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Vedartha-Bhumika Hindi Edition – by Swami Dayanand Saraswati | Veda Interpretation Methodology

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वेदार्थ-भूमिका (हिन्दी) — Vedartha-Bhumika (Hindi), महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा रचित यह 127 पृष्ठीय हिन्दी ग्रंथ, वेद-अर्थ-निर्धारण की foundational methodology का एक हिन्दी संस्करण प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति महर्षि की प्रसिद्ध ‘ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका’ के सिद्धान्तों का एक अधिक accessible, हिन्दी-माध्यम प्रस्तुतीकरण है।

‘वेदार्थ-भूमिका’ — ‘वेद के अर्थ की भूमिका (प्रस्तावना/आधार)’ — यह ग्रंथ वेद-व्याख्यान की मूल पद्धति को स्थापित करता है, जो महर्षि के समस्त वेद-भाष्य-कार्य का theoretical foundation है।

ग्रंथ का प्रथम खण्ड वेदों के स्वरूप-निरूपण को समर्पित है — वेद अपौरुषेय क्यों हैं, उनकी eternal authority का shastric एवं logical आधार, तथा ‘वेदोऽखिलो धर्ममूलम्’ का सिद्धान्त।

**निरुक्त-आधारित व्याख्यान-पद्धति** — महर्षि की central methodology — वेद-शब्दों के pौराणिक anthropomorphic अर्थों के बजाय उनके मूल यौगिक (etymological) अर्थों को प्राथमिकता — का हिन्दी में सुगम विवेचन। ‘इन्द्र’ का अर्थ इन्द्रियों का स्वामी परमात्मा, ‘अग्नि’ का अर्थ ज्ञान-प्रकाशक तत्त्व — यह illustrative उदाहरण।

**सायण-भाष्य से मतभेद** — महर्षि की कुछ specific interpretive disagreements सायणाचार्य के classical भाष्य से — का संक्षिप्त हिन्दी विवेचन, जो पाठक को दोनों approaches के बीच अंतर समझने में सहायक है।

**वेद-मन्त्रों के बहु-स्तरीय अर्थ** — आधिदैविक, आधिभौतिक, आध्यात्मिक — इन तीन स्तरों पर मन्त्र-अर्थ-निर्धारण की methodology, illustrative उदाहरणों के साथ।

**वेदाङ्गों की भूमिका** — शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष — इन षड्-वेदाङ्गों की वेद-व्याख्यान में क्या भूमिका है, इसका संक्षिप्त हिन्दी परिचय।

**ईश्वर-तत्त्व का प्रारम्भिक निरूपण** — वैदिक एकेश्वरवाद का foundational परिचय, जो आगे की comprehensive discussion (जैसा ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका में विस्तृत है) का संक्षिप्त foundation प्रस्तुत करता है।

यह हिन्दी संस्करण विशेष रूप से उन पाठकों के लिए designed है जो Sanskrit में सुविज्ञ नहीं हैं, किन्तु महर्षि की वेद-व्याख्यान-methodology को समझना चाहते हैं — यह एक accessible entry-point प्रदान करता है, जो आगे विस्तृत scholarly अध्ययन (जैसे मूल Sanskrit भूमिका अथवा भूमिकाभास्कर जैसी विस्तृत commentaries) की ओर मार्गदर्शन कर सकता है।

127 पृष्ठीय comprehensive किन्तु accessible आयाम इसे व्यापक readership के लिए उपयुक्त बनाता है।

आर्य समाज के साधकों, वेद-अध्ययन के नए विद्यार्थियों, हिन्दी-माध्यम पाठकों जो Vedic-hermeneutics में रुचि रखते हैं, तथा प्रत्येक उस सुधी जिज्ञासु के लिए जो महर्षि दयानन्द की वेद-व्याख्यान-पद्धति का एक सुगम हिन्दी परिचय चाहता है — वेदार्थ-भूमिका (हिन्दी) एक मूल्यवान foundational संसाधन है।

यह हिन्दी संस्करण विशेष रूप से आर्य समाज के grassroots-level प्रचार-कार्य के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ है, जहाँ सामान्य हिन्दी-भाषी गृहस्थ भी महर्षि के core hermeneutical सिद्धान्तों से परिचित हो सकते हैं, बिना Sanskrit की technical जटिलताओं में उलझे। यह accessibility-focused approach महर्षि के अपने civilisational mission — वेद-ज्ञान को व्यापक जन-समुदाय तक पहुँचाना — के अनुरूप है, जो इस ग्रंथ को आर्य समाज के प्रचार-साहित्य का एक मूल्यवान अंग बनाता है। इस प्रकार यह ग्रंथ scholarly गहराई एवं जन-सुलभता — दोनों का एक सुन्दर संतुलन प्रस्तुत करता है।

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