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Rigvedanukramani – Hindi Vyakhya Sahit (Sanskrit–Hindi) – by Dr. Vijaypal Vidyavaridhi | Rigveda Index

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ऋग्वेदानुक्रमणी (हिन्दी व्याख्या सहित) — Rigvedanukramani (Hindi Vyakhya Sahit), डॉ. विजयपाल विद्यावारिधि द्वारा सम्पादित यह Sanskrit-Hindi द्वि-भाषी scholarly ग्रंथ, ऋग्वेद की classical सर्वानुक्रमणी का हिन्दी व्याख्या-सहित एक accessible, scholarly संस्करण प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति उनके पूर्व ‘कात्यायनीय ऋक्सर्वानुक्रमणी’ (Sanskrit-primarily) के समान विषय का एक अधिक accessible, हिन्दी-explained संस्करण है, जो व्यापक readership के लिए ऋग्वेद-index-tradition को सुलभ बनाता है।

**’अनुक्रमणी’** — ऋग्वेद के 1028 सूक्तों एवं 10,552 मन्त्रों की एक systematic catalog — प्रत्येक सूक्त के लिए उसका ऋषि (द्रष्टा), देवता (सम्बोधित), तथा छन्द (metrical structure) का record प्रस्तुत करती है। यह classical Vedic-cataloguing-tradition आचार्य कात्यायन से सम्बद्ध है।

डॉ. विजयपाल विद्यावारिधि ने इस संस्करण में मूल Sanskrit अनुक्रमणी-पाठ के साथ-साथ, प्रत्येक entry की हिन्दी व्याख्या भी प्रदान की है, जो इसे हिन्दी-माध्यम पाठकों के लिए भी सुलभ बनाती है — यह उनके अन्य पूर्ण Sanskrit-focused संस्करण से एक valuable complementary contribution है।

**ऋषि-catalog का हिन्दी-व्याख्या-सहित विवेचन** — प्रजापति, वसिष्ठ, विश्वामित्र, अत्रि, कण्व, गोतम, भरद्वाज, गृत्समद, अगस्त्य, कश्यप जैसे प्रमुख ऋषियों का हिन्दी में परिचय, उनके सूक्तों के साथ।

**देवता-catalog का हिन्दी-व्याख्या-सहित विवेचन** — इन्द्र, अग्नि, वरुण, मित्र, विष्णु, रुद्र जैसे देवताओं का हिन्दी परिचय, उनके सम्बोधित सूक्तों के साथ।

**छन्द-catalog का हिन्दी-व्याख्या-सहित विवेचन** — गायत्री, उष्णिक्, अनुष्टुप्, त्रिष्टुप्, जगती जैसे छन्दों का हिन्दी में systematic विवरण।

**Practical accessibility** — यह हिन्दी-व्याख्या-सहित प्रस्तुति उन researchers, वेद-पाठियों, तथा students के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो Sanskrit में पूर्ण सुविज्ञ नहीं हैं, किन्तु ऋग्वेद की systematic scholarly indexing को समझना चाहते हैं।

डॉ. विद्यावारिधि की editorial methodology मूल Sanskrit text की authenticity को बनाए रखते हुए, additional हिन्दी explanatory layer प्रदान करती है, जो scholarly rigor एवं accessibility — दोनों को समन्वित करती है।

Vedic literature के हिन्दी-माध्यम अध्येताओं, ऋग्वेद के नए विद्यार्थियों, यज्ञ-कर्ता-purohits, वैदिक gurukulas के students, तथा प्रत्येक उस सुधी जिज्ञासु के लिए जो ऋग्वेद के systematic scholarly indexing को हिन्दी व्याख्या के साथ सुगमता से समझना चाहता है — ऋग्वेदानुक्रमणी (हिन्दी व्याख्या सहित) एक मूल्यवान, accessible scholarly संसाधन है।

यह हिन्दी-व्याख्या-सहित संस्करण विशेष रूप से उन gurukulas एवं शिक्षण-संस्थानों के लिए मूल्यवान है, जो अपने students को ऋग्वेद-अध्ययन की प्रारम्भिक अवस्था में ही systematic indexing की समझ प्रदान करना चाहते हैं, बिना उन्हें तुरंत पूर्ण Sanskrit-technical complexity में डाले।

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