Valmiki Ramayana – Sachitra, 2 Volumes (Hindi–Sanskrit) | Gita Press

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श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण (सचित्र, दो खण्डों में) आदिकवि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत-साहित्य का वह आदि महाकाव्य है जिसे भगवान श्रीराम के चरित्र का सर्वप्रथम एवं सर्वाधिक प्रामाणिक वर्णन माना जाता है। गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित यह सचित्र संस्करण दो विशाल खण्डों में मूल संस्कृत श्लोकों के साथ सरल एवं प्रांजल हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत करता है, जिससे पाठक इस आदि-काव्य के मूल भाव-सौंदर्य तथा गहन दार्शनिक सन्देश को सहजता से आत्मसात् कर सके। वाल्मीकि रामायण सात काण्डों—बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, युद्धकाण्ड तथा उत्तरकाण्ड—में विभाजित है, जिनमें भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर रावण-वध, अयोध्या-राज्याभिषेक तथा उत्तरकालीन जीवन तक की सम्पूर्ण कथा का अत्यन्त विस्तृत, काव्यात्मक एवं प्रामाणिक वर्णन मिलता है। तुलसीदास जी की रामचरितमानस के विपरीत, वाल्मीकि रामायण मूल संस्कृत में रचित होने के कारण ऐतिहासिक एवं साहित्यिक दृष्टि से विशेष प्रामाणिकता रखती है, तथा इसमें वर्णित प्रसंगों की मूल संस्कृत भाषा-शैली एवं छन्द-विधान संस्कृत-साहित्य के अध्येताओं के लिए अत्यन्त मूल्यवान सिद्ध होते हैं। गीता प्रेस की यह परम्परा शुद्ध पाठ, त्रुटिहीन मुद्रण तथा सुगम भाषा-शैली के लिए विश्वप्रसिद्ध है। सचित्र प्रस्तुति इस संस्करण की विशेष पहचान है—प्रत्येक प्रमुख प्रसंग के साथ दिए गए सुन्दर चित्र पाठक को कथा के दृश्य-स्वरूप को समझने में सहायता करते हैं। संस्कृत-साहित्य, काव्यशास्त्र तथा रामायण-तुलनात्मक अध्ययन में संलग्न शोधार्थियों के लिए यह ग्रन्थ एक अनिवार्य एवं प्रामाणिक सन्दर्भ-स्रोत है। रामनवमी, विजयादशमी तथा अन्य राम-सम्बन्धी पर्वों पर इस ग्रन्थ का पाठ विशेष पुण्यदायी माना जाता है। दो विशाल खण्डों में समाहित यह ग्रन्थ धार्मिक पुस्तकालयों, आश्रमों तथा शोध-संस्थानों के लिए एक अपरिहार्य सन्दर्भ-ग्रन्थ है। वाल्मीकि-रामायण में वर्णित मर्यादा पुरुषोत्तम राम, सीता के त्याग एवं धैर्य तथा हनुमान की भक्ति के आदर्श आज भी भारतीय समाज के नैतिक मूल्यों का आधार बने हुए हैं। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से गीता प्रेस का यह प्रामाणिक सचित्र संस्करण श्रद्धालुओं, संस्कृत-विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों तक सुरक्षित पैकेजिंग सहित सुगमता से पहुँचाया जाता है। संस्कृत-भाषा के विद्यार्थी इस मूल ग्रन्थ के माध्यम से शुद्ध एवं शास्त्रीय संस्कृत-शैली का प्रत्यक्ष अध्ययन कर सकते हैं, जो आधुनिक पाठ्यक्रमों में दुर्लभ होता जा रहा है। तुलनात्मक साहित्य के शोधार्थी वाल्मीकि रामायण तथा तुलसी रामचरितमानस के मध्य भाषा-शैली, भाव-सौंदर्य तथा सांस्कृतिक सन्दर्भ की तुलना हेतु इस ग्रन्थ का गहन अध्ययन करते हैं। रामायण-सर्किट की तीर्थ-यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु भी इस मूल ग्रन्थ से मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। धार्मिक पुस्तकालयों तथा विश्वविद्यालयों के संस्कृत-विभागों में यह दो-खण्डीय संस्करण एक अनिवार्य संग्रह-सामग्री मानी जाती है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से यह प्रामाणिक एवं विशाल सचित्र संस्करण सुरक्षित पैकेजिंग सहित श्रद्धालुओं तथा संस्कृत-अध्येताओं तक पहुँचाया जाता है, जिससे आदिकाव्य की यह अमूल्य धरोहर सुरक्षित रह सके। यह ग्रन्थ भारतीय साहित्यिक धरोहर के संरक्षण में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे आने वाली पीढ़ियाँ भी इस आदि-काव्य की मूल संस्कृत-सुन्दरता का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकें। नाट्य-कला तथा रामलीला-मंचन से जुड़े कलाकार भी संवाद एवं भाव-प्रदर्शन हेतु इस मूल संस्कृत ग्रन्थ का सन्दर्भ लेते हैं, जिससे उनके मंचन में प्रामाणिकता की झलक मिलती है। भाषा-विज्ञान के अध्येताओं के लिए भी यह ग्रन्थ प्राचीन संस्कृत-व्याकरण एवं छन्द-विधान के अध्ययन हेतु उपयोगी सामग्री प्रदान करता है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से यह प्रामाणिक सचित्र संस्करण सुरक्षित पैकेजिंग सहित श्रद्धालुओं एवं विद्यार्थियों तक पहुँचाया जाता है। यह ग्रन्थ संस्कृत-साहित्य की उस मूल गरिमा को संरक्षित रखता है जो अनुवादों में कहीं-कहीं क्षीण हो जाती है, जिससे यह प्रत्येक गम्भीर अध्येता के लिए अपरिहार्य बन जाता है। यह ग्रन्थ भारत की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक पहचान का एक गौरवशाली प्रतीक है, जिसे सुरक्षित रखना प्रत्येक भारतीय परिवार का कर्तव्य माना जाता है।
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