Rishi Dayanand – Swalikhit Likhit Janm Charitra (Hindi) – ed. Pt. Bhagwaddatt Ji | Dayanand Birth History

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ऋषि दयानन्द – स्वलिखित, लिखित जन्म चरित्र (Rishi Dayanand – Swalikhit, Likhit Janm Charitra), संपादक पं. भगवद्दत्त जी द्वारा सम्पादित यह हिन्दी ग्रंथ, महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती के जन्म-चरित्र से सम्बन्धित दोनों प्रकार के primary-source दस्तावेज़ों — ‘स्वलिखित’ (स्वयं महर्षि द्वारा लिखित) एवं ‘लिखित’ (अन्य समकालीनों द्वारा लिखित) — का एक comprehensive, scholarly-edited संकलन प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति महर्षि के जीवन-चरित्र के अध्ययन के लिए एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण, historiographically-rigorous संसाधन है।
पं. भगवद्दत्त जी — आधुनिक काल के एक प्रखर इतिहासकार, जिनका ‘भारतीय-प्राचीन-राजनीति’ जैसे अन्य कृतियों में भी योगदान है — ने इस ग्रंथ में महर्षि के जन्म एवं प्रारम्भिक जीवन से सम्बन्धित सभी उपलब्ध primary sources को एकत्रित एवं critically-edited किया है।
**’स्वलिखित’ अंश** — महर्षि के अपने आत्मकथात्मक लेखन से उद्धृत जन्म एवं बाल्यकाल-सम्बन्धी विवरण, जो ‘स्वलिखित आत्मचरित’ के साथ overlap करते हुए भी, इस ग्रंथ में विशेष रूप से जन्म-चरित्र पर केन्द्रित detail प्रस्तुत करता है।
**’लिखित’ अंश** — महर्षि के समकालीनों, शिष्यों, तथा प्रारम्भिक biographers द्वारा दर्ज किए गए जन्म-सम्बन्धी विवरण, जो स्वयं महर्षि के account को supplement एवं cross-verify करते हैं।
**Comparative-critical editorial approach** — पं. भगवद्दत्त जी ने इन दोनों प्रकार के sources को comparative रूप से प्रस्तुत किया है, जहाँ discrepancies अथवा additional details हैं, वहाँ scholarly नोटिंग की गई है, जो एक rigorous historiographical methodology को प्रदर्शित करता है।
**काठियावाड़-टंकारा का ऐतिहासिक context** — महर्षि के जन्म-स्थान एवं तत्कालीन सामाजिक-धार्मिक परिवेश का scholarly विवरण, जो उनके बाल्यकाल की परिस्थितियों को समझने में सहायक है।
**पारिवारिक पृष्ठभूमि का विवेचन** — अम्बाशंकर तिवारी के परिवार, उनकी सामाजिक स्थिति, तथा उनके धार्मिक संस्कारों का scholarly विवरण, जो आगे चलकर बालक मूलशंकर के चरित्र-निर्माण में योगदान देने वाले factors को उजागर करता है।
**शिवरात्रि-प्रसंग का detailed comparative treatment** — यह प्रसिद्ध घटना, जो महर्षि के जीवन का turning-point मानी जाती है, का स्वलिखित एवं लिखित — दोनों sources से comparative विवरण।
यह ग्रंथ इतिहासकारों तथा serious biographical-researchers के लिए विशेष रूप से मूल्यवान है, जो महर्षि के जन्म-चरित्र से सम्बन्धित primary evidence का एक rigorous, critically-edited संकलन चाहते हैं।
आर्य समाज के साधकों, आधुनिक भारतीय इतिहास के researchers, biographical-historiography के अध्येताओं, तथा प्रत्येक उस सुधी पाठक के लिए जो महर्षि दयानन्द के जन्म-चरित्र का एक rigorous, primary-source-based scholarly विवरण चाहता है — यह ग्रंथ एक अमूल्य ऐतिहासिक संसाधन है।
पं. भगवद्दत्त जी की यह editorial-scholarship इस बात का प्रमाण है कि आर्य समाज परम्परा में केवल श्रद्धा-आधारित hagiography ही नहीं, अपितु rigorous, evidence-based historiographical methodology को भी समान महत्त्व दिया जाता है, जो महर्षि दयानन्द के जीवन-चरित्र के अध्ययन को एक ठोस, विश्वसनीय अकादमिक आधार प्रदान करता है।
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