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Shrautyajno Ka Sankshipt Parichay (Hindi) – by Pt. Yudhishthir Mimansak | Vedic Shrauta Yajna Introduction

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श्रौत्यज्ञों का संक्षिप्त परिचय (Shrautyajno Ka Sankshipt Parichay), पंडित युधिष्ठिर मीमांसक द्वारा रचित यह हिन्दी scholarly ग्रंथ, वैदिक श्रौत-यज्ञ-परम्परा का एक संक्षिप्त, accessible, तथा systematic परिचय प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति श्रौत-कर्मकाण्ड के नए अध्येताओं के लिए एक ideal, compact entry-point है, जो उनके तथा डॉ. विजयपाल विद्यावारिधि के संयुक्त, अधिक विस्तृत ‘श्रौत यज्ञों का संक्षिप्त परिचय’ ग्रंथ का एक स्वतंत्र, focused संस्करण प्रतीत होता है।

**श्रौत-यज्ञ** — Vedic ritualistic tradition का सर्वाधिक elaborate वर्ग — public, community-based यज्ञ जो श्रौत-सूत्रों में विधानबद्ध हैं। पंडित मीमांसक इस संक्षिप्त परिचय में इस विशाल एवं जटिल परम्परा का एक सुगम overview प्रस्तुत करते हैं।

ग्रंथ की संरचना श्रौत-यज्ञों की foundational classification से आरम्भ होती है — इष्टि-यज्ञ, पशु-यज्ञ, सोम-यज्ञ, तथा महायज्ञ — यह चतुर्विध वर्गीकरण, संक्षिप्त परिचयात्मक विवरण के साथ।

**अग्नि-आधान का संक्षिप्त परिचय** — त्रेताग्नि की स्थापना, जो श्रौत-यज्ञ-यजमान बनने का प्रारम्भिक कदम है।

**दर्श-पूर्णमास का परिचय** — मासिक obligatory यज्ञों का संक्षिप्त विवरण।

**अग्निष्टोम का परिचय** — foundational सोम-यज्ञ की मूल संरचना एवं महत्त्व का brief overview।

**महायज्ञों का संक्षिप्त परिचय** — राजसूय, अश्वमेध जैसे imperial-scale यज्ञों का brief historical-cultural significance।

**ऋत्विजों की भूमिका** — होता, अध्वर्यु, उद्गाता, ब्रह्मा — चार प्रमुख ऋत्विज-वर्गों का संक्षिप्त परिचय।

पंडित मीमांसक की writing-शैली यहाँ विशेष रूप से concise एवं accessible है, जो एक quick, foundational overview प्रदान करने पर केन्द्रित है, बिना अत्यधिक technical detail में उलझे।

यह ग्रंथ विशेष रूप से उन नए विद्यार्थियों के लिए designed है जिन्हें श्रौत-यज्ञ-परम्परा का एक त्वरित, प्रामाणिक परिचय चाहिए, इससे पूर्व कि वे अधिक विस्तृत, comprehensive treatises (जैसे उनकी अन्य विस्तृत कृतियाँ) के अध्ययन की ओर अग्रसर हों।

Vedic कर्मकाण्ड के नए विद्यार्थियों, वैदिक gurukulas के students, संस्कृत-कर्मकाण्ड-shastri के प्रारम्भिक अभ्यर्थियों, comparative religion के researchers, तथा प्रत्येक उस सुधी जिज्ञासु के लिए जो श्रौत-यज्ञ-परम्परा का एक संक्षिप्त, foundational, accessible परिचय चाहता है — श्रौत्यज्ञों का संक्षिप्त परिचय एक ideal प्रारम्भिक scholarly संसाधन है।

यह संक्षिप्त परिचय एक ऐसे “gateway text” के रूप में कार्य करता है जो पाठक की जिज्ञासा को जागृत करता है, तथा उन्हें आगे विस्तृत, comprehensive scholarly treatises की ओर मार्गदर्शन प्रदान करता है, जहाँ वे प्रत्येक विशिष्ट यज्ञ का गहन अध्ययन कर सकते हैं। यह educational-progression-approach पंडित मीमांसक की व्यापक शिक्षण-दर्शन का एक प्रतिबिम्ब है, जो complexity को क्रमिक, systematic चरणों में प्रस्तुत करने में विश्वास रखती है।

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