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Vedic Nitya-Karm Vidhi – Moolmantra (Hindi) – by Pt. Yudhishthir Mimansak | Daily Vedic Mantras Collection

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वैदिक नित्य-कर्म विधि (मूलमन्त्र) — Vedic Nitya-Karm Vidhi (Moolmantra), पंडित युधिष्ठिर मीमांसक द्वारा रचित यह 48 पृष्ठीय हिन्दी ग्रंथ, गृहस्थ आर्य साधक के दैनिक नित्य-कर्मों के लिए आवश्यक मूल Vedic मन्त्रों का एक संक्षिप्त, ready-to-use संकलन प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति दैनिक उपासना-अभ्यास के लिए एक अत्यंत practical, portable संदर्भ-पुस्तिका है।

‘मूलमन्त्र’ — शीर्षक का यह अंश इंगित करता है कि यह ग्रंथ नित्य-कर्मों के लिए आवश्यक केवल core, essential मन्त्रों का संकलन है, बिना विस्तृत scholarly commentary अथवा extensive व्याख्या के — यह एक focused, practical, quick-reference tool है।

ग्रंथ में गृहस्थ के प्रमुख नित्य-कर्मों — सन्ध्या-वन्दन, अग्निहोत्र, वेद-स्वाध्याय — के लिए आवश्यक मूल मन्त्रों का systematic संकलन है।

**सन्ध्या-मन्त्र** — गायत्री-मन्त्र, आचमन-मन्त्र, प्राणायाम-मन्त्र, मार्जन-मन्त्र, अघमर्षण-मन्त्र, उपस्थान-मन्त्र — प्रत्येक चरण के लिए आवश्यक मूल मन्त्र, संक्षिप्त निर्देशों के साथ।

**अग्निहोत्र-मन्त्र** — प्रातः एवं सायं की आहुतियों के लिए आवश्यक मूल मन्त्र — ‘अग्नये स्वाहा, अग्नये इदं न मम’ जैसे classical मन्त्र-सूत्र, सही क्रम में arranged।

**पञ्च-महायज्ञ-सम्बन्धी मूलमन्त्र** — ब्रह्म-यज्ञ, देव-यज्ञ, पितृ-यज्ञ, भूत-यज्ञ, मनुष्य-यज्ञ — इन पाँच दैनिक यज्ञों के लिए आवश्यक essential मन्त्रों का संक्षिप्त संकलन।

**Quick-reference format** — प्रत्येक मन्त्र स्पष्ट देवनागरी में, सही क्रम में, बिना अनावश्यक विस्तार के प्रस्तुत है, जो साधक को अपने दैनिक अभ्यास में तुरंत उपयोग करने योग्य बनाता है।

**Portable, daily-use डिज़ाइन** — 48 पृष्ठीय अत्यंत संक्षिप्त आयाम इसे एक pocket-companion बनाता है, जिसे साधक अपने पूजा-स्थान में, अथवा यात्रा में भी अपने साथ रख सकते हैं।

पंडित मीमांसक की यह compilation उनके अपने विस्तृत scholarly कार्य (जैसे ‘दैनिक नित्य-कर्म विधि’ का Sanskrit-detailed संस्करण) का एक concise, practical distillation है, जो उन साधकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जिन्हें detailed scholarly explanation की बजाय सीधे, actionable मन्त्र-संकलन चाहिए।

यह ग्रंथ नए साधकों के लिए भी एक ideal entry-point है, जो अभी वैदिक दैनिक-उपासना सीखना प्रारम्भ कर रहे हैं, तथा जिन्हें एक simple, uncomplicated reference चाहिए, बिना अत्यधिक theoretical detail में उलझे।

आर्य समाज के गृहस्थ साधकों, नित्य-कर्म-पालन में रुचि रखने वाले परिवारों, नए साधकों, यात्रा के दौरान दैनिक उपासना जारी रखने के इच्छुक पाठकों, तथा प्रत्येक उस dharmic गृहस्थ के लिए जो एक संक्षिप्त, ready-to-use, तथा authentic मूलमन्त्र-संकलन चाहता है — वैदिक नित्य-कर्म विधि (मूलमन्त्र) एक अत्यंत practical एवं trustworthy साथी है। यह संक्षिप्त, focused संकलन इस प्रकार व्यस्त आधुनिक जीवन-शैली में भी नियमित वैदिक अभ्यास को सुगम एवं sustainable बनाता है, जो इसे प्रत्येक आर्य परिवार के दैनिक जीवन का एक भरोसेमंद साथी बनाता है।

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