Vedic Books

Pancha Mahayagya Vidhi (Hindi–Sanskrit) – by Swami Dayanand Saraswati | Five Daily Vedic Yajnas

30.00
22 people are viewing this right now
Estimated Delivery:
29 Jul - 05 Aug, 2026
payment-processing
Guaranteed safe & secure checkout

Product details

पञ्च महायज्ञ विधि (Pancha Mahayagya Vidhi), महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा रचित यह Hindi-Sanskrit द्वि-भाषी ग्रंथ, गृहस्थ आर्य साधक के पाँच अनिवार्य दैनिक यज्ञों — पञ्च-महायज्ञ — की authentic, systematic विधि प्रस्तुत करता है। रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित यह कृति आर्य समाज परम्परा के दैनिक धार्मिक अनुशासन का एक foundational मार्गदर्शक है।

**पञ्च-महायज्ञ** — ब्रह्म-यज्ञ, देव-यज्ञ, पितृ-यज्ञ, भूत-यज्ञ, तथा मनुष्य-यज्ञ — यह पाँच दैनिक obligatory duties प्रत्येक गृहस्थ द्विज के लिए shastrically अनिवार्य माने गए हैं। महर्षि दयानन्द ने अपनी ‘संस्कारविधि’ में इनका उल्लेख किया, तथा यह ग्रंथ उसी परम्परा का detailed, practical exposition है।

**ब्रह्म-यज्ञ** — वेद-स्वाध्याय — का detailed विवेचन। दैनिक वेद-पाठ की विधि, उपयुक्त समय, तथा वेद-अध्ययन का आध्यात्मिक-नैतिक महत्त्व। यह प्रथम यज्ञ ज्ञान-प्राप्ति एवं आत्मिक उन्नयन पर केन्द्रित है।

**देव-यज्ञ** — अग्निहोत्र — की सम्पूर्ण procedure। अग्नि-प्रज्वलन की विधि, आवश्यक आहुति-सामग्री (घृत, समिधा, हविष्य), प्रयोज्य मन्त्रों का प्रामाणिक क्रम, तथा इसके पीछे का वैज्ञानिक-आध्यात्मिक rationale — वायु-शुद्धीकरण एवं सामूहिक कल्याण-भावना।

**पितृ-यज्ञ** — पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता एवं तर्पण-कर्म का विवेचन — कैसे यह कर्म पारिवारिक निरन्तरता एवं पूर्वज-सम्मान की dharmic भावना को अभिव्यक्त करता है।

**भूत-यज्ञ** — बलि-वैश्वदेव — प्राणि-मात्र के प्रति करुणा एवं दान की भावना का practical अभिव्यक्ति, जहाँ भोजन का एक अंश पशु-पक्षियों तथा अन्य प्राणियों के लिए अर्पित किया जाता है।

**मनुष्य-यज्ञ** — अतिथि-सत्कार — ‘अतिथि देवो भव’ का practical अनुपालन, तथा सामाजिक सद्भाव एवं करुणा को प्रोत्साहित करने वाला यह पाँचवाँ यज्ञ।

महर्षि दयानन्द की मूल scholarly methodology प्रत्येक यज्ञ के लिए आवश्यक Sanskrit मन्त्र, उनका हिन्दी अनुवाद, तथा उनके पीछे का shastric तर्क प्रस्तुत करती है, जो इस ग्रंथ को एक authoritative ritual-cum-philosophical treatise बनाता है।

**आधुनिक व्यावहारिकता** — इस ग्रंथ में यह भी सुझाया गया है कि व्यस्त आधुनिक गृहस्थ-जीवन में इन पञ्च-यज्ञों को कैसे संक्षिप्त किन्तु authentic रूप में सम्पन्न किया जाए, जिससे यह shastric सत्यनिष्ठा बनाए रखते हुए भी practical रूप से feasible रहे।

ग्रंथ की भाषा शास्त्रीय Sanskrit एवं सुगम हिन्दी का संयोजन है, जो कर्मकाण्ड-परम्परा की गरिमा एवं व्यावहारिक उपयोगिता — दोनों को साथ लाती है।

आर्य समाज के गृहस्थ साधकों, नित्य-यज्ञ-पालन में रुचि रखने वाले परिवारों, वैदिक जीवन-शैली अपनाने के इच्छुक साधकों, कर्मकाण्ड-shastri के अभ्यर्थियों, तथा प्रत्येक उस dharmic गृहस्थ के लिए जो अपने दैनिक जीवन में authentic वैदिक अनुशासन स्थापित करना चाहता है — पञ्च महायज्ञ विधि एक अनिवार्य एवं trustworthy मार्गदर्शक है।

महर्षि दयानन्द ने इस ग्रंथ में यह भी स्पष्ट किया है कि पञ्च-महायज्ञों का पालन केवल एक ritualistic obligation नहीं, अपितु एक comprehensive dharmic-ecological-social framework है — जो व्यक्ति के ईश्वर के प्रति (ब्रह्म-यज्ञ, देव-यज्ञ), पूर्वजों के प्रति (पितृ-यज्ञ), प्रकृति के प्रति (भूत-यज्ञ), तथा समाज के प्रति (मनुष्य-यज्ञ) — चतुर्विध उत्तरदायित्वों को एक संतुलित दैनिक अभ्यास में समाहित करता है। यह holistic vision ग्रंथ की civilisational गहराई को उजागर करती है, जो आधुनिक sustainability एवं community-responsibility के concepts से भी resonate करती है। इस प्रकार यह संक्षिप्त किन्तु गहन ग्रंथ गृहस्थ-जीवन को एक सुसंगत dharmic संरचना प्रदान करता है, जो शताब्दियों से आर्य परिवारों का दैनिक साथी रहा है। महर्षि की यह मूल कृति आज भी लाखों आर्य परिवारों के दैनिक जीवन का अभिन्न अंग है।

Enable Notifications OK No thanks