Vedic Books

Divya Jeevan Ki Rah Par (Hindi) – by Satya Pathariya | Vedic Lifestyle Guide

40.00
28 people are viewing this right now
Estimated Delivery:
21 - 28 Jul, 2026
payment-processing
Guaranteed safe & secure checkout

Product details

दिव्य जीवन की राह पर (Divya Jeevan Ki Rah Par), श्री सत्य पथरिया द्वारा रचित यह 132 पृष्ठीय हिन्दी ग्रंथ, वैदिक जीवन-दर्शन के आधार पर एक ‘दिव्य’ अर्थात् उन्नत, सात्त्विक एवं आध्यात्मिक रूप से सजग जीवन-शैली के निर्माण का scholarly किन्तु अत्यंत व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति आधुनिक गृहस्थ-साधक के लिए एक comprehensive जीवन-रचना-मार्गदर्शिका है।

‘दिव्य जीवन’ का concept भगवद्गीता के 16वें अध्याय ‘दैवासुर-सम्पद्-विभाग-योग’ से प्रेरित है, जहाँ श्रीकृष्ण मानव-स्वभाव के दो विपरीत ध्रुवों — दैवी सम्पदा एवं आसुरी सम्पदा — का विवेचन करते हैं। श्री पथरिया जी ने इसी framework को आधार बना कर एक comprehensive दैनिक जीवन-शैली-मार्गदर्शिका रची है।

ग्रंथ का प्रथम खण्ड ‘दैवी सम्पदा’ के 26 गुणों — अभय, सत्त्व-संशुद्धि, ज्ञान-योग-व्यवस्थिति, दान, दम, यज्ञ, स्वाध्याय, तप, आर्जव, अहिंसा, सत्य, अक्रोध, त्याग, शान्ति, अपैशुन, दया, अलोलुप्त्व, मार्दव, ह्री, अचापल, तेजस्, क्षमा, धृति, शौच, अद्रोह, नातिमानिता — इनका scholarly विवेचन एवं दैनिक जीवन में इनका practical application प्रस्तुत करता है।

लेखक ने प्रत्येक गुण के लिए concrete व्यावहारिक अभ्यास सुझाए हैं — कैसे अभय (निर्भयता) विकसित की जाए, कैसे दान की practice शुरू की जाए, कैसे स्वाध्याय को दैनिक routine में integrate किया जाए। यह actionable practical guidance ग्रंथ की एक विशेष उपलब्धि है।

दिनचर्या एवं ऋतुचर्या का वैदिक framework भी विवेचित है — ब्रह्म-मुहूर्त में जागरण, सन्ध्या-वन्दन, यज्ञ-कर्म, स्वाध्याय, श्रम, भोजन, विश्राम — यह दैनिक schedule कैसे ‘दिव्य जीवन’ के निर्माण में सहायक है, इसका scholarly विवेचन।

आहार-विहार के सिद्धान्तों पर भी विस्तृत विचार है — सात्त्विक आहार का महत्त्व, अति-भोजन का परिहार, उपवास की भूमिका — यह सब आयुर्वेदीय एवं वैदिक दृष्टिकोण से विवेचित।

मानसिक अनुशासन एवं भावनात्मक संतुलन के व्यावहारिक उपाय भी ग्रंथ का एक मूल्यवान अंश हैं — क्रोध-प्रबंधन, ईर्ष्या-त्याग, संतोष-वृद्धि, सकारात्मक चिन्तन — यह सब practical psychology वैदिक framework में प्रस्तुत की गई है।

पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन में दिव्यता के अनुप्रयोग पर भी विशेष अध्याय है — कैसे परिवार में सद्भाव बनाए रखें, कैसे सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वाह करें, कैसे कार्यक्षेत्र में नैतिकता बनाए रखें — यह सब आधुनिक गृहस्थ की वास्तविक चुनौतियों को सम्बोधित करता है।

आर्य समाज परम्परा के अनुरूप, ग्रंथ में ईश्वर-प्रणिधान, यज्ञ-संस्कृति, एवं वैदिक स्वाध्याय का विशेष महत्त्व रेखांकित किया गया है, जो दिव्य जीवन की आधारशिला मानी गई हैं।

लेखक की भाषा सरल, प्रेरणादायक हिन्दी है, जो अमूर्त philosophical concepts को concrete दैनिक अभ्यासों में translate करती है। 132 पृष्ठीय compact आयाम इसे दैनिक स्वाध्याय एवं reference के लिए ideal बनाता है।

गृहस्थ-साधकों, आध्यात्मिक जिज्ञासुओं, आत्म-सुधार में रुचि रखने वाले पाठकों, आर्य समाज के साधकों, युवा-वर्ग जो एक meaningful जीवन-दिशा खोज रहे हैं, तथा प्रत्येक उस सुधी पाठक के लिए जो वैदिक सिद्धान्तों के आधार पर एक सात्त्विक, अनुशासित एवं दिव्य जीवन-शैली अपनाना चाहता है — दिव्य जीवन की राह पर एक trustworthy मार्गदर्शक है।

ग्रंथ के अन्तिम अध्याय में श्री पथरिया जी ने एक व्यावहारिक साप्ताहिक routine-planner भी प्रस्तुत किया है, जो पाठक को इन 26 दैवी गुणों को अपने दैनिक जीवन में क्रमबद्ध रूप से आत्मसात करने में सहायक है। प्रत्येक सप्ताह एक-दो गुणों पर विशेष ध्यान केन्द्रित करने की यह systematic पद्धति ग्रंथ को केवल theoretical discussion से आगे एक actionable self-transformation-program बनाती है, जो किसी भी गंभीर साधक द्वारा तुरंत अपनाई जा सकती है। इस प्रकार, यह ग्रंथ केवल दार्शनिक विवेचन तक सीमित न रहकर, पाठक के हाथ में एक ready-to-use जीवन-परिवर्तन-उपकरण थमा देता है, जो इसकी सर्वाधिक व्यावहारिक एवं प्रशंसनीय विशेषता है। नियमित अभ्यास से यह मार्गदर्शिका जीवन की दिशा को स्थायी रूप से बदलने की क्षमता रखती है। ऐसे व्यावहारिक ग्रंथ आज के तीव्र-गति जीवन में विशेष रूप से मूल्यवान सिद्ध होते हैं।

Enable Notifications OK No thanks