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Pingala-Chhanda-Sutra (Sanskrit) – ed. Dr. Vishvambhar Vidyalankar | Sanskrit Prosody Meter

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पिङ्गल-छन्द-सूत्र (Pingala-Chhanda-Sutra), डॉ. विश्वंभर विद्यालंकार द्वारा सम्पादित यह 127 पृष्ठीय Sanskrit scholarly ग्रंथ, संस्कृत काव्य-शास्त्र के foundational metrical-science ग्रंथ ‘पिङ्गल-छन्द-सूत्र’ का authentic संस्करण प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति Sanskrit prosody (छन्द-शास्त्र) के advanced अध्येताओं के लिए एक अनिवार्य primary scholarly resource है।

आचार्य पिङ्गल — Sanskrit छन्द-शास्त्र के foundational sutrakar — का यह ग्रंथ मानव सभ्यता के सर्वाधिक प्राचीन metrical-treatises में से एक है। यह न केवल Sanskrit काव्य के छन्दों का systematic विवेचन प्रस्तुत करता है, अपितु इसमें प्रयुक्त binary-numeral-methodology (लघु-गुरु के द्विआधारी संयोजन) को आधुनिक mathematics-history के researchers combinatorics एवं binary-system के प्राचीनतम प्रमाणों में से एक मानते हैं।

‘छन्द’ — Sanskrit काव्य की metrical संरचना — गायत्री, उष्णिक्, अनुष्टुप्, बृहती, पंक्ति, त्रिष्टुप्, जगती जैसे विभिन्न वैदिक-classical छन्दों की systematic classification एवं उनके निर्माण-नियमों का यह ग्रंथ केन्द्रीय स्रोत है।

ग्रंथ की संरचना सूत्र-शैली में है — अत्यंत संक्षिप्त, systematic सूत्रों के माध्यम से छन्द-निर्माण के नियम प्रस्तुत किए गए हैं। लघु (short) एवं गुरु (long) syllables के विविध संयोजनों से विभिन्न छन्दों का निर्माण कैसे होता है, इसका mathematical-precision-युक्त विवेचन।

**वैदिक छन्द** — गायत्री (24 अक्षर), उष्णिक् (28), अनुष्टुप् (32), बृहती (36), पंक्ति (40), त्रिष्टुप् (44), जगती (48) — इन प्रमुख वैदिक छन्दों का systematic विवेचन, तथा वेद-मन्त्रों में इनका प्रयोग।

**Classical Sanskrit छन्द** — शार्दूलविक्रीडित, मन्दाक्रान्ता, वसन्ततिलका, इन्द्रवज्रा, वंशस्थ जैसे classical काव्य-छन्दों का detailed exposition, जो कालिदास, भारवि, माघ जैसे कवियों की रचनाओं में प्रयुक्त हैं।

**गणित-वैज्ञानिक महत्त्व** — पिङ्गल के छन्द-सूत्रों में ‘मेरु-प्रस्तार’ नामक एक विशेष technique है, जो आधुनिक Pascal’s Triangle से significant समानता रखता है — यह Sanskrit-mathematics-history की एक remarkable उपलब्धि है, जिसका scholarly विवेचन ग्रंथ में है।

डॉ. विश्वंभर विद्यालंकार की scholarly editing methodology मूल सूत्रों का authentic प्रस्तुतीकरण, आवश्यक व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ, तथा classical commentators (हलायुध जैसे विद्वानों) के संदर्भों को सम्मिलित करती है।

**Practical application** — यह ग्रंथ न केवल Sanskrit काव्य-रचना के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए, अपितु वेद-मन्त्रों के छन्द-निर्धारण के लिए भी अनिवार्य है, जो वेद-पाठ की शुद्धता के लिए आवश्यक है।

127 पृष्ठीय comprehensive आयाम इस foundational metrical-science-text की depth के अनुरूप है।

Sanskrit काव्य-शास्त्र के विद्यार्थियों, छन्द-शास्त्र के researchers, गणित-इतिहास के scholars (combinatorics के प्राचीन प्रमाणों के लिए), वैदिक पाठ-शुद्धता में रुचि रखने वाले वेद-पाठियों, संस्कृत-shastri अभ्यर्थियों, तथा प्रत्येक उस सुधी जिज्ञासु के लिए जो Sanskrit छन्द-शास्त्र की gहन गणितीय-काव्यात्मक सुन्दरता को समझना चाहता है — पिङ्गल-छन्द-सूत्र एक indispensable foundational scholarly संसाधन है।

ग्रंथ में यह भी scholarly विवेचन है कि कैसे पिङ्गल की मेरु-प्रस्तार-पद्धति आधुनिक computer science में binary-representation एवं algorithmic-thinking के प्राचीनतम प्रमाणों में से एक मानी जाती है। यह interdisciplinary significance ग्रंथ को केवल पारम्परिक काव्य-शास्त्र-अध्ययन से आगे, गणित-इतिहास एवं computational-thinking के researchers के लिए भी एक मूल्यवान प्राचीन दस्तावेज़ बनाती है। डॉ. विश्वंभर विद्यालंकार ने इस comparative-scholarly-dimension को भी अपने सम्पादन में उचित स्थान दिया है, जो इस classical text की सतत आधुनिक प्रासंगिकता को रेखांकित करता है। इस प्रकार यह प्राचीन ग्रंथ Sanskrit साहित्य एवं गणितीय चिन्तन के अद्वितीय संगम का एक स्थायी प्रमाण है, जो आज भी scholars को समान रूप से आकर्षित करता है। भावी शोधकर्ताओं के लिए यह एक प्रेरणादायक एवं बहुआयामी संसाधन बना रहेगा।

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