Mimansa Darshanam

Description
Mimansa Darshanam book is an authoritative and comprehensive exposition of the Mimansa school of Vedic philosophy — the classical system dedicated to the correct interpretation of Vedic injunctions and the philosophy of dharma. मीमांसा दर्शन हिन्दी में जैमिनि मुनि प्रणीत पूर्वमीमांसा के सिद्धान्तों, धर्म की अवधारणा एवं वेद-प्रामाण्य का एक प्रामाणिक एवं विद्वत्तापूर्ण विवेचन प्रस्तुत किया गया है।
Mimansa Darshanam Book — मीमांसा दर्शन का परिचय
मीमांसा दर्शन आर्यों के छः दर्शनों में से एक है। इस शास्त्र को ‘पूर्वमीमांसा’ और वेदान्त को ‘उत्तरमीमांसा’ भी कहा जाता है। पूर्वमीमांसा में धर्म का विचार है और उत्तरमीमांसा में ब्रह्म का। अतः पूर्वमीमांसा को ‘धर्ममीमांसा’ और उत्तरमीमांसा को ‘ब्रह्ममीमांसा’ भी कहा जाता है।
यह Mimansa Darshanam book जैमिनि मुनि द्वारा रचित मीमांसासूत्रों पर आधारित है। मीमांसा के मूल सिद्धान्त वेदों की नित्यता, शब्द-प्रामाण्य एवं कर्मकाण्ड की व्याख्या पर आधारित हैं। इस मीमांसा दर्शन हिन्दी ग्रन्थ में इन सिद्धान्तों का विस्तृत एवं सुबोध विवेचन किया गया है।
मीमांसा दर्शन हिन्दी — धर्म एवं कर्मकाण्ड का दर्शन
मीमांसा दर्शन में ‘धर्म’ की परिभाषा अत्यन्त विशिष्ट है। ‘अथातो धर्म-जिज्ञासा’ — यह मीमांसासूत्र का प्रथम सूत्र है। मीमांसा के अनुसार वेद-वाक्य ही धर्म का एकमात्र प्रमाण है। इस Mimansa Darshanam book में इस सिद्धान्त का विस्तृत विवेचन किया गया है।
इस ग्रन्थ में शब्द-नित्यत्व, अर्थ-प्रत्यय एवं अनुमान के मीमांसक सिद्धान्तों का भी विवेचन किया गया है। पूर्वमीमांसा एवं उत्तरमीमांसा के बीच के सम्बन्ध को समझना भारतीय दर्शन की समग्र समझ के लिए आवश्यक है।
Mimansa Darshanam Book — षड्दर्शन अध्येताओं के लिए
यह Mimansa Darshanam book भारतीय दर्शन के अध्येताओं, वेद-व्याख्या में रुचि रखने वाले विद्वानों एवं षड्दर्शन के जिज्ञासुओं के लिए अत्यन्त उपयोगी है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह मीमांसा दर्शन हिन्दी ग्रन्थ भारतीय धर्म-दर्शन की एक महत्त्वपूर्ण शोध-कृति है।
मीमांसा दर्शन भारत के वैदिक कर्मकाण्ड की तर्कसम्मत व्याख्या प्रस्तुत करता है। यज्ञ, संस्कार एवं वैदिक अनुष्ठानों का दार्शनिक आधार क्या है — इसका उत्तर मीमांसा देती है। यह Mimansa Darshanam book उस दार्शनिक आधार को अत्यन्त स्पष्ट एवं विद्वत्तापूर्ण ढंग से प्रस्तुत करती है। मीमांसा दर्शन हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है।
मीमांसा दर्शन का यह सिद्धान्त कि ‘वेद अपौरुषेय हैं’ — अर्थात् वेद किसी मनुष्य की रचना नहीं हैं — भारतीय धर्म-दर्शन का एक मौलिक एवं महत्त्वपूर्ण विचार है। इस Mimansa Darshanam book में इस सिद्धान्त का विस्तृत तार्किक विवेचन किया गया है। यह मीमांसा दर्शन हिन्दी पुस्तक वेद-प्रामाण्य को समझने का एक प्रामाणिक माध्यम है। vedickarts.com पर उपलब्ध है।
मीमांसा दर्शन का शब्द-नित्यत्व सिद्धान्त भाषा-दर्शन में एक महत्त्वपूर्ण योगदान है। यह सिद्धान्त बताता है कि शब्द एवं अर्थ के बीच का सम्बन्ध नित्य एवं अपरिवर्तनीय है। इस Mimansa Darshanam book में इस सिद्धान्त का भी विस्तृत विवेचन है। मीमांसा दर्शन हिन्दी ग्रन्थ vedickarts.com पर उपलब्ध है।
मीमांसा दर्शन का शब्द-नित्यत्व सिद्धान्त भाषा-दर्शन में एक महत्त्वपूर्ण योगदान है। यह सिद्धान्त बताता है कि शब्द एवं अर्थ के बीच का सम्बन्ध नित्य एवं अपरिवर्तनीय है। इस Mimansa Darshanam book में इस सिद्धान्त का भी विस्तृत विवेचन है। मीमांसा दर्शन हिन्दी ग्रन्थ vedickarts.com पर उपलब्ध है। षड्दर्शन-अध्येताओं के लिए यह ग्रन्थ अनिवार्य है।
मीमांसा दर्शन का यह ग्रन्थ वैदिक धर्म-दर्शन को समझने का एक प्रामाणिक माध्यम है। जैमिनि के मीमांसासूत्रों की व्याख्या वेद-प्रमाणों के आधार पर की गई है। इस Mimansa Darshanam book को पढ़कर पाठक वेद एवं धर्म के बीच के गहरे सम्बन्ध को समझ सकते हैं। मीमांसा दर्शन हिन्दी ग्रन्थ vedickarts.com पर उपलब्ध है। यह ग्रन्थ दर्शन-जिज्ञासुओं के लिए एक अनिवार्य संसाधन है। मीमांसा दर्शन का अध्ययन करके पाठक वेद के प्रामाण्य को समझ सकते हैं। Mimansa Darshanam book vedickarts.com पर उपलब्ध है। मीमांसा दर्शन हिन्दी ग्रन्थ षड्दर्शन-अध्येताओं के लिए अनिवार्य है। मीमांसा दर्शन में जैमिनि ने 2645 सूत्रों में धर्म के सम्पूर्ण विज्ञान को प्रतिपादित किया है। यह अत्यन्त विशाल एवं विस्तृत दर्शन है जो वेद-वाक्यों की व्याख्या की एक सम्पूर्ण पद्धति प्रदान करता है। शब्द-नित्यत्व का सिद्धान्त — अर्थात् वेद के शब्द नित्य एवं अपौरुषेय हैं — मीमांसा का एक महत्त्वपूर्ण योगदान है। यह सिद्धान्त वेद की प्रामाणिकता का आधार है। आर्य समाज भी वेद की प्रामाणिकता में विश्वास करता है, हालाँकि उसकी दृष्टि कुछ भिन्न है। इस Mimansa Darshanam book में इन सभी विषयों पर विस्तृत विवेचन है। मीमांसा दर्शन हिन्दी पुस्तक vedickarts.com पर उपलब्ध है। यह ग्रन्थ भारतीय धर्म-दर्शन के शोधार्थियों के लिए एक अनिवार्य संसाधन है। पूर्वमीमांसा एवं उत्तरमीमांसा का यह समन्वय भारतीय दर्शन को समझने के लिए आवश्यक है। Mimansa Darshanam book vedickarts.com पर उपलब्ध है।
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Govind Ram Hasanand| Vedickarts
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