Vedic Books
Placeholder

Shree Ramcharitmanas (Hindi) – Tulsidas Ramayan | Gita Press Gorakhpur

₹550.00
24 people are viewing this right now
Estimated Delivery:
21 - 28 Oct, 2026
payment-processing
Guaranteed safe & secure checkout

Product details

श्री रामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित भारतीय साहित्य का वह अनुपम महाकाव्य है जिसने सदियों से करोड़ों हिन्दी-भाषी श्रद्धालुओं के हृदय में भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र की अमिट छाप छोड़ी है। गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित यह संस्करण अवधी भाषा में रचित मूल पाठ को यथावत् सुरक्षित रखते हुए प्रस्तुत करता है, जिससे पाठक तुलसीदास जी की मूल काव्य-चेतना एवं भाव-सौंदर्य का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकें। रामचरितमानस सात काण्डों—बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड तथा उत्तरकाण्ड—में विभाजित है, जिनमें भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर रावण-वध एवं अयोध्या-राज्याभिषेक तक की सम्पूर्ण लीला का विस्तृत एवं भावपूर्ण वर्णन किया गया है। इस ग्रन्थ की विशेषता यह है कि यह केवल कथा-काव्य नहीं अपितु भक्ति, ज्ञान, कर्म तथा नीति का समन्वित दर्शन प्रस्तुत करता है—राम को मर्यादा पुरुषोत्तम, आदर्श पुत्र, आदर्श भ्राता, आदर्श पति तथा आदर्श राजा के रूप में चित्रित करते हुए तुलसीदास जी ने प्रत्येक पात्र के माध्यम से मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा की है। सीता, हनुमान, भरत, लक्ष्मण जैसे पात्रों के चरित्र-चित्रण में त्याग, सेवा, भक्ति तथा धर्मनिष्ठा के आदर्श प्रतिष्ठापित हुए हैं, जो आज भी भारतीय समाज के नैतिक मूल्यों का आधार बने हुए हैं। सुन्दरकाण्ड का पाठ विशेष रूप से संकट-निवारण एवं मनोबल-वृद्धि हेतु अत्यन्त प्रभावशाली माना जाता है, और अनेक गृहस्थ नवरात्रि, रामनवमी तथा अन्य पर्वों पर इसका अखण्ड पारायण करते हैं। गीता प्रेस की यह परम्परा शुद्ध पाठ, स्पष्ट मुद्रण एवं सुगम प्रस्तुति के लिए विश्वप्रसिद्ध है, जिससे यह ग्रन्थ शोधार्थियों से लेकर सामान्य गृहस्थ पाठक तक सभी के लिए समान रूप से उपयोगी है। रामचरितमानस में प्रयुक्त चौपाई, दोहा, सोरठा तथा छन्द की लयात्मकता इसे न केवल धार्मिक अपितु काव्य-सौंदर्य की दृष्टि से भी अप्रतिम बनाती है। भारतीय घर-घर में इस ग्रन्थ का नित्य पाठ, मानस-पाठ-मण्डलियों का आयोजन तथा रामलीला-मंचन की परम्परा इसकी सांस्कृतिक व्यापकता को प्रमाणित करती है। तुलसी-साहित्य, भक्ति-आन्दोलन तथा मध्यकालीन हिन्दी-साहित्य के अध्येताओं के लिए भी यह ग्रन्थ अनिवार्य संदर्भ-स्रोत है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से गीता प्रेस का यह प्रामाणिक संस्करण श्रद्धालुओं एवं विद्यार्थियों तक सहजता से उपलब्ध हो सकेगा। यह संस्करण उन विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों के लिए भी अत्यन्त उपयोगी है जो मध्यकालीन भक्ति-साहित्य, अवधी भाषा-शैली अथवा तुलसी-दर्शन का तुलनात्मक अध्ययन करना चाहते हैं। घरों में रामनवमी, दीपावली तथा विवाह-मुण्डन जैसे मंगल अवसरों पर मानस-पाठ की परम्परा इस ग्रन्थ की सामाजिक व्यापकता को प्रमाणित करती है। गीता प्रेस की स्पष्ट मुद्रण-शैली तथा सुव्यवस्थित पृष्ठ-सज्जा इसे पाठ-मण्डलियों तथा सामूहिक वाचन हेतु विशेष रूप से उपयुक्त बनाती है, जिससे अखण्ड रामायण-पाठ के आयोजनों में भी यह संस्करण सर्वाधिक प्रचलित रहा है। रामलीला-मण्डलियाँ तथा सांस्कृतिक संस्थान भी मंचन-पूर्व संवाद एवं चौपाइयों के अभ्यास हेतु इस प्रामाणिक पाठ का सन्दर्भ लेते हैं। विद्यालयों में हिन्दी-साहित्य के पाठ्यक्रम में रामचरितमानस के अंश सम्मिलित होने के कारण विद्यार्थियों के लिए भी यह ग्रन्थ अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होता है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से गीता प्रेस का यह मूल एवं प्रामाणिक संस्करण श्रद्धालुओं, विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों तक सुरक्षित एवं समयबद्ध रूप से पहुँचाया जाता है। विवाह, गृहप्रवेश तथा अन्य मंगल कार्यों में इस ग्रन्थ की स्थापना एवं पाठ को शुभता का प्रतीक माना जाता है। भारत के बाहर प्रवासी हिन्दू समाज में भी रामचरितमानस की प्रतियाँ सांस्कृतिक पहचान एवं धार्मिक संस्कारों को जीवित रखने का महत्त्वपूर्ण माध्यम बनी हुई हैं, जिससे यह ग्रन्थ विश्वव्यापी हिन्दू प्रवासी समुदाय में भी अत्यन्त लोकप्रिय है। विदेशों में स्थापित हिन्दू मन्दिरों एवं सांस्कृतिक केन्द्रों में भी यह गीता प्रेस संस्करण नियमित रूप से मंगवाया जाता है, जिससे प्रवासी भारतीय समुदाय अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा रह सके। भक्ति-काव्य के अनुवाद एवं तुलनात्मक अध्ययन में संलग्न अनुसंधानकर्ता भी इस प्रामाणिक गीता प्रेस पाठ को आधार-ग्रन्थ के रूप में उपयोग करते हैं, जिससे इसकी अकादमिक प्रतिष्ठा भी सुदृढ़ बनी रहती है। परिवार के बड़े-बुजुर्ग प्रतिदिन संध्या-समय इस ग्रन्थ का पाठ कर सम्पूर्ण परिवार को धार्मिक संस्कारों से जोड़ते हैं।

Enable Notifications OK No thanks