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Shatapath Ke Dashpath Part 1 & 2 (Hindi) – by Pt. Yudhishthir Mimansak | Shatapatha Brahmana Study

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शतपथ के दशपथ (भाग 1 और 2) — Shatapath Ke Dashpath, पंडित युधिष्ठिर मीमांसक द्वारा रचित यह 213 पृष्ठीय हिन्दी scholarly ग्रंथ-समुच्चय, शतपथ ब्राह्मण के दस विशिष्ट किन्तु महत्त्वपूर्ण ‘पथों’ (मार्गों/अनुभागों) का एक focused scholarly विवेचन प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति शतपथ ब्राह्मण के विशाल corpus में से चयनित सर्वाधिक philosophically एवं ritualistically महत्त्वपूर्ण अंशों का एक concentrated scholarly अध्ययन है।

**शतपथ ब्राह्मण** — शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन शाखा) से सम्बद्ध विशालतम एवं सर्वाधिक comprehensive ब्राह्मण-ग्रंथ — 100 अध्यायों (शत-पथ = सौ मार्ग) में विभक्त है, जो यज्ञ-कर्मकाण्ड, cosmological speculation, तथा philosophical dialogues का एक अत्यंत rich भण्डार है। इसकी विशालता के कारण, इस पूरे ग्रंथ का detailed अध्ययन एक lifetime undertaking है।

पंडित युधिष्ठिर मीमांसक ने अपनी scholarly wisdom का उपयोग कर, शतपथ के इन शत-पथों में से दस सर्वाधिक significant, representative, तथा philosophically-rich अंशों का चयन किया है, जिनका उन्होंने विस्तृत scholarly विवेचन प्रस्तुत किया है। यह selective-focused approach एक practical entry-point प्रदान करती है उन readers के लिए जो शतपथ की गहराई का अनुभव करना चाहते हैं, बिना पूरे विशाल corpus में डूबे।

**प्रथम भाग** में चयनित पथों में यज्ञ-सिद्धान्त से सम्बन्धित foundational discussions सम्मिलित हैं — अग्निहोत्र का दार्शनिक rationale, यज्ञ-कर्ता की qualifications, यज्ञ-द्रव्यों का symbolic significance — यह सब mundane ritual-detail से आगे उनके गहन philosophical अर्थ को उजागर करते हैं।

**ब्रह्म-विद्या से सम्बन्धित पथों** का विशेष विवेचन भी प्रथम भाग में है — शतपथ में embedded कुछ अत्यंत प्रसिद्ध दार्शनिक dialogues, जैसे याज्ञवल्क्य से सम्बन्धित discussions, जो बाद में बृहदारण्यक उपनिषद् में विस्तारित हुए। यह उपनिषदीय चिन्तन के पूर्व-रूप (precursor) को दिखाने वाला महत्त्वपूर्ण material है।

**द्वितीय भाग** में सृष्टि-विज्ञान से सम्बन्धित पथों का विवेचन है — शतपथ में प्रस्तुत cosmogony के विभिन्न narratives, प्रजापति की भूमिका, तथा सृष्टि-प्रक्रिया के विभिन्न symbolic representations।

**सामाजिक-सांस्कृतिक अंतर्दृष्टि** भी चयनित पथों में उपलब्ध है — शतपथ में varna-vyavastha, gender-roles, तथा तत्कालीन सामाजिक संगठन से सम्बन्धित discussions, जो प्राचीन Vedic समाज की एक valuable historical-sociological झलक प्रदान करते हैं।

**मनोवैज्ञानिक एवं नैतिक teachings** का भी विवेचन है — शतपथ में embedded moral parables एवं teachings, जो नैतिक-दार्शनिक wisdom का एक rich स्रोत हैं।

पंडित मीमांसक की editorial-cum-interpretive methodology प्रत्येक चयनित पथ के लिए — मूल Sanskrit पाठ, हिन्दी अनुवाद, तथा scholarly व्याख्या — प्रस्तुत करती है, जो पाठक को शतपथ की gहन complexity को systematic ढंग से समझने में सहायक है।

**Contemporary scholarly value** — शतपथ ब्राह्मण Vedic literature के evolutionary अध्ययन के लिए एक crucial primary source है — यह ऋग्वेद के मन्त्र-काल एवं उपनिषदों के ज्ञान-काल के बीच के transition को represent करता है, तथा इस evolutionary-link की समझ के लिए यह selective focused अध्ययन विशेष रूप से valuable है।

213 पृष्ठीय focused आयाम — 2-भागीय संरचना में — यह concentrated selection शतपथ की विशालता के बावजूद एक accessible, manageable scholarly entry-point प्रदान करता है।

Vedic literature के advanced researchers, ब्राह्मण-साहित्य के अध्येताओं, comparative Vedic studies के scholars, आर्य समाज के साधकों, वैदिक gurukulas के acharyas, तथा प्रत्येक उस सुधी जिज्ञासु के लिए जो शतपथ ब्राह्मण के गहनतम एवं सर्वाधिक significant अंशों का एक focused, scholarly परिचय चाहता है — शतपथ के दशपथ (2 भाग) एक मूल्यवान specialized संसाधन है।

ग्रंथ के अंत में पंडित मीमांसक ने यह भी scholarly नोट प्रस्तुत किया है कि उनके चयन-मानदण्ड में विशेष रूप से वे पथ सम्मिलित किए गए हैं जो आधुनिक पाठक के लिए सर्वाधिक accessible एवं relevant हैं, बिना अत्यधिक technical ritualistic detail में उलझे। यह thoughtful curation ग्रंथ को शतपथ-अध्ययन के लिए एक ideal starting-point बनाती है, जो गम्भीर विद्यार्थी को आगे पूर्ण ग्रंथ के अध्ययन हेतु प्रेरित कर सकती है।

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