श्रद्धा एवं आधुनिक scholarly जिज्ञासा — दोनों को समान रूप से संतुष्ट करने वाला एक सेतु-ग्रंथ है, जो नई पीढ़ी को वेदों के साथ पुनः जोड़ने में सहायक सिद्ध होता है।
Shipping and Returns
Shipping cost is based on weight. Just add products to your cart and use the Shipping Calculator to see the shipping price.
We want you to be 100% satisfied with your purchase. Items can be returned or exchanged within 30 days of delivery.
Ramlal Kapoor Trust Books| Vedickarts
There are no question found.













Rating & Review
There are no reviews yet.