Swasthya Ke Moolbhoot Siddhanta (Hindi–Sanskrit) – by Swami Vedanand Saraswati | Vedic Ayurveda & Yoga Health Guide

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स्वास्थ्य के मूलभूत सिद्धान्त (Swasthya Ke Moolbhoot Siddhanta), विद्वान् स्वामी वेदानन्द सरस्वती द्वारा रचित यह 124 पृष्ठीय हिन्दी-संस्कृत ग्रंथ, वैदिक एवं आयुर्वेदीय परम्परा में निहित स्वास्थ्य के foundational principles का एक scholarly किन्तु सुगम विवेचन है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति आधुनिक गृहस्थ-साधक के लिए पारम्परिक भारतीय स्वास्थ्य-विज्ञान का integrated मार्गदर्शन प्रस्तुत करती है।
स्वामी वेदानन्द सरस्वती — आर्य समाज परम्परा से सम्बद्ध एक प्रखर वैदिक scholar एवं स्वास्थ्य-चिन्तक — ने अपनी इस कृति में यह scholarly सत्य प्रस्थापित किया है कि स्वास्थ्य कोई ‘absent disease’ मात्र नहीं है, अपितु एक positive state है — जिसमें शरीर, मन, इन्द्रियाँ, बुद्धि एवं आत्मा — सभी समन्वित रूप से स्वस्थ रहते हैं। यह holistic दृष्टिकोण ही ग्रंथ की मूल भूमि है।
ग्रंथ का प्रथम खण्ड स्वास्थ्य की वैदिक एवं आयुर्वेदीय परिभाषा प्रस्तुत करता है। सुश्रुत-संहिता का प्रसिद्ध सूत्र — ‘समदोषः समाग्निश्च समधातु-मलक्रियः। प्रसन्नात्मेन्द्रिय-मनाः स्वस्थ इत्यभिधीयते॥’ — स्वास्थ्य की समग्र परिभाषा है। दोषों (वात-पित्त-कफ) का सन्तुलन, पाचक अग्नि की समता, धातुओं (रस-रक्त-मांस-मेद-अस्थि-मज्जा-शुक्र) की पुष्टि, मलों का नियमित निष्कासन, आत्मा-इन्द्रिय-मन की प्रसन्नता — यह षड्विध मानदण्ड स्वास्थ्य का scholarly criterion निर्मित करते हैं।
त्रिदोष-सिद्धान्त का scholarly विवेचन ग्रंथ का एक प्रमुख अंग है। वात (वायु एवं आकाश के संयोग से), पित्त (अग्नि एवं जल के संयोग से), कफ (जल एवं पृथ्वी के संयोग से) — इन तीन doshas का स्वरूप-निरूपण; उनके स्थान, गुण, कर्म; उनके वृद्धि एवं क्षय के लक्षण; उनके सन्तुलन के उपाय — यह सब आयुर्वेदीय परिप्रेक्ष्य से authentic तरीके से विवेचित है।
प्रकृति-विज्ञान (constitutional analysis) का अध्याय व्यावहारिक रूप से अत्यन्त मूल्यवान है। प्रत्येक व्यक्ति की देह-प्रकृति वात-प्रधान, पित्त-प्रधान, कफ-प्रधान, द्वि-दोष-प्रधान, या त्रि-दोष-समान — इनमें से कौन-सी है, इसका scholarly आकलन कैसे किया जाए; प्रत्येक प्रकृति के लिए कौन-सा आहार-विहार उपयुक्त है — यह practical guidance ग्रंथ को personalised health manual बनाता है।
आहार-विज्ञान का खण्ड comprehensive है। षड्रसों (मधुर, अम्ल, लवण, कटु, तिक्त, कषाय) का सम्यक् सेवन, सात्त्विक-राजसिक-तामसिक भोजन का विवेक, अनुकूल-विरुद्ध आहार का scholarly ज्ञान, उपवास का वैज्ञानिक महत्त्व, ऋतु-अनुसार आहार-परिवर्तन, समय-अनुसार भोजन-नियम — इन सबका सहज व्यावहारिक विवेचन है। ‘जीवो जीवस्य जीवनम्’ — यह वैदिक एवं आयुर्वेदीय food-chain-समझ ग्रंथ के दर्शन में सर्वत्र उपस्थित है।
दिनचर्या एवं ऋतुचर्या का अध्याय वैदिक life-style discipline का systematic प्रस्तुतीकरण है। ब्रह्म-मुहूर्त में जागरण, स्नान-संध्या, यज्ञ-कर्म, स्वाध्याय, श्रम, भोजन, विश्राम, निद्रा — यह दैनिक schedule कैसे शरीर, मन एवं आत्मा — तीनों के स्वास्थ्य की रक्षा करती है, इसका scholarly विवेचन है। ऋतुचर्या में छह ऋतुओं — शिशिर, वसन्त, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमन्त — के लिए विशिष्ट आहार-विहार-नियमों का systematic वर्णन है।
योग एवं प्राणायाम का अध्याय holistic स्वास्थ्य का central pillar है। महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग का परिचय, प्रमुख आसनों का स्वास्थ्य-संबंधी विवेचन, नियमित प्राणायाम के physiological एवं spiritual लाभ, ध्यान का mental health पर प्रभाव — यह सब scholarly तरीके से प्रस्तुत है।
मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य पर विशेष बल दिया गया है। ‘मन एव मनुष्याणां कारणं बन्ध-मोक्षयोः’ — मन ही बन्धन एवं मोक्ष का कारण है। तनाव-प्रबन्धन, सकारात्मक चिन्तन, सत्संग का प्रभाव, स्वाध्याय की शक्ति, ईश्वर-प्रणिधान का योगदान — इन सब के स्वास्थ्य-संबंधी पक्षों का scholarly विवेचन है।
ब्रह्मचर्य एवं संयम का scientific आधार ग्रंथ का एक उल्लेखनीय अंश है। ब्रह्मचर्य का अर्थ केवल यौन-संयम नहीं, अपितु समस्त इन्द्रियों का सम्यक् नियमन है। इसका शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्थिरता एवं आध्यात्मिक उन्नयन — तीनों पर प्रत्यक्ष प्रभाव है। यह वैदिक सिद्धान्त आधुनिक neuroscience एवं endocrinology द्वारा भी क्रमशः प्रमाणित हो रहा है।
रोग-निवारण एवं उपचार के सिद्धान्त भी विवेचित हैं। ‘न मात्रा-वृद्धिजन्यो ह्यजीर्ण-रोगो नापि अल्प-भोजन-जो रोगः’ — रोग का मूल कारण आहार-विहार में असंयम है। रोग होने पर पारम्परिक उपचार-विधियाँ, herbal remedies, panchakarma का संक्षिप्त परिचय, naturopathy के सिद्धान्त — यह सब practical guidance के रूप में प्रस्तुत है।
प्रकाशकीय गुणवत्ता उत्कृष्ट है। 124 पृष्ठीय compact आकार ग्रंथ को daily companion बनाता है। 150 रुपए मूल्य अत्यन्त affordable है।
स्वास्थ्य-चेतन गृहस्थों, आयुर्वेद के विद्यार्थियों, naturopathy practitioners, योग-शिक्षकों, आर्य समाज के साधकों, एवं प्रत्येक उस सुधी पाठक के लिए जो medicines पर निर्भरता कम कर वैदिक-आयुर्वेदीय holistic मार्ग से स्वस्थ जीवन की कामना रखता है — यह ग्रंथ एक मूल्यवान संसाधन है।
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