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Vedic Jeevan (Hindi) – by Pt. Vishwanath Vidyalankar | Vedic Lifestyle Guide

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वैदिक जीवन (Vedic Jeevan), पण्डित विश्वनाथ विद्यालंकार द्वारा रचित यह 136 पृष्ठीय हिन्दी ग्रंथ, वैदिक जीवन-दर्शन के आधार पर एक समग्र, comprehensive जीवन-शैली का scholarly किन्तु अत्यंत व्यावहारिक विवेचन प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति आधुनिक गृहस्थ-साधक के लिए वैदिक मूल्यों पर आधारित एक comprehensive जीवन-मार्गदर्शिका है।

‘वैदिक जीवन’ — यह शीर्षक इंगित करता है कि यह ग्रंथ केवल वेद-अध्ययन तक सीमित नहीं, अपितु वैदिक ज्ञान को एक lived experience, एक comprehensive जीवन-शैली के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करता है।

ग्रंथ का प्रथम खण्ड वैदिक जीवन-दर्शन के foundational सिद्धान्तों का परिचय प्रस्तुत करता है — चतुर्विध पुरुषार्थ (धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष), चतुर्विध आश्रम-व्यवस्था (ब्रह्मचर्य-गृहस्थ-वानप्रस्थ-संन्यास), तथा षोडश-संस्कारों का brief overview।

**दिनचर्या का वैदिक framework** — ब्रह्म-मुहूर्त में जागरण, सन्ध्या-वन्दन, अग्निहोत्र, स्वाध्याय, श्रम, भोजन, विश्राम — यह दैनिक schedule कैसे शरीर, मन, एवं आत्मा — तीनों के स्वास्थ्य की रक्षा करता है।

**पञ्च-महायज्ञों का व्यावहारिक विवेचन** — ब्रह्म-यज्ञ, देव-यज्ञ, पितृ-यज्ञ, भूत-यज्ञ, मनुष्य-यज्ञ — यह पाँच दैनिक कर्तव्य वैदिक गृहस्थ-जीवन की comprehensive dharmic संरचना कैसे प्रस्तुत करते हैं।

**पारिवारिक जीवन का वैदिक दर्शन** — विवाह की गरिमा, पति-पत्नी के पारस्परिक कर्तव्य, सन्तान-पालन एवं संस्कार, वृद्ध माता-पिता के प्रति उत्तरदायित्व — यह सब वैदिक framework में विवेचित।

**आर्थिक जीवन के वैदिक सिद्धान्त** — धन-अर्जन के dharmic मार्ग, संयमित उपभोग, दान का महत्त्व, तथा सामाजिक जिम्मेदारी।

**स्वास्थ्य एवं आयुर्वेदीय जीवन-शैली** — सात्त्विक आहार, योग-प्राणायाम, तथा वैदिक स्वास्थ्य-सिद्धान्तों का व्यावहारिक विवेचन।

**सामाजिक जीवन एवं नागरिक कर्तव्य** — समाज के प्रति उत्तरदायित्व, सत्संग का महत्त्व, तथा सामाजिक सद्भाव के वैदिक मूल्य।

**आध्यात्मिक साधना का दैनिक अभ्यास** — नियमित उपासना, ध्यान, वेद-स्वाध्याय — यह चतुर्विध साधना-पथ किस प्रकार वैदिक जीवन का अभिन्न अंग है।

पण्डित विश्वनाथ विद्यालंकार की writing-शैली — जो एक प्रखर वैदिक scholar (जिन्होंने अथर्ववेद-भाष्य जैसे विशाल कार्य भी किए हैं) के अनुरूप — scholarly depth एवं practical accessibility का संतुलन प्रस्तुत करती है।

136 पृष्ठीय comprehensive किन्तु सुगम आयाम इसे व्यापक readership के लिए उपयोगी बनाता है।

गृहस्थ-साधकों, आधुनिक जीवन में वैदिक मूल्यों को integrate करने के इच्छुक पाठकों, आर्य समाज के साधकों, युवा-वर्ग जो एक meaningful जीवन-दिशा खोज रहे हैं, तथा प्रत्येक उस सुधी पाठक के लिए जो वैदिक जीवन-दर्शन को अपने दैनिक जीवन में एक comprehensive, व्यावहारिक जीवन-शैली के रूप में अपनाना चाहता है — वैदिक जीवन एक trustworthy एवं मूल्यवान मार्गदर्शक है।

पण्डित विश्वनाथ विद्यालंकार ने ग्रंथ के अंत में एक practical self-assessment checklist भी प्रदान की है, जो पाठक को अपने वर्तमान जीवन में वैदिक मूल्यों के integration का आकलन करने में सहायक है, तथा धीरे-धीरे इस समग्र जीवन-शैली को अपनाने के लिए एक gradual, sustainable roadmap प्रस्तुत करती है।

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