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Vedokt Sanskar Prakash (Hindi) – by Swami Dayanand Saraswati | Vedic Sixteen Sanskars Guide

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वेदोक्त संस्कार प्रकाश (Vedokt Sanskar Prakash), महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा रचित यह विशाल 239 पृष्ठीय हिन्दी ग्रंथ, षोडश-संस्कारों के ‘वेदोक्त’ (वेद में उल्लिखित/वेद-आधारित) स्वरूप का एक authoritative, comprehensive प्रकाश (illumination) प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति महर्षि की संस्कार-सम्बन्धी scholarship का एक विस्तृत रूप प्रस्तुत करती है, जो उनकी प्रसिद्ध ‘संस्कारविधि’ के साथ एक complementary treatise है।

‘वेदोक्त’ — यह शीर्षक महर्षि की central methodological commitment को रेखांकित करता है — संस्कार-व्यवस्था का प्रत्येक अंश वेद-मूलक, authentic होना चाहिए, न कि परवर्ती pauranic अथवा sectarian additions से मिश्रित। इस ग्रंथ का उद्देश्य संस्कार-व्यवस्था के इस वेद-आधारित स्वरूप को ‘प्रकाशित’ (illuminate) करना है।

ग्रंथ की संरचना 16 प्रमुख संस्कारों के अनुरूप है, किन्तु ‘संस्कारविधि’ की तुलना में यह ग्रंथ प्रत्येक संस्कार के लिए अधिक विस्तृत shastric justification, additional वेद-मन्त्र-उद्धरण, तथा गहन philosophical exposition प्रस्तुत करता है।

**गर्भाधान-पुंसवन-सीमन्तोन्नयन** — गर्भावस्था-सम्बन्धी संस्कारों का विस्तृत वेद-आधारित विवेचन, जो गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य एवं माता के कल्याण के वैज्ञानिक-आध्यात्मिक rationale को उजागर करता है।

**जातकर्म-नामकरण-निष्क्रमण-अन्नप्राशन** — जन्म-पश्चात् के संस्कारों का detailed विवेचन, प्रत्येक के लिए अतिरिक्त वेद-मन्त्र-संदर्भों के साथ।

**चूडाकर्म-कर्णवेध-उपनयन-वेदारम्भ** — बाल्यकाल एवं शिक्षा-आरम्भ के संस्कारों का comprehensive विवेचन, जिसमें उपनयन-संस्कार का विशेष विस्तृत treatment है — यज्ञोपवीत का शास्त्रीय आधार, गुरुकुल-प्रवेश की विधि, तथा ब्रह्मचर्य-व्रत का महत्त्व।

**समावर्तन-विवाह** — शिक्षा-समापन एवं गृहस्थ-आरम्भ के संस्कारों का detailed exposition, विशेष रूप से विवाह-संस्कार के प्रत्येक चरण (वाग्दान से सप्तपदी तक) का गहन shastric विवेचन।

**वानप्रस्थ-संन्यास-अन्त्येष्टि** — जीवन के उत्तरार्ध के संस्कारों का scholarly विवेचन, जो आश्रम-व्यवस्था के वैदिक दर्शन को उजागर करता है।

महर्षि ने प्रत्येक संस्कार के लिए pौराणिक अथवा sectarian additions की rigorous scholarly समीक्षा भी प्रस्तुत की है, यह दर्शाते हुए कि कौन-से elements वेद-मूलक हैं तथा कौन-से बाद के प्रक्षेप हैं।

**समाज-सुधार का आयाम** — महर्षि ने संस्कार-व्यवस्था के माध्यम से भी अपनी reformist दृष्टि प्रस्तुत की है — बाल-विवाह-विरोध, स्त्री-शिक्षा का समर्थन, तथा जाति-निरपेक्ष संस्कार-अधिकार का सिद्धान्त।

239 पृष्ठीय विशाल आयाम इस foundational ग्रंथ की comprehensiveness के अनुरूप है, जो संस्कारविधि का एक valuable expanded companion है।

आर्य समाज के प्रत्येक परिवार, संस्कार-कर्ता-आचार्यों, संस्कार-व्यवस्था के गहन अध्येताओं, वैदिक gurukulas के acharyas, तथा प्रत्येक उस dharmic गृहस्थ के लिए जो अपने जीवन के प्रत्येक महत्त्वपूर्ण चरण को comprehensive वेद-आधारित scholarly justification के साथ समझना चाहता है — वेदोक्त संस्कार प्रकाश एक अनिवार्य एवं प्रामाणिक मार्गदर्शक है। महर्षि की यह विस्तृत कृति संस्कारविधि के साथ मिलकर, आर्य समाज परिवारों के लिए संस्कार-व्यवस्था के सम्पूर्ण scholarly एवं व्यावहारिक ज्ञान का एक comprehensive द्विविध स्रोत प्रस्तुत करती है, जो पीढ़ियों से इस civilisational परम्परा को जीवन्त बनाए हुए है।

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