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Shree Ling Mahapuran – Sachitra (Hindi–Sanskrit) | Gita Press Gorakhpur

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श्री लिंगमहापुराण (सचित्र सरल व्याख्या सहित) अष्टादश महापुराणों में से एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण शैव पुराण है, जिसमें शिवलिंग की उत्पत्ति, महिमा तथा उसके पूजन से प्राप्त होने वाले आध्यात्मिक एवं लौकिक फलों का विस्तृत वर्णन किया गया है। गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित यह संस्करण सचित्र स्वरूप में प्रस्तुत है, जिसमें सरल व्याख्या के माध्यम से कठिन पौराणिक प्रसंगों एवं दार्शनिक सिद्धान्तों को सुबोध हिन्दी भाषा में समझाया गया है, जिससे सामान्य पाठक भी इस गूढ़ ग्रन्थ का सहजता से रसास्वादन कर सके। लिंगपुराण में सृष्टि-उत्पत्ति, कल्प-विभाजन, मनु-वंश-वर्णन, तथा शिव के विभिन्न रूपों एवं लीलाओं का सुव्यवस्थित वर्णन प्राप्त होता है। इसमें विशेष रूप से शिव-विष्णु की एकता, त्रिमूर्ति-सिद्धान्त तथा ज्योतिर्लिंगों की उत्पत्ति-कथा का विस्तृत विवरण मिलता है, जो शैव-वैष्णव समन्वय की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। ग्रन्थ में शिव-पूजन-विधि, रुद्राक्ष-माहात्म्य, शिवरात्रि-व्रत कथा तथा पंचाक्षर मन्त्र की साधना-पद्धति का भी विस्तृत वर्णन है, जो गृहस्थ साधकों के लिए अत्यन्त उपयोगी है। सचित्र प्रस्तुति इस संस्करण की विशेष पहचान है—प्रत्येक प्रमुख प्रसंग के साथ दिए गए सुन्दर चित्र पाठक को कथा के दृश्य-स्वरूप को समझने में सहायता करते हैं, जिससे यह ग्रन्थ बालकों एवं नवीन पाठकों के लिए भी सुगम बन जाता है। गीता प्रेस की यह परम्परा शुद्ध पाठ, त्रुटिहीन मुद्रण तथा सरल भाषा-शैली के लिए विश्वभर में विश्वसनीय मानी जाती है। लिंगमहापुराण भारतीय मूर्तिकला, मन्दिर-स्थापत्य तथा तीर्थ-परम्परा के अध्ययन हेतु भी एक अमूल्य स्रोत है, क्योंकि इसमें वर्णित शिवलिंग-स्वरूप एवं पूजन-विधि भारत के अनेक प्रसिद्ध शिव-मन्दिरों की स्थापना-कथाओं का आधार बनी हैं। शिवरात्रि, सावन मास तथा प्रदोष-व्रत के अवसर पर इस ग्रन्थ का पाठ विशेष पुण्यदायी माना जाता है, और अनेक शिव-भक्त परिवार नित्य स्वाध्याय हेतु इसे अपने घर में सुरक्षित रखते हैं। धार्मिक कथावाचकों तथा पुरोहितों के लिए भी यह ग्रन्थ प्रवचन एवं कथा-वर्णन हेतु एक प्रामाणिक सन्दर्भ-स्रोत का कार्य करता है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से गीता प्रेस का यह प्रामाणिक सचित्र संस्करण श्रद्धालुओं तथा अध्येताओं तक सहजता से उपलब्ध हो सकेगा। यह सचित्र संस्करण विशेष रूप से उन परिवारों के लिए उपयुक्त है जहाँ बालक-बालिकाएँ पौराणिक कथाओं को चित्रों के माध्यम से सहजता से समझना चाहते हैं। शिव-मन्दिरों के पुजारी तथा कथावाचक इस ग्रन्थ को प्रवचन हेतु विशेष रूप से उपयोग में लाते हैं, क्योंकि इसमें वर्णित प्रसंग सरल भाषा में होने के कारण श्रोताओं तक सहजता से सम्प्रेषित हो जाते हैं। गीता प्रेस की स्पष्ट मुद्रण-गुणवत्ता तथा सुन्दर चित्रांकन इस संस्करण को धार्मिक पुस्तकालयों तथा पारिवारिक संग्रह हेतु एक आदर्श चयन बनाता है। शिव-पुराण-साहित्य के तुलनात्मक अध्येताओं के लिए यह लिंगपुराण-संस्करण विशेष महत्त्व रखता है, क्योंकि इसमें शिव-विष्णु एकता का सिद्धान्त अन्य पुराणों की तुलना में अधिक विस्तार से प्रतिपादित हुआ है। मन्दिर-स्थापत्य एवं मूर्तिकला के शोधार्थी भी इस ग्रन्थ को प्रामाणिक सन्दर्भ-स्रोत मानते हैं। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से गीता प्रेस का यह सचित्र संस्करण सुरक्षित पैकेजिंग सहित श्रद्धालुओं तक पहुँचाया जाता है, जिससे चित्रों की गुणवत्ता भी अक्षुण्ण बनी रहे। शिव-भक्त परिवारों में यह ग्रन्थ पीढ़ियों तक संरक्षित रखे जाने वाले पारिवारिक धार्मिक संग्रह का अभिन्न अंग बनता है। इस ग्रन्थ के माध्यम से पाठक शिव-तत्त्व की उस गहनता को समझ सकते हैं जो केवल कथा-श्रवण से नहीं अपितु निरन्तर स्वाध्याय एवं चिन्तन से ही प्राप्त होती है, जिससे यह संस्करण दीर्घकालिक आध्यात्मिक साधना हेतु उपयुक्त सिद्ध होता है। दक्षिण भारत के ज्योतिर्लिंग-तीर्थों की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु भी यात्रा-पूर्व इस ग्रन्थ का पाठ कर तीर्थ-माहात्म्य को समझने का प्रयास करते हैं, जिससे यह ग्रन्थ तीर्थ-यात्रा-साहित्य की दृष्टि से भी उपयोगी बनता है। भारतीय पुराण-साहित्य के संग्रहकर्ता तथा ग्रन्थालय इस सचित्र संस्करण को अपने संग्रह में सम्मिलित करना विशेष गौरव की बात मानते हैं, क्योंकि चित्रांकन सहित शुद्ध पाठ दुर्लभ होता जा रहा है। यह ग्रन्थ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मूल्यवान सांस्कृतिक धरोहर सिद्ध होगा।

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