प्रौढ-रचनानुवादकौमुदी(Praudh Rachnanuwadkaumudi)

Description
पुस्तक का विवरण: संस्कृत भाषा को अति सरल, सुबोध और सुगम बनाने के लिए यह पुस्तक प्रस्तुत की गई है। अतः अदम्य उत्साह के साथ पुस्तक के पठन में प्रवृत्त हो । प्रत्येक भाषा में शुद्ध बोलना या लिखना निरन्तर अभ्यास के बाद ही आता है। मातृभाषा हिन्दी में शुद्ध बोलना या लिखना वर्षों के निरन्तर अभ्यास के बाद ही आता है। यह स्मरण रख कि बिना अभ्यास के सम्भव नहीं है, अतः इस पुस्तक को पढकर अपने ज्ञान में वृद्धि करें ।
प्रौढ़-रचनानुवादकौमुदी
यह एक उत्कृष्ट संस्कृत अध्ययन ग्रंथ है, जो विशेष रूप से उन्नत स्तर के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है। इसमें संस्कृत गद्य एवं पद्य की रचना (Composition) और अनुवाद (Translation) की विधियों को व्यवस्थित और सरल रूप में समझाया गया है।
पुस्तक में विभिन्न उदाहरणों, अभ्यासों और व्याकरणिक नियमों के माध्यम से विद्यार्थियों की भाषा दक्षता को विकसित करने पर विशेष बल दिया गया है। यह ग्रंथ संस्कृत भाषा में निपुणता प्राप्त करने, लेखन कौशल को सुदृढ़ बनाने तथा शुद्ध एवं प्रभावशाली अनुवाद करने के इच्छुक पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
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Govind Ram Hasanand| Vedickarts
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