Panineeya Shiksha (Hindi–Sanskrit) – by Swami Chidanand Saraswati | Vedanga Phonetics Treatise

Product details
पाणिनीय शिक्षा (Panineeya Shiksha), स्वामी चिदानन्द सरस्वती द्वारा सम्पादित-व्याख्यात यह 80 पृष्ठीय हिन्दी-संस्कृत ग्रंथ, संस्कृत के षड्-वेदाङ्गों में से एक ‘शिक्षा’ (phonetics) का प्रामाणिक प्रस्तुतीकरण है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति महर्षि पाणिनि की पाणिनीय शिक्षा को आधुनिक संस्कृत-साधक तक authentic स्वरूप में पहुँचाने का एक scholarly प्रयास है।
‘शिक्षा’ वेदाङ्गों में सर्वप्रथम है — ‘शिक्षा कल्पो व्याकरणं निरुक्तं छन्दो ज्योतिषम्’। यह वैदिक स्वर-विज्ञान, उच्चारण-शुद्धता एवं ध्वनि-विज्ञान का शास्त्र है। वेद-मन्त्रों के सही उच्चारण के बिना यज्ञ-कर्म एवं वेद-पाठ अधूरे रह जाते हैं — यह वैदिक मान्यता थी। अतः शिक्षा-शास्त्र को विशेष महत्त्व प्रदान किया गया।
पाणिनीय शिक्षा महर्षि पाणिनि से सम्बद्ध एक प्राचीन शिक्षा-ग्रंथ है। यह ग्रंथ कुल लगभग 60 श्लोकों में संस्कृत स्वर-विज्ञान, स्थान-प्रयत्न-वर्णन, उच्चारण-नियमों एवं अध्येता-गुण-दोष का systematic विवेचन प्रस्तुत करता है। इसकी एक विशेषता यह है कि यह न केवल स्वर-विज्ञान का शास्त्र है, अपितु अध्यापक-शिक्षार्थी-संबंध, अध्ययन-पद्धति एवं शास्त्र-गरिमा का भी विधान करता है।
ग्रंथ का प्रथम खण्ड वर्ण-विज्ञान का scholarly विवेचन प्रस्तुत करता है। संस्कृत वर्णमाला के 64 वर्ण (कतिपय परम्पराओं में), उनका वर्गीकरण — स्वर एवं व्यंजन, स्पर्श एवं अस्पर्श, घोष एवं अघोष — इन सबका शास्त्रीय परिचय है। प्रत्येक वर्ण के ‘स्थान’ (मुख-गह्वर में उच्चारण-स्थल) एवं ‘प्रयत्न’ (उच्चारण-प्रयास) का scholarly वर्णन है — कण्ठ्य, तालव्य, मूर्धन्य, दन्त्य, ओष्ठ्य।
स्वराङ्कन-व्यवस्था पर विशेष विवेचन है। उदात्त (high pitch), अनुदात्त (low pitch), स्वरित (mixed) — इन तीन वैदिक स्वरों का स्वरूप-निरूपण, प्रत्येक वैदिक मन्त्र में स्वर के सही प्रयोग का महत्त्व, स्वर-त्रुटि के कर्म-फल-संबंधी परिणाम — यह सब प्रामाणिक तरीके से प्रस्तुत है। प्रसिद्ध श्लोक ‘मन्त्रो हीनः स्वरतो वर्णतो वा मिथ्या प्रयुक्तो न तमर्थमाह’ — इसका scholarly विवेचन ग्रंथ का एक उल्लेखनीय अंश है।
मात्रा-विज्ञान का अध्याय भी मूल्यवान है। ह्रस्व (एक मात्रा), दीर्घ (दो मात्रा), प्लुत (तीन मात्रा) — इन तीन कालिक भेदों का systematic विवरण; प्रत्येक का सटीक उच्चारण कैसे किया जाए — इसका practical guidance। संस्कृत छन्द-शास्त्र की भी इसमें मूल भूमि निहित है।
अध्येता-गुण-दोष का अध्याय शास्त्रीय रूप से रोचक है। ‘गीती शीघ्री शिरःकम्पी तथा लिखितपाठकः’ — यह छह दोष जो वेद-पाठक को त्याज्य हैं, इनका scholarly विवेचन है। साथ ही, उत्तम वेद-पाठक के गुण — मुक्त-कण्ठ, स्थिर मनस्, वर्ण-शुद्धता, स्वर-नियम-पालन — इन सबका वर्णन है। यह न केवल वेद-पाठ हेतु, अपितु samजat समस्त सार्वजनिक वक्तृत्व-कला हेतु practical guidance है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती का scholarly सम्पादन-कार्य ग्रंथ की एक विशेष उपलब्धि है। उन्होंने मूल पाणिनीय शिक्षा का devanagari में authentic प्रस्तुतीकरण किया है, साथ ही प्रत्येक श्लोक का हिन्दी अनुवाद, संस्कृत व्याख्या, एवं scholarly टिप्पणी प्रस्तुत की है। यह त्रिविध संरचना ग्रंथ को संस्कृत-शिक्षार्थी एवं scholar — दोनों के लिए उपयोगी बनाती है।
आधुनिक linguistics के दृष्टिकोण से भी पाणिनीय शिक्षा का अध्ययन रोचक है। आधुनिक phonetics के concepts — articulation places, manner of articulation, voiced/voiceless distinction, aspiration — यह सब किस प्रकार पाणिनीय शिक्षा में पहले से निहित थे, यह comparative scholarship का एक मूल्यवान विषय है। प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक चिन्तन की precision एवं systematic approach का यह एक श्रेष्ठ उदाहरण है।
ग्रंथ का व्यावहारिक उपयोग वेद-पाठियों, पुरोहितों, यज्ञानुष्ठान-कर्ताओं, संस्कृत-शिक्षकों एवं संस्कृत-शिक्षार्थियों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है। बिना शिक्षा-शास्त्र के सम्यक् ज्ञान के, संस्कृत मन्त्रों का सही उच्चारण असम्भव है, और बिना सही उच्चारण के वेद-कर्म एवं वैदिक स्वाध्याय का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
प्रकाशकीय गुणवत्ता विषय की वैदिक गरिमा के अनुरूप है। 80 पृष्ठीय compact आकार ग्रंथ को pocket-companion बनाता है, जिसे दैनिक स्वाध्याय में सरलता से प्रयोग किया जा सकता है। 50 रुपए मूल्य scholarly value के सम्मुख अत्यन्त उचित है।
संस्कृत के विद्यार्थियों, वेद-पाठियों, पुरोहितों, यज्ञानुष्ठान-कर्ताओं, गुरुकुलीय शिक्षकों, वेदाङ्ग-शास्त्र के researchers, आर्य समाज के साधकों, भाषा-विज्ञान के अध्येताओं, एवं प्रत्येक उस सुधी जिज्ञासु के लिए जो संस्कृत के phonetic तंत्र की systematic दृष्टि का परिचय चाहता है — पाणिनीय शिक्षा एक अनिवार्य ग्रंथ है। यह कृति वैदिक स्वर-विज्ञान की civilisational गरिमा का एक मूर्त रूप है।
Shipping and Returns
Shipping cost is based on weight. Just add products to your cart and use the Shipping Calculator to see the shipping price.
We want you to be 100% satisfied with your purchase. Items can be returned or exchanged within 30 days of delivery.
Ramlal Kapoor Trust Books| Vedickarts
There are no question found.






Rating & Review
There are no reviews yet.