Vedic Books
New

Upnishad Shankshipt Bhashya (Hindi) – by Maharshi Dayanand Saraswati | Concise Upanishad Commentary

150.00
29 people are viewing this right now
Estimated Delivery:
17 - 24 Jul, 2026
payment-processing
Guaranteed safe & secure checkout

Product details

उपनिषद् संक्षिप्त भाष्य (Upnishad Shankshipt Bhashya), महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा रचित यह हिन्दी ग्रंथ, प्रमुख उपनिषदों का एक संक्षिप्त किन्तु सारगर्भित भाष्य प्रस्तुत करता है, जो वैदिक-वेदान्तिक ज्ञान-काण्ड को महर्षि की विशिष्ट यौगिक-अर्थ-पद्धति के आलोक में focused रूप में उजागर करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति उपनिषद्-अध्ययन के लिए एक authoritative, संक्षिप्त प्रवेश-द्वार है।

उपनिषद् — वेदों के ज्ञान-काण्ड का चरम विकास — मानव सभ्यता के सर्वाधिक प्रतिष्ठित आध्यात्मिक ग्रंथ हैं। महर्षि दयानन्द ने अपनी इस कृति में प्रमुख उपनिषदों (ईशावास्य, केन, कठ जैसे) के केन्द्रीय सिद्धान्तों का एक संक्षिप्त किन्तु प्रामाणिक भाष्य प्रस्तुत किया है, जो उनकी व्यापक वेद-भाष्य-परम्परा का एक अंग है।

**ईशावास्य उपनिषद् का भाष्य** — ‘ईशावास्यमिदं सर्वम्’ — समस्त जगत् ईश्वर से व्याप्त है — इस foundational सूत्र से आरम्भ, महर्षि इस संक्षिप्त उपनिषद् के प्रत्येक मन्त्र का यौगिक-अर्थ-आधारित विवेचन प्रस्तुत करते हैं।

**केनोपनिषद् का भाष्य** — ‘केन ईषितं पतति प्रेषितं मनः’ — किस के द्वारा प्रेरित हो कर मन गति करता है — इस मूल प्रश्न का महर्षि-प्रणीत scholarly विवेचन।

**कठोपनिषद् का संक्षिप्त भाष्य** — यम-नचिकेता संवाद के केन्द्रीय सिद्धान्तों — श्रेय-प्रेय का भेद, आत्मा की अमरता, ब्रह्म-विद्या का गोपनीय उपदेश — का संक्षिप्त किन्तु गहन विवेचन।

**अन्य उपनिषदों के select अंश** — मुण्डक, माण्डूक्य जैसे अन्य प्रमुख उपनिषदों के कुछ केन्द्रीय सूत्रों का भी संक्षिप्त भाष्य इस ग्रंथ में सम्मिलित है।

महर्षि की interpretive methodology यहाँ भी उनकी standard वैदिक-यौगिक-अर्थ-पद्धति का अनुसरण करती है — उपनिषदों की व्याख्या वैदिक एकेश्वरवादी framework में, त्रैत-वाद (ईश्वर-जीव-प्रकृति की अनादिता) के सिद्धान्त के अनुरूप की गई है, जो अद्वैत-वेदान्त की निर्विशेष ब्रह्म-दृष्टि से कुछ भिन्न है।

**’संक्षिप्त’ प्रस्तुति का value** — यह ग्रंथ विशेष रूप से नए विद्यार्थियों के लिए एक ideal entry-point है, जो पूर्ण, विस्तृत उपनिषद्-भाष्यों (जैसे ‘उपनिषद् प्रकाश’ जैसी comprehensive कृतियाँ) से पूर्व, उपनिषदों के core सिद्धान्तों का एक quick, authoritative परिचय चाहते हैं।

महर्षि की भाषा यहाँ प्रांजल हिन्दी है, जिसमें उपनिषद्-मन्त्रों के मूल Sanskrit पाठ, उनका पद-च्छेद, तथा हिन्दी अनुवाद-व्याख्या सम्मिलित है।

आर्य समाज के साधकों, उपनिषदों के नए विद्यार्थियों, वेदान्त-दर्शन में रुचि रखने वाले पाठकों, तथा प्रत्येक उस सुधी जिज्ञासु के लिए जो महर्षि दयानन्द की उपनिषद्-व्याख्यान-पद्धति का एक संक्षिप्त, प्रामाणिक परिचय चाहता है — उपनिषद् संक्षिप्त भाष्य एक मूल्यवान foundational संसाधन है।

यह ग्रंथ आर्य समाज के प्रचार-कार्य में भी विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध हुआ है, जहाँ इसे सत्संगों एवं प्रवचनों में उपनिषदों के core सन्देश को शीघ्रता से पाठकों तक पहुँचाने के लिए एक ready-reference के रूप में उपयोग किया जाता है। इसकी संक्षिप्तता इसे विशेष रूप से उन व्यस्त गृहस्थों के लिए उपयोगी बनाती है, जिनके पास विस्तृत scholarly treatises के अध्ययन के लिए पर्याप्त समय नहीं है, किन्तु जो फिर भी उपनिषदों के गहन ज्ञान से लाभान्वित होना चाहते हैं।

Enable Notifications OK No thanks