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Koorma Puran – Sachitra (Hindi–Sanskrit) | Gita Press Gorakhpur

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श्री कूर्मपुराण अष्टादश महापुराणों में भगवान विष्णु के द्वितीय अवतार कूर्म (कच्छप) की लीला तथा समुद्र-मन्थन की अद्भुत कथा का विस्तृत वर्णन करने वाला अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पुराण-ग्रन्थ है। गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित यह सचित्र संस्करण मूल संस्कृत श्लोकों के साथ सरल एवं सुबोध हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत करता है, जिससे पाठक इस पौराणिक ग्रन्थ के भावार्थ को सहजता से आत्मसात् कर सके। कूर्मपुराण में समुद्र-मन्थन के समय मन्दराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण करने वाले भगवान कूर्म की महिमा, अमृत-प्राप्ति, देव-दानव-संग्राम तथा चौदह रत्नों की उत्पत्ति का रोचक एवं विस्तृत वर्णन मिलता है। इसके साथ ही इस ग्रन्थ में शिव-पार्वती विवाह, तीर्थ-महिमा, वर्णाश्रम-धर्म तथा योग-साधना के सिद्धान्तों का भी सारगर्भित वर्णन सम्मिलित है, जो इसे शैव एवं वैष्णव दोनों परम्पराओं के समन्वय का प्रतीक बनाता है। गीता प्रेस की यह परम्परा शुद्ध पाठ, त्रुटिहीन मुद्रण तथा सुगम भाषा-शैली के लिए विश्वभर में विश्वसनीय मानी जाती है, जिससे यह संस्करण शोधार्थियों से लेकर सामान्य गृहस्थ पाठक तक सभी के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होता है। सचित्र प्रस्तुति इस संस्करण की विशेष पहचान है—समुद्र-मन्थन तथा कूर्म-अवतार के सुन्दर चित्र पाठक को कथा के दिव्य एवं नाटकीय स्वरूप को समझने में सहायता करते हैं। समुद्र-मन्थन की कथा धैर्य, सहयोग तथा सतत प्रयास के आदर्श को प्रतिष्ठित करती है, जो आज भी जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। भगवान विष्णु के अवतार-सिद्धान्त के क्रमबद्ध अध्ययन में कूर्म-अवतार एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है, जिसे यह ग्रन्थ विस्तार से प्रस्तुत करता है। योग-साधना तथा धर्मशास्त्र के अध्येताओं के लिए भी इस ग्रन्थ में वर्णित सम्बन्धित अध्याय विशेष उपयोगी सिद्ध होते हैं। भारतीय पौराणिक-कथा-साहित्य के अध्येताओं तथा कथावाचकों के लिए यह ग्रन्थ समुद्र-मन्थन की कथा के प्रामाणिक वर्णन हेतु एक अनिवार्य सन्दर्भ-स्रोत है। बाल-शिक्षा में भी समुद्र-मन्थन की कथा अत्यन्त लोकप्रिय है, जिससे यह सचित्र संस्करण बालकों के लिए विशेष रूप से रुचिकर सिद्ध होता है। एकादशी तथा अन्य वैष्णव पर्वों पर इस ग्रन्थ का पाठ विशेष पुण्यदायी माना जाता है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से गीता प्रेस का यह प्रामाणिक सचित्र कूर्मपुराण श्रद्धालुओं, बालकों तथा अध्येताओं तक सुरक्षित पैकेजिंग सहित सुगमता से पहुँचाया जाता है, जिससे यह अद्भुत एवं प्रेरक गाथा घर-घर तक संचरित हो सके। समुद्र-मन्थन की कथा आधुनिक प्रबन्धन-शिक्षा में भी सहयोग एवं साझा प्रयास के प्रतीक के रूप में उद्धृत की जाती है, जिससे यह ग्रन्थ समसामयिक प्रासंगिकता भी रखता है। योग एवं ध्यान-साधना केन्द्रों में भी कूर्म-आसन के सैद्धान्तिक आधार हेतु इस ग्रन्थ का सन्दर्भ लिया जाता है। बाल-शिक्षा केन्द्रों में सचित्र प्रस्तुति के कारण यह ग्रन्थ कथा-शिक्षण हेतु विशेष रूप से लोकप्रिय है। धार्मिक पुस्तकालयों में भी यह संस्करण एक मूल्यवान संग्रह-सामग्री मानी जाती है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से यह प्रामाणिक सचित्र संस्करण सुरक्षित पैकेजिंग सहित श्रद्धालुओं तथा बालकों तक पहुँचाया जाता है। भारतीय पुराण-साहित्य में अमृत-कथा का यह वर्णन अमरत्व तथा शाश्वत जीवन के दार्शनिक प्रश्नों पर भी गहन चिन्तन प्रस्तुत करता है, जो दर्शन-अध्येताओं के लिए रुचिकर विषय है। चौदह रत्नों की उत्पत्ति से सम्बन्धित प्रसंग ज्योतिष तथा रत्न-शास्त्र के अध्येताओं के लिए भी कुतूहल का विषय रहा है, जिसका मूल स्रोत यह पुराण प्रदान करता है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से यह प्रामाणिक सचित्र संस्करण सुरक्षित पैकेजिंग सहित श्रद्धालुओं तक समयबद्ध रूप से पहुँचाया जाता है। यह ग्रन्थ धैर्य एवं सहयोग के शाश्वत सिद्धान्त को स्थापित करता है, जिसकी प्रेरणा प्रत्येक पाठक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।

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