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Sandhyopasan-Agnihotra Vidhi (Sanskrit) – by Dr. Vijaypal Vidyavaridhi | Sandhya Agnihotra Guide

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सन्ध्योपासन-अग्निहोत्राविधिः (Sandhyopasan-Agnihotra-Vidhih), डॉ. विजयपाल विद्यावारिधि द्वारा सम्पादित यह 70 पृष्ठीय Sanskrit scholarly ग्रंथ, गृहस्थ आर्य साधक के दो अनिवार्य दैनिक कर्मों — सन्ध्योपासन (त्रिकाल-सन्ध्या) एवं अग्निहोत्र — की authentic, systematic विधि प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति वैदिक दैनिक-अनुष्ठान-परम्परा का एक प्रामाणिक Sanskrit-मूल ग्रंथ है।

**सन्ध्योपासन** — प्रातः, मध्याह्न, तथा सायं तीनों समय की उपासना — गृहस्थ के दैनिक आध्यात्मिक अनुशासन का central pillar है। डॉ. विजयपाल विद्यावारिधि ने अपने scholarly सम्पादन में इस त्रिकाल-सन्ध्या की सम्पूर्ण authentic Sanskrit-विधि प्रस्तुत की है — आचमन, प्राणायाम, मार्जन, अघमर्षण, गायत्री-जप, उपस्थान — यह सब क्रमबद्ध चरण।

**गायत्री-मन्त्र का scholarly विवेचन** — सन्ध्योपासन का केन्द्रीय मन्त्र, ‘ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्’ — का प्रामाणिक व्याख्यान, इसका etymological अर्थ, तथा इसकी उपासना-methodology।

**प्राणायाम-विधि** — त्रिकाल-सन्ध्या में प्राणायाम की सम्यक् प्रक्रिया — पूरक-कुम्भक-रेचक का क्रम, उचित मात्रा, तथा इसके आध्यात्मिक-शारीरिक लाभ का scholarly विवेचन।

**अग्निहोत्र-विधि** — देव-यज्ञ के रूप में दैनिक अग्निहोत्र की complete procedure। अग्नि-प्रज्वलन की authentic Sanskrit विधि, आवश्यक आहुति-द्रव्य, प्रातः-सायं की विशिष्ट आहुतियाँ, तथा प्रयोज्य मन्त्रों का प्रामाणिक क्रम — ‘अग्नये स्वाहा, अग्नये इदं न मम’ जैसे classical मन्त्र-सूत्र।

**Scientific-spiritual rationale** — अग्निहोत्र के पीछे का rationale भी संक्षिप्त रूप से विवेचित है — वायु-शुद्धीकरण, environmental-purification, तथा सामूहिक कल्याण-भावना का प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति।

डॉ. विद्यावारिधि की editorial methodology strictly authentic Sanskrit-textual-presentation पर आधारित है — मूल मन्त्र, उनका सही उच्चारण-चिह्न (स्वराङ्कन), तथा उनकी sequence का प्रामाणिक प्रस्तुतीकरण, जो purohits एवं गृहस्थ-साधकों दोनों के लिए immediately usable है।

**दैनिक अभ्यास हेतु ready-reference** — यह ग्रंथ विशेष रूप से एक practical daily-ritual-manual के रूप में designed है, जो साधक को बिना अतिरिक्त गुरु-मार्गदर्शन के भी शुद्ध, authentic सन्ध्या-अग्निहोत्र सम्पन्न करने में सक्षम बनाता है।

70 पृष्ठीय compact आयाम इसे दैनिक उपयोग हेतु portable एवं convenient बनाता है।

आर्य समाज के गृहस्थ साधकों, नित्य सन्ध्या-अग्निहोत्र-पालन में रुचि रखने वाले परिवारों, purohitों, वैदिक gurukulas के acharyas एवं students, कर्मकाण्ड-shastri के अभ्यर्थियों, तथा प्रत्येक उस dharmic गृहस्थ के लिए जो अपने दैनिक जीवन में authentic वैदिक सन्ध्या-अग्निहोत्र-अनुष्ठान स्थापित करना चाहता है — सन्ध्योपासन-अग्निहोत्राविधिः एक अनिवार्य एवं trustworthy Sanskrit मार्गदर्शक है।

डॉ. विजयपाल विद्यावारिधि ने ग्रंथ के परिशिष्ट में सामान्य अभ्यास-सम्बन्धी प्रश्नों का भी संक्षिप्त scholarly समाधान प्रस्तुत किया है — जैसे यात्रा-काल में सन्ध्या कैसे सम्पन्न करें, अस्वस्थता के दौरान क्या संक्षिप्त विकल्प अपनाया जाए, तथा आधुनिक शहरी परिवेश में अग्निहोत्र के लिए उपयुक्त स्थान एवं सुरक्षा-सावधानियाँ क्या हों। यह practical FAQ-section ग्रंथ की व्यावहारिक उपयोगिता को समकालीन गृहस्थों के लिए और अधिक बढ़ाता है। इस प्रकार यह ग्रंथ authentic वैदिक अभ्यास एवं आधुनिक व्यावहारिकता के बीच एक सुन्दर संतुलन प्रस्तुत करता है, जो प्रत्येक गृहस्थ के लिए तुरंत उपयोगी सिद्ध होता है। नियमित अभ्यास से यह विधि साधक के जीवन में स्थायी अनुशासन एवं शान्ति स्थापित करती है।

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