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Atharvaved Ka Upved Arthaved (अथर्ववेद का उपवेद अर्थवेद) — Dr. Hariveer Singh | Vedic Science Hindi sanskrit

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Description

Atharvaved Ka Upved Arthaved book by Dr. Hariveer Singh is a rare and scholarly work that explores the Upaveda of the Atharvaveda known as Arthaveda — the auxiliary Vedic science of economics, statecraft, and material well-being that forms one of the four traditional Upavedas of the Vedic corpus. अथर्ववेद का उपवेद अर्थवेद हिन्दी में अथर्ववेद के उपवेद अर्थवेद का एक प्रामाणिक एवं दुर्लभ विद्वत्तापूर्ण विवेचन है।

Atharvaved Ka Upved Arthaved Book — उपवेद का परिचय

वैदिक परम्परा में चार वेदों के साथ-साथ चार उपवेद भी हैं — आयुर्वेद (ऋग्वेद का उपवेद), धनुर्वेद (यजुर्वेद का उपवेद), गान्धर्ववेद (सामवेद का उपवेद) एवं अर्थवेद (अथर्ववेद का उपवेद)। अर्थवेद अर्थनीति, राजनीति, कृषि, वाणिज्य एवं भौतिक समृद्धि के विज्ञान को प्रतिपादित करता है।

यह Atharvaved Ka Upved Arthaved book डॉ. हरिवीर सिंह की एक महत्त्वपूर्ण शोध-कृति है। इस अथर्ववेद का उपवेद अर्थवेद हिन्दी ग्रन्थ में अर्थवेद के मूल सिद्धान्तों, उसकी विषय-सामग्री एवं आधुनिक अर्थशास्त्र से उसके सम्बन्ध का विस्तृत विवेचन किया गया है।

अथर्ववेद का उपवेद अर्थवेद हिन्दी — अर्थशास्त्र का वैदिक दृष्टिकोण

इस Atharvaved Ka Upved Arthaved book में यह भी दर्शाया गया है कि वैदिक अर्थशास्त्र आधुनिक अर्थशास्त्र से किस प्रकार भिन्न एवं श्रेष्ठ है। वैदिक अर्थव्यवस्था में नैतिकता, धर्म एवं पर्यावरण-संरक्षण को आर्थिक विकास के अनिवार्य अंग माना जाता है। यह दृष्टि आज की असंतुलित वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्त्वपूर्ण विकल्प प्रस्तुत करती है।

अमर स्वामी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह ग्रन्थ हिन्दी एवं संस्कृत दोनों में उपलब्ध है जिससे यह विद्वानों एवं सामान्य पाठकों दोनों के लिए उपयोगी है।

Atharvaved Ka Upved Arthaved Book — शोधार्थियों के लिए

यह Atharvaved Ka Upved Arthaved book वैदिक साहित्य के शोधार्थियों, अर्थशास्त्र के विद्यार्थियों एवं प्राचीन भारतीय विज्ञान में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यन्त मूल्यवान है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह अथर्ववेद का उपवेद अर्थवेद हिन्दी पुस्तक वैदिक विज्ञान की एक दुर्लभ एवं संग्रहणीय कृति है।

अथर्ववेद के अर्थवेद में कृषि-विज्ञान, पशु-पालन, वाणिज्य-नियम एवं राजकोष-प्रबन्धन के सिद्धान्त भी वर्णित हैं। इस Atharvaved Ka Upved Arthaved book में इन व्यावहारिक विषयों का विस्तृत विवेचन किया गया है। वैदिक कृषि में जल-संरक्षण, भूमि-उर्वरता एवं पर्यावरण-संरक्षण पर जो बल दिया गया है वह आज के जल-संकट एवं पर्यावरण-प्रदूषण के युग में और भी अधिक प्रासंगिक है।

डॉ. हरिवीर सिंह ने इस अथर्ववेद का उपवेद अर्थवेद हिन्दी संस्कृत ग्रन्थ में यह भी दर्शाया है कि वैदिक अर्थव्यवस्था में असमानता एवं शोषण के लिए कोई स्थान नहीं था। ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ — सभी सुखी हों — यह वैदिक आर्थिक दर्शन का मूल सन्देश है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह Atharvaved Ka Upved Arthaved book वैदिक विज्ञान की एक दुर्लभ कृति है। अथर्ववेद का उपवेद अर्थवेद हिन्दी संस्कृत ग्रन्थ में डॉ. हरिवीर सिंह ने वैदिक अर्थशास्त्र के उन सिद्धान्तों को प्रस्तुत किया है जो आज की आर्थिक समस्याओं का एक स्थायी समाधान प्रस्तुत कर सकते हैं। Atharvaved Ka Upved Arthaved book vedickarts.com पर उपलब्ध है। वैदिक अर्थशास्त्र आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। Atharvaved Ka Upved Arthaved book vedickarts.com पर उपलब्ध है। अथर्ववेद का उपवेद अर्थवेद हिन्दी पुस्तक वैदिक विज्ञान की एक दुर्लभ शोध-कृति है। यह ग्रन्थ प्रत्येक वेद-जिज्ञासु के संग्रह में होना चाहिए। अथर्ववेद का उपवेद अर्थवेद हिन्दी पुस्तक वैदिक आर्थिक चिन्तन को आधुनिक सन्दर्भ में प्रस्तुत करती है। Atharvaved Ka Upved Arthaved book vedickarts.com पर उपलब्ध है। यह दुर्लभ ग्रन्थ अभी मँगाएँ। वैदिक अर्थव्यवस्था में नैतिकता एवं धर्म का समन्वय आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। अथर्ववेद का उपवेद अर्थवेद हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है। Atharvaved Ka Upved Arthaved book वैदिक विज्ञान का एक अनमोल दस्तावेज है। यह ग्रन्थ वैदिक अर्थशास्त्र को समझने का एक दुर्लभ एवं प्रामाणिक साधन है। Atharvaved Ka Upved Arthaved book अभी vedickarts.com से मँगाएँ। अथर्ववेद का उपवेद अर्थवेद भारतीय वैदिक विज्ञान का एक अनमोल अंग है।

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