Vedic Books
New

Rigved-Parichay (Hindi) – by Pt. Vishwanath Vidyalankar | Rigveda Introduction

60.00
30 people are viewing this right now
Estimated Delivery:
14 - 21 Jul, 2026
payment-processing
Guaranteed safe & secure checkout

Product details

ऋग्वेद-परिचय (Rigved-Parichay), पण्डित विश्वनाथ विद्यालंकार द्वारा रचित यह हिन्दी ग्रंथ, चारों वेदों में सर्वाधिक प्राचीन एवं प्रतिष्ठित — ऋग्वेद — का एक comprehensive, accessible, तथा scholarly परिचय प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति ऋग्वेद के नए अध्येताओं के लिए एक ideal, foundational entry-point है।

ऋग्वेद — 10 मण्डलों, 1028 सूक्तों, तथा लगभग 10,552 मन्त्रों में विभक्त — मानव सभ्यता के सर्वाधिक प्राचीन extant साहित्यिक-धार्मिक ग्रंथों में से एक है। पण्डित विश्वनाथ विद्यालंकार — जिन्होंने अथर्ववेद-भाष्य जैसे विशाल कार्य भी किए हैं — इस ग्रंथ में ऋग्वेद के सम्पूर्ण scope का एक systematic, comprehensive परिचय प्रस्तुत करते हैं।

**ऋग्वेद की संरचना का परिचय** — 10 मण्डलों की organization, ‘कुल-मण्डल’ (family-books, मण्डल 2-7) एवं ‘गैर-कुल-मण्डल’ (मण्डल 1, 8, 9, 10) का भेद, तथा प्रत्येक मण्डल की distinctive विशेषताएँ।

**प्रमुख देवताओं का परिचय** — इन्द्र, अग्नि, वरुण, मित्र, सूर्य, सोम, मरुत् जैसे प्रमुख वैदिक देवताओं का scholarly परिचय, उनके यौगिक अर्थ (महर्षि दयानन्द की परम्परा के अनुरूप), तथा उनके प्रमुख सूक्त।

**प्रमुख सूक्तों का परिचय** — पुरुष-सूक्त, नासदीय-सूक्त, हिरण्यगर्भ-सूक्त, गायत्री-मन्त्र, विश्वकर्मा-सूक्त जैसे celebrated सूक्तों का detailed परिचय, उनकी philosophical एवं literary significance के साथ।

**ऋषि-परम्परा का परिचय** — प्रमुख मन्त्र-द्रष्टा ऋषियों का परिचय, तथा उनकी distinctive contribution।

**छन्द-वैविध्य का परिचय** — गायत्री, उष्णिक्, अनुष्टुप्, त्रिष्टुप्, जगती जैसे छन्दों का ऋग्वेदीय usage का परिचय।

**ऋग्वेद का civilisational महत्त्व** — यह प्राचीनतम वैदिक साहित्य किस प्रकार भारतीय संस्कृति, दर्शन, तथा सामाजिक जीवन का foundational स्रोत है, इसका scholarly विवेचन।

**अध्ययन-methodology** — नए विद्यार्थियों के लिए practical guidance — किस क्रम में ऋग्वेद का अध्ययन करें, कौन-से मण्डल पहले पढ़ें, तथा किन classical एवं आधुनिक भाष्यों का reference लें।

पण्डित विश्वनाथ विद्यालंकार की writing-शैली comprehensive scholarly coverage एवं accessible clarity का संतुलन प्रस्तुत करती है, जो नए विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।

Vedic literature के नए विद्यार्थियों, वैदिक gurukulas के students, संस्कृत-वेद-शास्त्र के अभ्यर्थियों, comparative religion के researchers, तथा प्रत्येक उस सुधी जिज्ञासु के लिए जो ऋग्वेद का एक comprehensive, authoritative, तथा accessible हिन्दी परिचय चाहता है — ऋग्वेद-परिचय एक अनिवार्य foundational scholarly संसाधन है।

ग्रंथ के अंत में पण्डित विश्वनाथ विद्यालंकार ने कुछ commonly-asked प्रश्नों का भी संक्षिप्त उत्तर प्रस्तुत किया है — जैसे ऋग्वेद की dating, इसकी authenticity, तथा आधुनिक scientific temperament के साथ इसकी compatibility — जो नए पाठकों की स्वाभाविक जिज्ञासाओं को सम्बोधित करता है।

Enable Notifications OK No thanks