Sankshipt Skandapuran (Hindi) – Tirtha Mahima | Gita Press Gorakhpur

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संक्षिप्त स्कन्दपुराण भारतीय पुराण-साहित्य के अष्टादश महापुराणों में सर्वाधिक विशाल माने जाने वाले स्कन्दपुराण के सार-तत्त्व को संक्षिप्त, सुव्यवस्थित तथा सुबोध रूप में प्रस्तुत करने वाला गीता प्रेस गोरखपुर का महत्त्वपूर्ण प्रकाशन है। मूल स्कन्दपुराण अपने विशाल आकार तथा अनेक खण्डों के कारण सामान्य पाठक के लिए सम्पूर्ण रूप से अध्ययन करना दुष्कर कार्य है, इसी आवश्यकता की पूर्ति हेतु यह संक्षिप्त संस्करण तैयार किया गया है, जो मूल ग्रन्थ के भावार्थ एवं प्रमुख प्रसंगों को यथावत् सुरक्षित रखते हुए पाठक तक सहजता से पहुँचाता है। इस ग्रन्थ में भगवान कार्तिकेय (स्कन्द) के जन्म, तारकासुर-वध, तीर्थ-महिमा, काशी-माहात्म्य, केदारखण्ड तथा रेवाखण्ड जैसे अनेक प्रमुख प्रसंगों का सारगर्भित वर्णन सम्मिलित किया गया है। तीर्थ-यात्रा, व्रत-कथा तथा दान-महिमा से सम्बन्धित अध्याय इस पुराण की विशेष पहचान है, जो भारतीय तीर्थ-परम्परा के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्त्व को प्रमाणित करते हैं। गीता प्रेस की यह परम्परा शुद्ध पाठ, त्रुटिहीन मुद्रण तथा सुगम भाषा-शैली के लिए सुविख्यात है, जिससे यह संक्षिप्त संस्करण शोधार्थियों से लेकर सामान्य गृहस्थ पाठक तक सभी के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होता है। काशी, केदारनाथ, प्रयाग तथा अन्य प्रमुख तीर्थों की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु इस ग्रन्थ का अध्ययन कर तीर्थ-माहात्म्य तथा यात्रा-विधि को भली-भाँति समझ सकते हैं। स्कन्दपुराण में वर्णित व्रत-कथाएँ तथा दान-विधियाँ गृहस्थ जीवन में धार्मिक अनुष्ठानों के निर्वहन हेतु अत्यन्त उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। भारतीय तीर्थ-स्थलों के ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्त्व के अध्येताओं के लिए भी यह ग्रन्थ एक प्रामाणिक सन्दर्भ-स्रोत है, क्योंकि इसमें वर्णित तीर्थ-कथाएँ भारत के भूगोल एवं संस्कृति की गहन समझ प्रदान करती हैं। कार्तिक, माघ तथा वैशाख मास में तीर्थ-स्नान एवं दान-पुण्य के अवसर पर इस ग्रन्थ का पाठ विशेष पुण्यदायी माना जाता है। कथावाचकों तथा पुरोहितों के लिए भी यह ग्रन्थ प्रवचन एवं कथा-वर्णन हेतु एक सुगम सन्दर्भ-सामग्री प्रदान करता है, जिससे उन्हें विशाल मूल ग्रन्थ में से प्रासंगिक अंश ढूँढने में समय नहीं लगाना पड़ता। गृहस्थ परिवारों में नित्य स्वाध्याय तथा सामूहिक पाठ हेतु भी यह संक्षिप्त संस्करण अत्यन्त लोकप्रिय है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से गीता प्रेस का यह प्रामाणिक संक्षिप्त स्कन्दपुराण श्रद्धालुओं एवं अध्येताओं तक सुरक्षित पैकेजिंग सहित सुगमता से पहुँचाया जाता है। उत्तराखण्ड तथा अन्य हिमालयी तीर्थ-क्षेत्रों की यात्रा-योजना बनाने वाले श्रद्धालु इस ग्रन्थ में वर्णित केदारखण्ड-कथाओं का विशेष रूप से अध्ययन करते हैं, जिससे उन्हें तीर्थ-स्थलों के ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्त्व की गहन जानकारी प्राप्त होती है। धार्मिक पर्यटन-संस्थान तथा तीर्थ-पुरोहित भी इस ग्रन्थ को यात्रियों हेतु सन्दर्भ-सामग्री के रूप में अनुशंसित करते हैं। विद्यालयों में भारतीय भूगोल तथा संस्कृति के पाठ्यक्रम में भी तीर्थ-माहात्म्य से सम्बन्धित अंशों का सन्दर्भ लिया जाता है। गीता प्रेस की यह संक्षिप्त शैली विशाल मूल ग्रन्थ के भारी-भरकम स्वरूप की तुलना में पाठकों के लिए कहीं अधिक सुगम्य एवं सुवाह्य सिद्ध होती है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से यह प्रामाणिक प्रकाशन सुरक्षित पैकेजिंग सहित देशभर के श्रद्धालुओं तक पहुँचाया जाता है। भारतीय पुराण-साहित्य के तुलनात्मक अध्ययन में संलग्न विद्वान इस संक्षिप्त संस्करण का उपयोग मूल स्कन्दपुराण के विशाल स्वरूप के साथ तुलना हेतु प्रारम्भिक सन्दर्भ-सामग्री के रूप में करते हैं। गृह-निर्माण तथा गृहप्रवेश के अवसर पर भी इस ग्रन्थ के कुछ अंशों का पाठ शुभता का प्रतीक माना जाता है। परिवार के वरिष्ठ सदस्य इस ग्रन्थ को नई पीढ़ी को तीर्थ-परम्परा से परिचित कराने हेतु विशेष रूप से उपयोग करते हैं। दान-पुण्य तथा सामाजिक सेवा से जुड़े संगठन भी इस संक्षिप्त ग्रन्थ का वितरण धार्मिक जागरूकता-अभियानों के अन्तर्गत करते हैं। पुस्तकालयों एवं सार्वजनिक वाचनालयों में भी इस संस्करण की माँग निरन्तर बनी रहती है। तीर्थ-महात्म्य के अध्ययन से श्रद्धालुओं में भारत की सांस्कृतिक एवं भौगोलिक विविधता के प्रति गहन सम्मान का भाव विकसित होता है। वेदिकआर्ट्स के माध्यम से मंगवाया गया यह संस्करण सुरक्षित पैकेजिंग के साथ निश्चित समय-सीमा में श्रद्धालुओं तक पहुँचाया जाता है, जिससे ऑनलाइन क्रय का अनुभव भी पूर्णतः सन्तोषजनक सिद्ध होता है।
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Gita Press Gorakhpur| Vedickarts
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