Shree Vaman Puran – Sachitra (Hindi–Sanskrit) | Gita Press Gorakhpur

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श्रीवामनपुराण अष्टादश महापुराणों में एक महत्त्वपूर्ण वैष्णव पुराण है, जिसमें भगवान विष्णु के पंचम अवतार भगवान वामन की लीला, बलि-दान तथा त्रिविक्रम-स्वरूप की महिमा का विस्तृत एवं रोचक वर्णन प्राप्त होता है। गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित यह सचित्र संस्करण मूल संस्कृत श्लोकों के साथ सरल हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत करता है, जिससे पाठक इस गूढ़ पौराणिक ग्रन्थ के भावार्थ को सहजता से समझ सके। वामनपुराण में भगवान वामन के द्वारा राजा बलि से त्रिपाद भूमि माँगने तथा अपने विराट त्रिविक्रम-स्वरूप से तीनों लोकों को माप लेने की अद्भुत कथा के साथ-साथ शिव-पार्वती विवाह, कार्तिकेय-जन्म तथा अनेक तीर्थ-माहात्म्य का भी विस्तृत वर्णन सम्मिलित है। इस ग्रन्थ की विशेष महत्ता यह है कि यह शैव एवं वैष्णव दोनों परम्पराओं का समन्वयकारी वर्णन प्रस्तुत करता है, जिससे यह भारतीय पौराणिक साहित्य में एक विशिष्ट स्थान रखता है। बलि-दान की कथा त्याग, दान तथा भक्ति के आदर्श को प्रतिष्ठित करती है, जो आज भी भारतीय संस्कृति में वामन-द्वादशी तथा ओणम जैसे पर्वों के माध्यम से स्मरण किया जाता है। गीता प्रेस की यह परम्परा शुद्ध पाठ, त्रुटिहीन मुद्रण तथा सुगम भाषा-शैली के लिए विश्वभर में विश्वसनीय मानी जाती है। सचित्र प्रस्तुति इस संस्करण की विशेष पहचान है—वामन-अवतार तथा त्रिविक्रम-स्वरूप के चित्र पाठक को कथा के दिव्य स्वरूप को समझने में सहायता करते हैं। दक्षिण भारत में ओणम-पर्व के अवसर पर इस ग्रन्थ की कथा का विशेष महत्त्व माना जाता है, जिससे यह ग्रन्थ क्षेत्रीय सांस्कृतिक परम्पराओं के अध्येताओं के लिए भी उपयोगी सिद्ध होता है। भगवान विष्णु के दशावतार-सिद्धान्त के क्रमबद्ध अध्ययन में वामन-अवतार एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है, जिसे यह ग्रन्थ विस्तार से प्रस्तुत करता है। दान-महिमा तथा त्याग के सिद्धान्त को समझने के इच्छुक पाठकों के लिए यह ग्रन्थ एक प्रेरक सन्दर्भ-स्रोत प्रदान करता है। वामन-द्वादशी तथा अन्य वैष्णव पर्वों पर इस ग्रन्थ का पाठ विशेष पुण्यदायी माना जाता है। कथावाचकों तथा पुरोहितों के लिए भी यह ग्रन्थ प्रवचन-सामग्री के रूप में अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होता है। भारतीय पुराण-साहित्य तथा अवतार-सिद्धान्त के गम्भीर अध्येताओं के लिए यह ग्रन्थ एक अनिवार्य सन्दर्भ-स्रोत है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से गीता प्रेस का यह प्रामाणिक सचित्र वामनपुराण श्रद्धालुओं तथा अध्येताओं तक सुरक्षित पैकेजिंग सहित सुगमता से पहुँचाया जाता है, जिससे भगवान वामन की यह अद्भुत एवं प्रेरक गाथा घर-घर तक संचरित हो सके और त्याग एवं दान के शाश्वत सिद्धान्त जीवन्त बने रहें। दक्षिण भारत, विशेष रूप से केरल में ओणम-पर्व के अवसर पर महाबली तथा वामन-अवतार की कथा का विशेष वर्णन किया जाता है, जिससे यह ग्रन्थ क्षेत्रीय सांस्कृतिक अध्ययन की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण बन जाता है। विद्यालयों में भी दान एवं त्याग के नैतिक मूल्यों को सिखाने हेतु बलि-वामन कथा का उपयोग किया जाता है। धार्मिक कथावाचक इस ग्रन्थ को प्रवचन के दौरान दान-महिमा स्पष्ट करने हेतु विशेष रूप से उद्धृत करते हैं। परिवार में बालकों को त्याग एवं विनम्रता के संस्कार देने हेतु भी यह कथा अत्यन्त उपयोगी मानी जाती है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से यह प्रामाणिक सचित्र संस्करण सुरक्षित पैकेजिंग सहित श्रद्धालुओं तथा अध्येताओं तक पहुँचाया जाता है। भारतीय दर्शन में विनम्रता तथा अहंकार-त्याग के सिद्धान्त को समझने हेतु भी वामन-अवतार की कथा एक प्रतीकात्मक दृष्टान्त प्रस्तुत करती है, जिसका सन्दर्भ अनेक आध्यात्मिक प्रवचनों में दिया जाता है। भारतीय शिल्पकला तथा मन्दिर-स्थापत्य में त्रिविक्रम-स्वरूप की प्रतिमाएँ अनेक प्राचीन मन्दिरों में स्थापित मिलती हैं, जिससे यह ग्रन्थ कला-इतिहासकारों के लिए भी एक सन्दर्भ-स्रोत प्रदान करता है। परिवार में दान-धर्म की भावना को सुदृढ़ करने हेतु अभिभावक इस कथा का विशेष रूप से उल्लेख करते हैं। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से मंगवाया गया यह संस्करण सुरक्षित पैकेजिंग के साथ समयबद्ध रूप से श्रद्धालुओं तक पहुँचाया जाता है।
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