Rishi Kalpa (Hindi) – by Swami Vedanand Tirth | Vedic Sages Life Ideal

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ऋषि-कल्प (Rishi Kalpa), स्वामी वेदानन्द तीर्थ द्वारा रचित यह हिन्दी scholarly ग्रंथ, प्राचीन वैदिक ऋषियों की जीवन-शैली, साधना-पद्धति, तथा उनके ‘कल्प’ (आदर्श-रूप) का एक comprehensive, प्रेरणादायक विवेचन प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति उस civilisational आदर्श को उजागर करती है जो वैदिक ऋषि-परम्परा प्रस्तुत करती है, तथा आधुनिक साधक के लिए इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित करती है।
‘ऋषि’ — ‘दर्शन करने वाला’ (मन्त्र-द्रष्टा) — यह उपाधि केवल वेद-रचयिताओं के लिए नहीं, अपितु उन समस्त उच्च-कोटि के साधकों के लिए प्रयुक्त होती है जिन्होंने गहन आध्यात्मिक अनुभूति के माध्यम से सत्य का साक्षात्कार किया। ‘ऋषि-कल्प’ का अर्थ है — ऋषि-तुल्य जीवन-आदर्श अथवा ऋषि बनने की विधि।
स्वामी वेदानन्द तीर्थ ने इस ग्रंथ में वैदिक ऋषियों के जीवन-चरित्र, उनकी साधना-पद्धति, तथा उनकी civilisational उपलब्धियों का scholarly विवेचन प्रस्तुत किया है।
**प्रमुख वैदिक ऋषियों का परिचय** — वसिष्ठ, विश्वामित्र, अत्रि, कण्व, गोतम, भरद्वाज, गृत्समद, अगस्त्य, कश्यप जैसे प्रमुख मन्त्र-द्रष्टा ऋषियों का जीवन-परिचय, उनकी विशिष्ट आध्यात्मिक उपलब्धियाँ, तथा उनसे सम्बद्ध प्रमुख वैदिक सूक्त।
**ऋषि-जीवन की साधना-पद्धति** — तपस्या, ब्रह्मचर्य, स्वाध्याय, यज्ञ-कर्म, तथा प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन — यह ऋषि-जीवन की core disciplines का scholarly विवेचन।
**ऋषि-गुरुकुल-व्यवस्था** — प्राचीन काल में ऋषि-आश्रमों में शिक्षा-व्यवस्था, गुरु-शिष्य-सम्बन्ध, तथा ज्ञान-transmission की पद्धति का विवेचन।
**ऋषि-आदर्श की समकालीन प्रासंगिकता** — कैसे आधुनिक गृहस्थ-साधक भी अपने दैनिक जीवन में ऋषि-कल्प जीवन-शैली के तत्त्वों को अपना सकता है — संयम, स्वाध्याय, तप, तथा dharmic जीवन-मूल्यों के माध्यम से।
**Family एवं social responsibility के साथ संतुलन** — यह स्पष्ट किया गया है कि ऋषि-आदर्श केवल संन्यासियों के लिए नहीं, अपितु गृहस्थ-जीवन में भी — जिम्मेदारियों के साथ आध्यात्मिक अनुशासन को समन्वित करते हुए — अपनाया जा सकता है।
स्वामी वेदानन्द तीर्थ की writing-शैली scholarly depth एवं प्रेरणादायक sensitivity का संगम प्रस्तुत करती है, जो पाठक को न केवल information अपितु genuine inspiration भी प्रदान करती है।
आर्य समाज के साधकों, वैदिक इतिहास के अध्येताओं, आध्यात्मिक जिज्ञासुओं जो ऋषि-परम्परा से प्रेरणा लेना चाहते हैं, गुरुकुलीय शिक्षा में रुचि रखने वाले पाठकों, तथा प्रत्येक उस सुधी पाठक के लिए जो वैदिक ऋषि-जीवन के civilisational आदर्श को गहराई से समझना चाहता है — ऋषि-कल्प एक प्रेरणादायक एवं मूल्यवान scholarly संसाधन है।
ग्रंथ के अंतिम अध्याय में स्वामी वेदानन्द तीर्थ ने कुछ contemporary उदाहरण भी प्रस्तुत किए हैं — आधुनिक काल में कुछ ऐसे साधकों के जीवन-वृत्तान्त, जिन्होंने अपने गृहस्थ-जीवन में भी ऋषि-तुल्य अनुशासन एवं आध्यात्मिक गहराई प्राप्त की। यह illustrations ग्रंथ को केवल प्राचीन इतिहास से आगे, एक living, achievable आदर्श के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जो आज के पाठक के लिए भी genuinely inspiring एवं actionable है।
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