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Saralarth Sandhya Agnihotra Vidhi (Hindi) – Arya Samaj Publication | Easy Sandhya Vandan Guide

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सरलार्थ सन्ध्या-अग्निहोत्र-विधि (Saralarth Sandhya Agnihotra Vidhi), आर्य समाज प्रकाशन द्वारा तैयार यह 104 पृष्ठीय हिन्दी ग्रंथ, गृहस्थ आर्य साधक के दैनिक सन्ध्या-वन्दन एवं अग्निहोत्र की एक ‘सरल-अर्थ’ (सुगम अर्थ-सहित) व्यावहारिक विधि प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति आम गृहस्थ के लिए वैदिक दैनिक-उपासना-पद्धति की सर्वाधिक accessible मार्गदर्शिका है।

‘सरलार्थ’ — यह शीर्षक स्वयं ग्रंथ की central pedagogical approach को इंगित करता है। जबकि अन्य scholarly संस्करण मुख्यतः Sanskrit-केन्द्रित हैं, यह ग्रंथ विशेष रूप से आम हिन्दी-भाषी गृहस्थ को ध्यान में रख कर तैयार किया गया है, जो मन्त्रों के अर्थ को समझते हुए सन्ध्या-अग्निहोत्र सम्पन्न करना चाहते हैं, न कि केवल यांत्रिक रूप से मन्त्रोच्चारण करना।

ग्रंथ की संरचना प्रत्येक मन्त्र के लिए त्रिविध प्रस्तुति करती है — मूल Sanskrit पाठ (देवनागरी में), सरल हिन्दी अर्थ, तथा संक्षिप्त उपासना-सम्बन्धी टिप्पणी। यह accessible structure नए साधकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जो अभी वैदिक उपासना-पद्धति सीख रहे हैं।

**त्रिकाल-सन्ध्या** की सम्पूर्ण विधि — प्रातः, मध्याह्न, सायं तीनों समय की सन्ध्या का सरल-अर्थ-सहित विवरण। आचमन, प्राणायाम, मार्जन, अघमर्षण, गायत्री-मन्त्र-जप, तथा उपस्थान — प्रत्येक चरण का सुगम विवरण।

**गायत्री-मन्त्र का सरल अर्थ** — इस केन्द्रीय मन्त्र का शब्दशः, सुगम हिन्दी अनुवाद, जो साधक को समझ के साथ जप करने में सक्षम बनाता है, न कि केवल mechanical repetition।

**अग्निहोत्र-विधि** — दैनिक देव-यज्ञ की सम्पूर्ण procedure, सरल हिन्दी निर्देशों के साथ — अग्नि-प्रज्वलन, आहुति-सामग्री की तैयारी, आहुति-मन्त्रों का क्रम, तथा प्रत्येक मन्त्र का simplified अर्थ।

**Practical tips एवं common errors** — नए साधकों के लिए उपयोगी व्यावहारिक सुझाव, जैसे सामग्री कहाँ से प्राप्त करें, उचित स्थान का चयन कैसे करें, तथा सामान्य त्रुटियों से कैसे बचें।

आर्य समाज प्रकाशन की यह editorial-methodology व्यापक जन-सुलभता को प्राथमिकता देती है — जटिल शास्त्रीय Sanskrit exposition की बजाय, यह ग्रंथ सीधे, actionable, तथा भावनात्मक रूप से जुड़ने वाली भाषा में उपासना-मार्गदर्शन प्रस्तुत करता है।

104 पृष्ठीय आयाम इसे एक comprehensive किन्तु accessible daily-practice-manual बनाता है, जिसे नए एवं अनुभवी दोनों प्रकार के साधक उपयोग कर सकते हैं।

आर्य समाज के नए सदस्यों, गृहस्थ साधकों जो अर्थ-सहित उपासना सीखना चाहते हैं, परिवारों जो अपने बच्चों को सन्ध्या-अग्निहोत्र सिखाना चाहते हैं, तथा प्रत्येक उस dharmic गृहस्थ के लिए जो वैदिक दैनिक-उपासना को समझ एवं भावना के साथ सम्पन्न करना चाहता है — सरलार्थ सन्ध्या-अग्निहोत्र-विधि एक अत्यंत उपयोगी एवं accessible मार्गदर्शक है।

आर्य समाज प्रकाशन की यह पुस्तिका विशेष रूप से उन नए सदस्यों के लिए designed है जो पहली बार वैदिक उपासना-पद्धति सीख रहे हैं, तथा जिन्हें जटिल Sanskrit grammatical analysis की बजाय सीधे, व्यावहारिक मार्गदर्शन की आवश्यकता है। यह accessibility-focused approach आर्य समाज के व्यापक जन-प्रसार-mission के अनुरूप है, जो चाहता है कि वैदिक उपासना केवल पंडितों तक सीमित न रह कर, प्रत्येक साधारण गृहस्थ के लिए सुलभ हो।

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