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Uru-Jyoti – Vaidik Adhyatma-Sudha (Hindi) – by Shri Vasudev Sharan Agrawal | Vedic Spirituality Study

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उरु-ज्योति: वैदिक अध्यात्म-सुधा (Uru-Jyoti: Vaidik Adhyatma-Sudha), विख्यात् विद्वान् श्री वासुदेव शरण अग्रवाल द्वारा रचित यह हिन्दी ग्रंथ, वैदिक आध्यात्मिकता की व्यापक, प्रकाशमान (उरु-ज्योति) गहराई का एक scholarly किन्तु काव्यात्मक-आध्यात्मिक विवेचन प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति एक renowned भारतीय संस्कृति-विद्वान् की दृष्टि से वैदिक अध्यात्म का एक अनुपम परिचय प्रस्तुत करती है।

श्री वासुदेव शरण अग्रवाल — भारतीय कला, संस्कृति, तथा पुरातत्त्व के एक प्रतिष्ठित विद्वान्, जिनका कार्य केवल religious-studies तक सीमित नहीं अपितु व्यापक भारतीय civilisational अध्ययन तक विस्तृत है — इस ग्रंथ में वैदिक आध्यात्मिकता को एक व्यापक सांस्कृतिक-दार्शनिक परिप्रेक्ष्य से प्रस्तुत करते हैं।

‘उरु-ज्योति’ — ‘व्यापक प्रकाश’ — तथा ‘अध्यात्म-सुधा’ — ‘आध्यात्मिक अमृत’ — यह द्विविध शीर्षक ग्रंथ की central vision को इंगित करता है: वैदिक अध्यात्म एक व्यापक, सर्व-प्रकाशमान ज्ञान-स्रोत है, जो साधक को अमृत-तुल्य आध्यात्मिक तृप्ति प्रदान करता है।

ग्रंथ के विविध अध्याय वैदिक अध्यात्म के various आयामों को cover करते हैं — ईश्वर-तत्त्व का वैदिक दर्शन, आत्मा-ब्रह्म का सम्बन्ध, यज्ञ-संस्कृति का आध्यात्मिक अर्थ, तथा वैदिक ऋषियों की मौलिक spiritual insight।

**वैदिक symbolism का scholarly विवेचन** — श्री अग्रवाल की विशेषज्ञता कला एवं संस्कृति में होने के कारण, वे वैदिक mantras में निहित symbolic, artistic, तथा cultural dimensions को विशेष रूप से गहराई से explore करते हैं — जैसे अग्नि, सूर्य, जल जैसे तत्त्वों का symbolic-spiritual significance।

**वैदिक ऋषियों की creative spirituality** — कैसे वैदिक ऋषियों ने अपने गहन आध्यात्मिक अनुभवों को काव्यात्मक मन्त्रों के रूप में अभिव्यक्त किया, यह literary-spiritual creativity का scholarly विवेचन।

**यज्ञ का सांस्कृतिक-आध्यात्मिक विश्लेषण** — यज्ञ-कर्म को केवल ritualistic exercise नहीं, अपितु एक profound cultural-spiritual synthesis के रूप में explore करने वाला दृष्टिकोण, जो cosmic order एवं मानव-जीवन के बीच harmony स्थापित करता है।

**Comparative सांस्कृतिक दृष्टिकोण** — वैदिक अध्यात्म की तुलना अन्य प्राचीन सभ्यताओं की spiritual traditions से, जो व्यापक comparative civilisational अध्ययन का एक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

श्री अग्रवाल की writing-शैली scholarly rigor, काव्यात्मक sensibility, तथा गहन सांस्कृतिक अंतर्दृष्टि का अनुपम संगम प्रस्तुत करती है, जो इस ग्रंथ को अन्य purely-religious वैदिक-अध्ययनों से distinguished बनाती है।

आध्यात्मिक जिज्ञासुओं, भारतीय संस्कृति एवं कला के अध्येताओं, वैदिक साहित्य के researchers, comparative civilisational studies में रुचि रखने वाले पाठकों, तथा प्रत्येक उस सुधी पाठक के लिए जो वैदिक अध्यात्म को एक व्यापक सांस्कृतिक-दार्शनिक परिप्रेक्ष्य से समझना चाहता है — उरु-ज्योति: वैदिक अध्यात्म-सुधा एक अनुपम एवं मूल्यवान संसाधन है। श्री अग्रवाल की यह कृति इस प्रकार वैदिक अध्ययन को केवल religious-scholarship से आगे, एक व्यापक civilisational-humanities discourse से जोड़ती है, जो पाठक को वेदों की बहु-आयामी richness का समग्र अनुभव प्रदान करती है।

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