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Shrauta Yajnon Ka Sankshipt Parichay (Hindi) – by Yudhishthir Mimansak & Vijaypal Vidyavaridhi | Vedic Shrauta Yajna Guide

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श्रौत यज्ञों का संक्षिप्त परिचय (Shrauta Yajnon Ka Sankshipt Parichay), पंडित युधिष्ठिर मीमांसक तथा डॉ. विजयपाल विद्यावारिधि द्वारा संयुक्त रूप से रचित यह 256 पृष्ठीय हिन्दी scholarly ग्रंथ, वैदिक श्रौत-यज्ञ-परम्परा के सम्पूर्ण spectrum का एक comprehensive, accessible, तथा systematic परिचय प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति श्रौत-कर्मकाण्ड के नए एवं intermediate अध्येताओं के लिए एक ideal entry-point है।

**श्रौत-यज्ञ** — Vedic ritualistic tradition का सर्वाधिक elaborate एवं sophisticated वर्ग — public, community-based यज्ञ जो श्रौत-सूत्रों (आश्वलायन, बौधायन, कात्यायन, आदि) में विधानबद्ध हैं। यह गृह्य-यज्ञों (private, family-based) से भिन्न, अधिक जटिल, multi-priest, तथा elaborate-preparation-आवश्यक हैं।

यह दोनों विद्वान् लेखक — पंडित मीमांसक (व्याकरण एवं वैदिक शास्त्रों के प्रकाण्ड विद्वान्) तथा डॉ. विजयपाल विद्यावारिधि (जिन्होंने अनेक श्रौत-सूत्रों का स्वयं सम्पादन किया है) — ने अपनी संयुक्त विद्वत्ता से इस comprehensive परिचय-ग्रंथ का निर्माण किया है।

ग्रंथ का प्रथम खण्ड श्रौत-यज्ञों की foundational classification प्रस्तुत करता है — **इष्टि-यज्ञ** (सरल, दर्श-पूर्णमास जैसे), **पशु-यज्ञ**, **सोम-यज्ञ** (अग्निष्टोम जैसे complex सोम-आधारित यज्ञ), तथा **महायज्ञ** (राजसूय, अश्वमेध जैसे imperial-scale यज्ञ)।

**अग्नि-आधान** — त्रेताग्नि (गार्हपत्य, आहवनीय, दक्षिणाग्नि) की स्थापना — श्रौत-यज्ञ-यजमान बनने का प्रारम्भिक अनिवार्य कदम — का विस्तृत परिचय।

**दर्श-पूर्णमास** — मासिक obligatory यज्ञों का विवेचन, जो अन्य higher यज्ञों के qualifying prerequisites हैं।

**अग्निष्टोम** — foundational सोम-यज्ञ — का परिचय, इसकी complex multi-day procedure, आवश्यक ऋत्विजों की संख्या (16), तथा सोम-रस के ritualistic-spiritual significance का विवेचन।

**राजसूय एवं अश्वमेध** — imperial-scale यज्ञों का परिचय — इनका राजनीतिक-सामाजिक-आध्यात्मिक significance, तथा ऐतिहासिक उदाहरण।

**अग्निचयन** — वेदी-निर्माण की जटिल यज्ञ-प्रक्रिया का brief परिचय, जो शतपथ ब्राह्मण में विस्तार से वर्णित है।

**ऋत्विजों की भूमिका** — होता, अध्वर्यु, उद्गाता, ब्रह्मा — चार प्रमुख ऋत्विज-वर्गों तथा उनके सहायकों की भूमिकाओं का systematic परिचय।

लेखक-द्वय की scholarly methodology — यह ग्रंथ न तो अत्यंत technical है (जो नए readers को overwhelm करे), न ही अत्यंत superficial (जो scholarly depth खो दे) — यह एक balanced, accessible-yet-authoritative introduction प्रस्तुत करता है।

256 पृष्ठीय comprehensive आयाम श्रौत-यज्ञों की विविधता को appropriately cover करता है, बिना किसी single-यज्ञ में अत्यधिक गहराई में जाए।

Vedic कर्मकाण्ड के नए विद्यार्थियों, वैदिक gurukulas के students, संस्कृत-कर्मकाण्ड-shastri के प्रारम्भिक अभ्यर्थियों, comparative religion के researchers, तथा प्रत्येक उस सुधी जिज्ञासु के लिए जो श्रौत-यज्ञ-परम्परा के सम्पूर्ण spectrum का एक accessible, authoritative परिचय चाहता है — श्रौत यज्ञों का संक्षिप्त परिचय एक ideal प्रारम्भिक-cum-comprehensive scholarly संसाधन है।

लेखक-द्वय ने ग्रंथ के अंत में एक glossary एवं quick-reference-chart भी प्रदान किया है, जो विभिन्न श्रौत-यज्ञों के नामों, उनकी complexity-levels, तथा उनकी आवश्यक अवधि का tabular सारांश प्रस्तुत करता है। यह practical reference-tool नए विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जो श्रौत-यज्ञों की विशाल विविधता में अपनी दिशा तय करना चाहते हैं, तथा यह उन्हें आगे विस्तृत specialized अध्ययन (जैसे विशिष्ट श्रौत-सूत्रों) की ओर एक सुगम मार्ग प्रदान करता है। यह ग्रंथ इस प्रकार श्रौत-अध्ययन की दिशा में एक भरोसेमंद प्रथम कदम प्रस्तुत करता है।

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