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Purusharth-Prakash (Hindi) – Dharma Artha Kama Moksha Philosophy

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पुरुषार्थ-प्रकाश (Purusharth-Prakash), यह 250 पृष्ठीय हिन्दी scholarly ग्रंथ, भारतीय जीवन-दर्शन के foundational framework — चतुर्विध पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) — का एक comprehensive एवं व्यावहारिक विवेचन प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति वैदिक जीवन-दर्शन के इस central concept को आधुनिक गृहस्थ-साधक के लिए scholarly किन्तु practical रूप में उजागर करती है।

‘पुरुषार्थ’ — ‘पुरुष’ (मानव) + ‘अर्थ’ (उद्देश्य/लक्ष्य) — अर्थात् मानव-जीवन के मूलभूत उद्देश्य। भारतीय civilisational दृष्टि में जीवन को केवल एक अराजक, purposeless यात्रा नहीं माना गया, अपितु चार systematic, interconnected लक्ष्यों की एक structured pursuit माना गया है। यह चतुर्विध framework — धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष — ग्रंथ का central विषय है।

ग्रंथ का प्रथम खण्ड ‘धर्म’ के scholarly विवेचन को समर्पित है — यह चारों पुरुषार्थों में सर्वप्रथम एवं foundational है। धर्म का अर्थ केवल religion नहीं, अपितु नैतिक-कर्तव्य, righteous conduct, तथा cosmic order के साथ सामंजस्य है। ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ — धर्म-रक्षा से ही धर्म रक्षा करता है — यह सिद्धान्त ग्रंथ के इस खण्ड का आधार है। वर्णाश्रम-धर्म, सामान्य-धर्म (universal ethics), एवं विशेष-धर्म (context-specific duties) का scholarly भेद भी प्रस्तुत है।

‘अर्थ’ — भौतिक समृद्धि एवं आर्थिक सुरक्षा — का scholarly विवेचन द्वितीय खण्ड में है। भारतीय परम्परा धन-अर्जन को निषिद्ध नहीं मानती, अपितु इसे धर्म-संगत रूप से — नैतिक साधनों से, समाज-कल्याण को ध्यान में रखते हुए — प्राप्त करने पर बल देती है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र से भी relevant references दिए गए हैं।

‘काम’ — इच्छाओं की पूर्ति, आनन्द, तथा जीवन का सौन्दर्यबोध-पक्ष — का scholarly विवेचन तृतीय खण्ड में है। लेखक यह स्पष्ट करते हैं कि ‘काम’ का अर्थ केवल sensual pleasure नहीं, अपितु cultural, aesthetic, तथा emotional fulfillment भी है — कला, संगीत, साहित्य, प्रेम, पारिवारिक सुख — यह सब इसमें सम्मिलित हैं, बशर्ते यह धर्म-सीमाओं के अन्तर्गत हो।

‘मोक्ष’ — अंतिम एवं सर्वोच्च पुरुषार्थ — का scholarly विवेचन चतुर्थ खण्ड में है। जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति, आत्म-साक्षात्कार, तथा परमात्मा के साथ एकत्व-अनुभूति — यह मोक्ष का वैदिक-वेदान्तिक स्वरूप है। कैसे शेष तीन पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम) का सम्यक् संतुलित अभ्यास अंततः मोक्ष की ओर ले जाता है, इसका integrated विवेचन।

**चारों पुरुषार्थों का interconnection** ग्रंथ का एक central theme है — यह चार लक्ष्य पृथक्-पृथक् नहीं, अपितु एक integrated हierarchy में हैं, जहाँ धर्म शेष तीन को guide एवं constrain करता है, तथा मोक्ष उनका ultimate culmination है। यह holistic framework जीवन को एक balanced, meaningful एवं purposeful यात्रा के रूप में प्रस्तुत करता है।

**आश्रम-व्यवस्था के साथ correlation** भी विवेचित है — कैसे जीवन के विभिन्न चरणों (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास) में इन चारों पुरुषार्थों का relative emphasis बदलता जाता है — युवावस्था में अर्थ-काम पर अधिक बल, वृद्धावस्था में मोक्ष-केन्द्रित साधना।

**आधुनिक जीवन में practical application** पर विशेष बल दिया गया है — कैसे career, family, personal fulfillment, तथा spiritual growth — इन सबको एक balanced जीवन-शैली में integrate किया जाए, यह contemporary गृहस्थ के लिए विशेष रूप से relevant guidance है।

आर्य समाज परम्परा के अनुरूप, ग्रंथ में वैदिक एकेश्वरवादी framework में इन चारों पुरुषार्थों की व्याख्या प्रस्तुत की गई है, जो dharmic जीवन-शैली का एक coherent एवं comprehensive vision प्रस्तुत करता है।

ग्रंथ की भाषा scholarly किन्तु सुलभ हिन्दी है। 250 पृष्ठीय comprehensive आयाम विषय की depth के अनुरूप है।

दर्शनशास्त्र के विद्यार्थियों, गृहस्थ-साधकों, जीवन-दिशा खोज रहे युवाओं, आर्य समाज के साधकों, career-family-spirituality के balance में रुचि रखने वाले professionals, तथा प्रत्येक उस सुधी पाठक के लिए जो भारतीय जीवन-दर्शन के इस foundational framework को गहराई से समझना चाहता है — पुरुषार्थ-प्रकाश एक comprehensive एवं trustworthy मार्गदर्शक है।

ग्रंथ के अंतिम अध्याय में एक practical self-assessment framework भी प्रदान किया गया है, जो पाठक को अपने वर्तमान जीवन में इन चारों पुरुषार्थों के संतुलन का self-evaluation करने में सहायक है — कहीं अत्यधिक अर्थ-केन्द्रित जीवन-शैली, धर्म एवं मोक्ष की उपेक्षा तो नहीं कर रही? कहीं अत्यधिक काम-आसक्ति, दीर्घकालीन कल्याण को हानि तो नहीं पहुँचा रही? यह introspective tool ग्रंथ को केवल theoretical exposition से आगे एक genuinely actionable life-planning-resource बनाता है।

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