Vedic Books
Placeholder

Matsya Mahapuran – Sachitra (Hindi–Sanskrit) | Gita Press Gorakhpur

₹430.00
22 people are viewing this right now
Estimated Delivery:
21 - 28 Oct, 2026
payment-processing
Guaranteed safe & secure checkout

Product details

श्री मत्स्यमहापुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद) अष्टादश महापुराणों में सर्वप्रथम माना जाने वाला पुराण है, जिसमें भगवान विष्णु के प्रथम अवतार मत्स्य-भगवान की लीला, जल-प्रलय से मनु की रक्षा तथा वेदों के पुनरुद्धार की कथा का विस्तृत एवं रोचक वर्णन मिलता है। गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित यह संस्करण मूल संस्कृत श्लोकों के साथ सरल हिन्दी अनुवाद तथा सचित्र प्रस्तुति में उपलब्ध है, जिससे पाठक इस प्राचीन ग्रन्थ के भावार्थ को सहजता से आत्मसात् कर सके। मत्स्यपुराण में सृष्टि-उत्पत्ति, मन्वन्तर-वर्णन, राजधर्म, दान-महिमा, तीर्थ-माहात्म्य तथा मूर्ति-निर्माण एवं मन्दिर-स्थापत्य के सिद्धान्तों का भी विस्तृत वर्णन सम्मिलित है, जो भारतीय स्थापत्य-कला के अध्ययन हेतु अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। मत्स्य-अवतार की कथा के माध्यम से भगवान विष्णु की करुणा, रक्षक-स्वरूप तथा धर्म-संस्थापक भूमिका को अत्यन्त प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है, जो आज भी भारतीय संस्कृति में प्रलय एवं पुनर्निर्माण के प्रतीक के रूप में स्मरण किया जाता है। गीता प्रेस की यह परम्परा शुद्ध पाठ, त्रुटिहीन मुद्रण तथा सुगम भाषा-शैली के लिए विश्वप्रसिद्ध है। सचित्र प्रस्तुति इस संस्करण की विशेष पहचान है—मत्स्य-अवतार तथा अन्य प्रमुख प्रसंगों के साथ दिए गए चित्र कथा के दृश्य-स्वरूप को समझने में सहायक होते हैं, जिससे यह ग्रन्थ बालकों एवं नवीन पाठकों के लिए भी सुगम बन जाता है। राजधर्म तथा शासन-व्यवस्था से सम्बन्धित अध्याय इस पुराण की विशेष पहचान है, जो प्राचीन भारतीय राजनीति-शास्त्र के अध्येताओं के लिए अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होता है। मूर्ति-निर्माण तथा मन्दिर-स्थापत्य से सम्बन्धित विवरण भारतीय वास्तु-शास्त्र एवं शिल्प-कला के शोधार्थियों के लिए एक प्रामाणिक सन्दर्भ-स्रोत प्रदान करते हैं। दान-महिमा तथा व्रत-कथाओं का वर्णन गृहस्थ जीवन में धार्मिक अनुष्ठानों के निर्वहन हेतु उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करता है। भगवान विष्णु के अवतार-सिद्धान्त के क्रमबद्ध अध्ययन हेतु भी यह ग्रन्थ प्रथम सोपान के रूप में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। एकादशी तथा अन्य वैष्णव पर्वों पर इस ग्रन्थ का पाठ विशेष पुण्यदायी माना जाता है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से गीता प्रेस का यह प्रामाणिक सचित्र संस्करण श्रद्धालुओं, शोधार्थियों तथा स्थापत्य-कला के अध्येताओं तक सुरक्षित पैकेजिंग सहित सुगमता से पहुँचाया जाता है। भारतीय वास्तु-शास्त्र, मूर्तिकला तथा मन्दिर-स्थापत्य पर शोध करने वाले विद्यार्थी एवं शोधार्थी इस ग्रन्थ में वर्णित शिल्प-सम्बन्धी अध्यायों का विशेष रूप से अध्ययन करते हैं, जिससे उन्हें प्राचीन भारतीय स्थापत्य-परम्परा की प्रामाणिक जानकारी प्राप्त होती है। जल-प्रलय तथा पुनर्निर्माण की यह कथा आधुनिक पर्यावरण-चेतना के सन्दर्भ में भी एक प्रतीकात्मक सन्देश प्रस्तुत करती है। सचित्र प्रस्तुति के कारण यह ग्रन्थ बाल-शिक्षा केन्द्रों में भी पौराणिक कथा-शिक्षण हेतु उपयोग में लाया जाता है। गीता प्रेस की स्पष्ट मुद्रण-गुणवत्ता इस संस्करण को धार्मिक पुस्तकालयों एवं संग्रहकर्ताओं के लिए एक मूल्यवान चयन बनाती है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से यह प्रामाणिक सचित्र संस्करण सुरक्षित पैकेजिंग सहित श्रद्धालुओं तक पहुँचाया जाता है। प्राचीन भारतीय राजनीति-शास्त्र तथा शासन-व्यवस्था के अध्येताओं के लिए राजधर्म-सम्बन्धी अध्याय एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज़ का कार्य करते हैं। मत्स्य-अवतार की कथा पर्यावरण-संरक्षण तथा जल-संचयन के आधुनिक सन्देश के साथ भी सहजता से जोड़ी जा सकती है, जिससे यह ग्रन्थ समसामयिक प्रासंगिकता भी रखता है। विद्यालयों में पौराणिक कथा-शिक्षण हेतु भी इस सचित्र संस्करण का उपयोग किया जाता है। अनेक धार्मिक संग्रहालय तथा शोध-संस्थान इस सचित्र संस्करण को अपने अभिलेखागार में प्रामाणिक सन्दर्भ-सामग्री के रूप में संरक्षित करते हैं। यह ग्रन्थ प्राचीन भारतीय ज्ञान-परम्परा का एक जीवन्त प्रतीक सिद्ध होता है। यह ग्रन्थ भारतीय सृष्टि-विज्ञान एवं पौराणिक इतिहास की गहन समझ विकसित करने में पाठकों के लिए अत्यन्त सहायक सिद्ध होता है। भारतीय संस्कृति तथा प्राचीन ज्ञान-परम्परा के संरक्षण में इस प्रकार के प्रामाणिक प्रकाशनों की भूमिका अत्यन्त महत्त्वपूर्ण मानी जाती है।

Enable Notifications OK No thanks