Valmiki Ramayana – Set of 5 Books (Hindi–Sanskrit) – by Maharishi Valmiki | Authentic Ramayana Edition

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वाल्मीकि रामायण (5 भागों का समुच्चय) — Valmiki Ramayana, महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित यह 1218 पृष्ठीय Hindi-Sanskrit द्वि-भाषी विशाल ग्रंथ-समुच्चय, भारतीय साहित्य के आदि-काव्य ‘रामायण’ का एक authentic, comprehensive संस्करण प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह monumental कृति भारतीय civilisational साहित्य के सर्वोच्च रत्नों में से एक को उसके मूल एवं authentic रूप में पाठकों तक पहुँचाने का एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।
**वाल्मीकि रामायण** — ‘आदि-काव्य’ (प्रथम महाकाव्य) की उपाधि प्राप्त — भगवान् श्रीराम के जीवन-चरित्र का सर्वाधिक प्राचीन, authoritative, तथा साहित्यिक दृष्टि से unparalleled वर्णन है। लगभग 24,000 श्लोकों में, सात काण्डों (बाल, अयोध्या, अरण्य, किष्किन्धा, सुन्दर, युद्ध, उत्तर) में विभक्त, यह महाकाव्य मानव सभ्यता के सर्वाधिक प्रभावशाली साहित्यिक-सांस्कृतिक-आध्यात्मिक दस्तावेज़ों में से एक है।
यह 5-भागीय संस्करण मूल संस्कृत श्लोकों को authentic रूप में प्रस्तुत करता है, साथ ही सुगम हिन्दी अनुवाद के साथ, जो आधुनिक पाठकों को महर्षि वाल्मीकि के मूल काव्य की सम्पूर्ण साहित्यिक सौन्दर्य एवं कथा-गहराई का प्रामाणिक अनुभव प्रदान करता है।
**बाल-काण्ड** — श्रीराम के जन्म, बाल्यकाल, विश्वामित्र के साथ ऋषि-आश्रम में शिक्षा, ताड़का-वध, सीता-स्वयंवर — यह सब का काव्यात्मक वर्णन। **अयोध्या-काण्ड** — राज्याभिषेक की तैयारी, कैकेयी का वरदान, राम का वनवास-गमन, दशरथ का देहावसान — यह भावनात्मक रूप से अत्यंत गहन खण्ड।
**अरण्य-काण्ड** — वन-जीवन, ऋषि-आश्रमों की यात्रा, शूर्पणखा-प्रसंग, सीता-हरण — कथा का निर्णायक मोड़। **किष्किन्धा-काण्ड** — सुग्रीव-मैत्री, बालि-वध, वानर-सेना का संगठन — मित्रता एवं राजनीति की classical शिक्षा।
**सुन्दर-काण्ड** — हनुमान जी की लंका-यात्रा, सीता-दर्शन, लंका-दहन — भक्ति एवं साहस का सर्वोच्च उदाहरण, जो स्वतंत्र रूप से भी अत्यंत लोकप्रिय एवं पूज्य है। **युद्ध-काण्ड** — रावण के साथ महायुद्ध, विभीषण की शरणागति, रावण-वध, सीता-पुनर्मिलन — काव्य का climactic खण्ड।
**उत्तर-काण्ड** — अयोध्या-वापसी, राज्याभिषेक, तथा (कुछ परम्पराओं में समाविष्ट) उत्तर-कालीन घटनाएँ — यह खण्ड textual-critically कुछ हद तक विवादास्पद माना जाता है, जिसका scholarly नोटिंग भी संस्करण में है।
**Character-studies** का महत्त्व ग्रंथ में विशेष रूप से रेखांकित है — श्रीराम मर्यादा-पुरुषोत्तम के रूप में, सीता पातिव्रत्य एवं आन्तरिक शक्ति के प्रतीक के रूप में, लक्ष्मण भ्रातृ-भक्ति के आदर्श के रूप में, हनुमान सेवा-भक्ति के परम उदाहरण के रूप में — यह सब चरित्र-चित्रण भारतीय नैतिक-सांस्कृतिक चेतना के foundational आदर्श हैं।
**काव्य-शास्त्रीय महत्त्व** — वाल्मीकि रामायण की साहित्यिक उत्कृष्टता — इसके उपमा, रूपक, तथा अन्य alankaras का प्रयोग, इसकी छन्द-विविधता, इसकी narrative-craft — यह सब classical Sanskrit poetics के foundational examples हैं।
**Ethical एवं dharmic dimensions** का भी विवेचन है — मर्यादा, कर्तव्य-निष्ठा, त्याग, राजधर्म — यह सब values जो रामायण के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी भारतीय समाज में transmit होते आए हैं।
1218 पृष्ठीय विशाल आयाम, 5-भागीय संरचना — यह ग्रंथ-समुच्चय भारतीय आदि-काव्य के सम्पूर्ण वैभव का authentic, comprehensive संस्करण प्रस्तुत करता है।
Sanskrit साहित्य के विद्यार्थियों, रामायण के भक्तों, भारतीय सांस्कृतिक अध्येताओं, संस्कृत-काव्य-शास्त्र के researchers, गृहस्थ पाठकों जो नित्य पाठ हेतु authentic संस्करण चाहते हैं, तथा प्रत्येक उस सुधी पाठक के लिए जो भारतीय आदि-काव्य के मूल स्वरूप का प्रामाणिक परिचय चाहता है — वाल्मीकि रामायण (5 भाग) एक कालातीत civilisational संसाधन है।
इस संस्करण में textual-critical नोट्स भी सम्मिलित हैं, जो विभिन्न manuscript-traditions (उत्तर-भारतीय एवं दक्षिण-भारतीय recensions) के बीच पाए जाने वाले variations को scholarly तरीके से रेखांकित करते हैं। यह scholarly apparatus ग्रंथ को एक साधारण popular edition से आगे, एक textually-informed authentic संस्करण बनाता है, जो गम्भीर पाठकों एवं researchers दोनों के लिए विश्वसनीय है। यह प्रामाणिकता ही इस संस्करण को अन्य लोकप्रिय किन्तु कम scholarly संस्करणों से विशिष्ट बनाती है।
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Ramlal Kapoor Trust Books| Vedickarts
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