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रचनानुवादकौमुदी(Rachnanuwadkaumudi) डॉ कपिलदेव द्विवेदी

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Product details

पुस्तक का विवरण: संस्कृत भाषा को अति सरल, सुबोध और सुगम बनाने के लिए यह पुस्तक प्रस्तुत की गई है। अतः अदम्य उत्साह के साथ पुस्तक के पठन में प्रवृत्त हो । प्रत्येक भाषा में शुद्ध बोलना या लिखना निरन्तर अभ्यास के बाद ही आता है। मातृभाषा हिन्दी में शुद्ध बोलना या लिखना वर्षों के निरन्तर अभ्यास के बाद ही आता है। यह स्मरण रख कि बिना अभ्यास के सम्भव नहीं है, अतः इस पुस्तक को पढकर अपने ज्ञान में वृद्धि करें ।

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