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Vedic Nitya-Karm Vidhi (Hindi) – by Pt. Yudhishthir Mimansak | Daily Vedic Rituals Detailed Guide

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वैदिक नित्य-कर्म विधि (Vedic Nitya-Karm Vidhi), पंडित युधिष्ठिर मीमांसक द्वारा रचित यह हिन्दी ग्रंथ, गृहस्थ आर्य साधक के दैनिक नित्य-कर्मों की एक comprehensive, विस्तृत, तथा authentic विधि प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति उनकी अन्य संक्षिप्त ‘मूलमन्त्र’ पुस्तिका के विपरीत, नित्य-कर्मों का एक अधिक विस्तृत, scholarly-explained संस्करण है, जो शास्त्रीय आधार एवं व्यावहारिक विधि — दोनों को comprehensive detail के साथ प्रस्तुत करता है।

‘नित्य-कर्म’ — गृहस्थ द्विज के लिए shastrically अनिवार्य दैनिक obligatory duties — का यह विस्तृत विवेचन महर्षि दयानन्द की ‘संस्कारविधि’ की परम्परा में, अधिक comprehensive scholarly detail के साथ प्रस्तुत किया गया है।

ग्रंथ का प्रथम खण्ड नित्य-कर्मों के shastric आधार का विस्तृत विवेचन प्रस्तुत करता है — क्यों यह कर्म प्रतिदिन अनिवार्य हैं, इनका dharmic-spiritual rationale, तथा वेद-उपनिषद्-स्मृति से इनका shastric समर्थन।

**पंच-महायज्ञों का विस्तृत विवेचन** — ब्रह्म-यज्ञ (वेद-स्वाध्याय), देव-यज्ञ (अग्निहोत्र), पितृ-यज्ञ (तर्पण-श्राद्ध), भूत-यज्ञ (बलि-वैश्वदेव), मनुष्य-यज्ञ (अतिथि-सत्कार) — प्रत्येक का detailed shastric आधार एवं practical विधि।

**सन्ध्या-वन्दन की comprehensive विधि** — प्रातः-मध्याह्न-सायं तीनों समय की सन्ध्या, आवश्यक मन्त्र, उचित मुद्राएँ, तथा उपासना-क्रम का विस्तृत step-by-step मार्गदर्शन।

**अग्निहोत्र-विधि का comprehensive exposition** — अग्नि-प्रज्वलन, आहुति-सामग्री, मन्त्र-पाठ का क्रम, तथा इसके पीछे का scientific-spiritual rationale का विस्तृत विवेचन।

**वेद-स्वाध्याय की systematic पद्धति** — दैनिक वेद-पाठ का महत्त्व, उचित क्रम, तथा विभिन्न वेद-अंशों के अध्ययन की methodology।

**अतिथि-सत्कार का dharmic विवेचन** — ‘अतिथि देवो भव’ का व्यावहारिक अनुपालन।

पंडित मीमांसक की scholarly methodology — जैसा उनके व्यापक corpus में सामान्य है — मूल Sanskrit मन्त्र, उनका सटीक हिन्दी अनुवाद, तथा प्रत्येक कर्म के पीछे का rigorous shastric तर्क प्रस्तुत करती है।

**आधुनिक adaptations एवं practical guidance** — व्यस्त आधुनिक जीवन-शैली में इन नित्य-कर्मों को कैसे authentic रूप में सम्पन्न किया जाए, इस पर detailed practical सुझाव।

यह ग्रंथ उनकी संक्षिप्त ‘मूलमन्त्र’ पुस्तिका का एक अधिक comprehensive, scholarly-detailed companion है, जो उन साधकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो केवल मन्त्रों की बजाय उनके पीछे के गहन shastric rationale को भी समझना चाहते हैं।

आर्य समाज के गृहस्थ साधकों, नित्य-कर्म-पालन में गहन रुचि रखने वाले परिवारों, कर्मकाण्ड-shastri के अभ्यर्थियों, वैदिक gurukulas के acharyas, तथा प्रत्येक उस dharmic गृहस्थ के लिए जो अपने दैनिक जीवन में authentic वैदिक अनुशासन को comprehensive scholarly समझ के साथ स्थापित करना चाहता है — वैदिक नित्य-कर्म विधि एक अनिवार्य एवं trustworthy मार्गदर्शक है।

ग्रंथ के अंत में पंडित मीमांसक ने कुछ common practical-challenges एवं उनके shastric समाधान भी प्रस्तुत किए हैं — जैसे यात्रा-काल में नित्य-कर्म कैसे सम्पन्न करें, अस्वस्थता के दौरान क्या संक्षिप्त विकल्प अपनाएँ — यह practical FAQ-approach ग्रंथ को दैनिक जीवन की वास्तविकताओं के लिए और अधिक उपयोगी बनाता है।

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