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Vidur Niti

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Description

Vidur Niti book by Swami Jagdeshwaranand Saraswati is a definitive edition of one of the most celebrated sections of the Mahabharata — the timeless wisdom of Mahamana Vidura addressed to King Dhritarashtra on righteous governance, ethical conduct, and eternal welfare. विदुरनीति हिन्दी में महाभारत के उद्योगपर्व से ली गई इस अनमोल नीति-शास्त्र की एक प्रामाणिक एवं विद्वत्तापूर्ण प्रस्तुति है।

Vidur Niti Book — विदुरनीति का परिचय

‘विदुरनीति’ महाभारत का एक अत्यन्त प्रसिद्ध और परम उपादेय प्रसंग है। इसमें महामना विदुर ने राजा धृतराष्ट्र को लोक-परलोक में कल्याण करने वाली बहुत-सी बातें समझाई हैं। उद्योगपर्व के आठ अध्याय — 33वें से 40वें तक — इस प्रसंग के हैं। इसमें व्यवहार, बर्ताव, नीति, सदाचार, धर्म एवं सम्बन्धों का विशद् विवेचन है।

यह Vidur Niti book स्वामी जगदीश्वरानन्द सरस्वती की विद्वत्तापूर्ण टीका के साथ प्रस्तुत की गई है। स्वामी जी ने विदुर के प्रत्येक वचन की व्याख्या वेद एवं धर्मशास्त्र के आलोक में की है जिससे इन नीति-वचनों का गहरा अर्थ पाठकों के सामने खुलता है।

विदुरनीति हिन्दी — नीति के सिद्धान्त

इस विदुरनीति हिन्दी ग्रन्थ में विदुर ने राजनीति, अर्थनीति, समाजनीति एवं व्यक्तिगत आचरण पर जो अमूल्य वचन दिए हैं वे आज के युग में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। एक आदर्श राजा, आदर्श मन्त्री, आदर्श नागरिक एवं आदर्श गृहस्थ का क्या स्वरूप होना चाहिए — इन सभी विषयों पर विदुर का मार्गदर्शन इस Vidur Niti book में उपलब्ध है।

विदुर की नीति का आधार सत्य, धर्म एवं परोपकार है। इन तीन तत्त्वों पर आधारित जीवन ही सच्चे अर्थ में सफल एवं कल्याणकारी है। विदुरनीति के वचन आज के प्रशासकों, राजनेताओं एवं व्यवसायियों के लिए भी उतने ही उपयोगी हैं।

Vidur Niti Book — शासकों एवं जिज्ञासुओं के लिए

यह Vidur Niti book राजनेताओं, प्रशासकों, विद्यार्थियों एवं प्रत्येक उस व्यक्ति के लिए उपयोगी है जो नैतिक एवं सफल जीवन जीना चाहता है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह विदुरनीति हिन्दी ग्रन्थ भारतीय नीति-शास्त्र की एक अमूल्य कृति है।

विदुरनीति के वचन आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने महाभारत-काल में थे। ‘अर्थस्य पुरुषो दासः, दासस्त्वर्थो न कस्यचित्’ — धन का दास मनुष्य होता है, धन किसी का दास नहीं होता। इस प्रकार के जीवन-सूत्र इस Vidur Niti book में भरे पड़े हैं। स्वामी जगदीश्वरानन्द सरस्वती ने इन वचनों की व्याख्या इतनी सरल एवं प्रभावशाली भाषा में की है कि आधुनिक पाठक भी इनसे तुरन्त जुड़ाव अनुभव करते हैं। vedickarts.com पर उपलब्ध यह विदुरनीति हिन्दी पुस्तक अभी मँगाएँ।

विदुरनीति में विदुर ने धृतराष्ट्र को जो उपदेश दिए वे न केवल राजनीतिक थे, अपितु गहरे नैतिक एवं आध्यात्मिक भी थे। विदुर का मानना था कि जो राजा धर्म का पालन करता है उसका राज्य दीर्घकाल तक चलता है। ‘धर्म एव हतो हन्ति, धर्मो रक्षति रक्षितः’ — धर्म की रक्षा करने से धर्म रक्षा करता है। यह Vidur Niti book इस वैदिक नीति-शास्त्र को आधुनिक जीवन के सन्दर्भ में प्रासंगिक बनाती है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह विदुरनीति हिन्दी पुस्तक अभी मँगाएँ।

विदुरनीति भारतीय नीति-शास्त्र में एक विशिष्ट स्थान रखती है क्योंकि यह धर्म को राजनीति का आधार मानती है। नैतिक शासन का यह वैदिक सिद्धान्त आज के लोकतन्त्र के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है। इस Vidur Niti book में इस वैदिक शासन-दर्शन का विस्तृत विवेचन है। विदुरनीति हिन्दी ग्रन्थ vedickarts.com पर उपलब्ध है।

विदुर की नीति में एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त है — सत्य बोलना, न्याय करना एवं अहंकार से मुक्त रहना। ये तीन गुण एक आदर्श मनुष्य की पहचान हैं। इस Vidur Niti book में विदुर ने धृतराष्ट्र को जो परामर्श दिए वे आज के नेताओं एवं प्रशासकों के लिए भी उतने ही प्रासंगिक हैं। विदुर स्वयं एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने राजदरबार में रहते हुए भी अपनी नैतिकता एवं सत्यनिष्ठा से कभी समझौता नहीं किया। इस विदुरनीति हिन्दी पुस्तक को पढ़कर पाठक यह समझ सकते हैं कि वास्तविक नीतिज्ञ वह है जो सत्य एवं धर्म को सर्वोपरि मानता है। vedickarts.com पर उपलब्ध यह Vidur Niti book अभी मँगाएँ।

विदुरनीति भारतीय नीति-शास्त्र में एक विशिष्ट स्थान रखती है क्योंकि यह धर्म को राजनीति का आधार मानती है। नैतिक शासन का यह वैदिक सिद्धान्त आज के लोकतन्त्र के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है। इस Vidur Niti book में इस वैदिक शासन-दर्शन का विस्तृत विवेचन है। विदुरनीति हिन्दी ग्रन्थ vedickarts.com पर उपलब्ध है।

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