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Mai Nathuram Godse Bol Raha Hu (Hindi) – by Nathuram Godse | Historic Court Statement

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मैं नाथूराम गोडसे बोल रहा हूँ (Mai Nathuram Godse Bol Raha Hu), यह 135 पृष्ठीय हिन्दी ग्रंथ, भारतीय इतिहास के एक अत्यंत विवादास्पद किन्तु ऐतिहासिक रूप से महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व — नाथूराम विनायक गोडसे — के स्वयं के शब्दों एवं उनके न्यायालयीन वक्तव्य पर आधारित एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ है। अमर स्वामी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह कृति उस सुप्रसिद्ध एवं suppressed वक्तव्य का हिन्दी रूपान्तरण प्रस्तुत करती है, जिसे गोडसे ने 1948 में लाल किले की विशेष अदालत के सम्मुख स्वयं अपने बचाव में दिया था।

यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि यह ग्रंथ किसी हिंसक कृत्य की प्रशंसा अथवा समर्थन नहीं करता। महात्मा गांधी की हत्या एक भयंकर त्रासदी थी जिसने राष्ट्र को आजीवन शोक में डुबो दिया। यह कृति केवल एक historical दस्तावेज़ है — एक ऐसा दस्तावेज़ जिसे दशकों तक भारत में आधिकारिक रूप से प्रकाशन से प्रतिबन्धित रखा गया था, तथा जिसका scholarly अध्ययन ही इतिहास-शोध की मूल आवश्यकता है। प्रत्येक सुधी पाठक एवं इतिहास-विद्यार्थी का यह अधिकार है कि वह primary sources तक पहुँचे और स्वयं अपना scholarly मत निर्मित करे।

गोडसे का यह वक्तव्य ‘May It Please Your Honour’ के नाम से अंग्रेज़ी में सर्वप्रथम प्रकाशित हुआ था। उन्होंने अपने इस अंतिम वक्तव्य में अपने जीवन की यात्रा, वैचारिक संरचना, राजनीतिक चिन्तन एवं उन कारणों का स्वयं विवरण प्रस्तुत किया है जिन्होंने उन्हें इस अक्षम्य कृत्य की ओर प्रवृत्त किया। यह वक्तव्य ऐतिहासिक रूप से इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह उस काल के एक ध्रुवीकृत सामाजिक-राजनीतिक mindset का primary दस्तावेज़ है।

ग्रंथ में गोडसे की पारिवारिक पृष्ठभूमि, चितपावन ब्राह्मण समुदाय, उनकी प्रारम्भिक शिक्षा, हिन्दू महासभा एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ उनके सम्बन्ध, तथा क्रमशः उनके वैचारिक विकास का वर्णन है। साथ ही, उन ऐतिहासिक घटनाओं — विभाजन की भयावह त्रासदी, हिन्दू शरणार्थियों की दुर्दशा, गांधीजी की कतिपय नीतियों के विरुद्ध विरोध — का भी विवरण है, जिन्होंने उनके चिन्तन को आकार दिया।

यहाँ यह स्मरण रखना अत्यन्त आवश्यक है कि किसी व्यक्ति के स्वयं के वक्तव्य का अर्थ उसकी justification नहीं है। एक ऐतिहासिक hatya-कारी की self-explanation को पढ़ना उसी प्रकार है जैसे किसी अन्य ऐतिहासिक viewpoint को scholarly distance के साथ पढ़ना। पाठक से अपेक्षा है कि वह critical scholarly दृष्टि बनाए रखे — दस्तावेज़ को समझे, परीक्षण करे, किन्तु हिंसा को कभी न्यायसंगत न माने।

विभाजन-कालीन हिंसा का जो विवरण इस ग्रंथ में आता है, वह स्वतंत्र ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। पंजाब एवं बंगाल में हिन्दू एवं सिख समुदायों पर हुए अत्याचार, शरणार्थी-शिविरों की दुर्दशा, तत्कालीन प्रशासनिक एवं राजनीतिक निर्णयों के मानवीय परिणाम — इन सबका साक्ष्य कई प्राथमिक स्रोतों से उपलब्ध है, एवं यह वक्तव्य भी उसी ऐतिहासिक संदर्भ का एक अंग है।

ग्रंथ की भाषा सरल किन्तु formal हिन्दी है। न्यायालयीन वक्तव्य की संरचना यथासम्भव संरक्षित है। 135 पृष्ठीय compact आकार पाठक को एकसाथ अध्ययन करने योग्य बनाता है।

यह कृति आधुनिक भारतीय इतिहास के विद्यार्थियों, राजनीति-विज्ञान के शोधार्थियों, पत्रकारों, इतिहास-विशेषज्ञों, एवं उन सुधी पाठकों के लिए है जो विभाजन-काल की complexity को primary sources के माध्यम से समझना चाहते हैं। यह काल भारतीय इतिहास का सर्वाधिक दुखद एवं consequential अध्याय है, और इसके scholarly अध्ययन के लिए विभिन्न दृष्टिकोणों के मूल दस्तावेज़ों तक पहुँच आवश्यक है।

अंत में पुनः रेखांकित करना आवश्यक है — महात्मा गांधी की हत्या एक राष्ट्रीय त्रासदी थी, गांधीजी के अहिंसा-दर्शन एवं उनके जीवन-कर्म का योगदान इतिहास में अमिट है। यह ग्रंथ केवल historical context प्रदान करता है, उस त्रासद कृत्य का justification नहीं। पाठक से expected है कि वह scholarly objectivity एवं नैतिक clarity — दोनों के साथ इस दस्तावेज़ का अध्ययन करे।

ग्रंथ का प्रकाशन-इतिहास भी ऐतिहासिक रूप से उल्लेखनीय है। दशकों तक यह वक्तव्य भारत में आधिकारिक रूप से उपलब्ध नहीं था, क्योंकि सरकार ने इस पर अघोषित प्रतिबन्ध लगा रखा था। आधुनिक काल में, जब historical दस्तावेज़ों तक scholarly पहुँच का सिद्धान्त लोकतांत्रिक स्वीकृति प्राप्त कर चुका है, तब यह कृति समकालीन पाठक के लिए सुलभ हुई है। यह उपलब्धता स्वयं में एक ऐतिहासिक मुक्ति है — censorship से शोध-स्वतंत्रता की ओर। साहित्यिक एवं ऐतिहासिक दस्तावेज़ों का पठन एवं अध्ययन एक सभ्य लोकतंत्र का मूल अधिकार है, चाहे वह दस्तावेज़ कितना भी विवादास्पद क्यों न हो — और प्रत्येक पाठक से अपेक्षा है कि वह scholarly maturity के साथ ऐसे दस्तावेज़ों का परीक्षण करे।

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